धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में बड़ा फेरबदल
भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही सर्राफा बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। खासकर धनतेरस और दीपावली के पवित्र अवसरों पर सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार त्योहारी सीजन से ठीक पहले कीमती धातुओं के बाजार से जो खबरें आ रही हैं, वे आम खरीदारों और निवेशकों दोनों के लिए बेहद चौंकाने वाली हैं। पिछले कुछ हफ्तों से सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, जिससे ग्राहक असमंजस में हैं कि इस समय खरीदारी करना समझदारी होगी या थोड़ा इंतजार करना बेहतर रहेगा।
बाजार के जानकारों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और वैश्विक अनिश्चितताओं की वजह से सोने और चांदी के दाम अपने रिकॉर्ड उच्च स्तरों से नीचे आए हैं। इसके बावजूद, देश के प्रमुख सर्राफा बाजारों में अभी भी कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। दिल्ली और अन्य महानगरों के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही तो शुरू हो गई है, लेकिन लोग हर दिन के उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
सर्राफा संघ के आंकड़ों के मुताबिक, इस हफ्ते के दौरान भी सोने और चांदी के भावों में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि कुछ सत्रों में मामूली सुधार जरूर देखने को मिला, लेकिन कुल मिलाकर रुख कमजोरी की तरफ ही इशारा कर रहा है। ऐसे में बाजार के जानकारों की सलाह है कि ग्राहकों को खरीदारी करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और बाजार के रुख का सही आकलन जरूर कर लेना चाहिए।
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एचएसबीसी और बैंक ऑफ अमेरिका का बड़ा अनुमान: और गिर सकते हैं दाम
वैश्विक वित्तीय बाजारों से आ रही रिपोर्ट्स ने सर्राफा बाजार की दिशा पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। प्रतिष्ठित वैश्विक बैंक एचएसबीसी (HSBC) ने वर्ष 2026 और 2027 के लिए सोने की औसत कीमतों के अपने अनुमानों में कटौती कर दी है। बैंक का मानना है कि निकट भविष्य में सोने पर दबाव और अधिक बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एचएसबीसी ने साल 2026 के लिए सोने की औसत कीमत का अनुमान घटाकर 4,490 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। यदि भारतीय मुद्रा और कर संरचना के हिसाब से देखा जाए, तो यह कीमत लगभग 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बैठती है। इसके अलावा, साल 2027 के लिए इस अनुमान को कम करके 4,825 डॉलर प्रति औंस यानी लगभग 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आंका गया है।
दूसरी ओर, बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ने इससे भी ज्यादा बड़ी गिरावट की आशंका जताई है। बैंक का अनुमान है कि चालू वर्ष की चौथी तिमाही में वैश्विक स्तर पर सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसलकर करीब 3,750 डॉलर प्रति औंस तक आ सकती है। भारतीय संदर्भ में यदि इसका विश्लेषण किया जाए, तो यह स्तर काफी नीचे जा सकता है, हालांकि अंतिम कीमतें डॉलर और रुपये के विनिमय दर पर ही निर्भर करेंगी।
देश के प्रमुख ज्वेलरी ब्रांड्स और स्थानीय बाजारों में क्या चल रहे हैं ताजा भाव
देशभर के सर्राफा बाजारों में ग्राहकों के लिए अलग-अलग शुद्धता के सोने के भाव भिन्न हैं। दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत डेढ़ लाख रुपये के आसपास बनी हुई है, जबकि 22 कैरेट और 18 कैरेट सोना अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल रहा है। त्योहारी सीजन को देखते हुए देश के बड़े ज्वेलरी ब्रांड्स ने भी अपने ग्राहकों के लिए विशेष तैयारियां की हैं।
प्रमुख आभूषण निर्माताओं जैसे तनिष्क, कल्याण ज्वैलर्स, जॉयअलुक्कास और मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के स्टोर्स पर ग्राहकों की खासी भीड़ देखने को मिल रही है। इन बड़े ब्रांड्स के स्टोर्स पर 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के अलग-अलग ग्राम के हिसाब से स्पष्ट दरें प्रदर्शित की जा रही हैं। तनिष्क और मलाबार जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में सोने की प्रति 10 ग्राम की कीमतें डेढ़ लाख रुपये के दायरे में कारोबार कर रही हैं, जबकि चांदी की कीमतों में हाल ही में आई भारी गिरावट के बाद यह भी महत्वपूर्ण स्तर पर आ गई है।
"कीमती धातुओं के बाजार में इस समय वैश्विक संकेतों का सबसे बड़ा हाथ है। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण निवेशकों का रुझान बार-बार बदल रहा है। त्योहारी सीजन के दौरान भारत में हाजिर मांग हमेशा की तरह मजबूत रहने की उम्मीद है, लेकिन निवेशकों को लंबी अवधि के नजरिए से ही निवेश करना चाहिए।" — वरिष्ठ वित्तीय विश्लेषक, सर्राफा बाजार
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक आर्थिक संकेतकों का असर
सोने की वैश्विक चाल को तय करने में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। एचएसबीसी की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास के स्तर पर पहुंचता है, तो दुनिया भर के केंद्रीय बैंक एक बार फिर से अपनी रिजर्व होल्डिंग्स बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर खरीदारी शुरू कर सकते हैं। इसके साथ ही व्यक्तिगत निवेशकों का रुझान भी इन स्तरों पर बढ़ने की पूरी संभावना है।
वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड सुस्त दायरे में कारोबार कर रहा है। अमेरिका में हाल ही में आए कमजोर महंगाई के आंकड़ों के कारण ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कुछ हद तक कम हुई हैं, जिससे सोने को कुछ समय के लिए समर्थन जरूर मिला है। हालांकि, निवेशकों की नजरें अब अमेरिकी रोजगार और पेरोल डेटा पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में बाजार की अगली दिशा तय करेंगे। घरेलू मोर्चे पर भी रुपये के कमजोर होने की वजह से सोने की घरेलू कीमतों को कुछ हद तक सहारा मिल रहा है।
विशेषज्ञों की सलाह: क्या इस त्योहारी सीजन में करें खरीदारी?
सोने और चांदी की कीमतों में चल रहे इस उतार-चढ़ाव के बीच आम निवेशकों और ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उन्हें मौजूदा दामों पर खरीदारी करनी चाहिए या थोड़ा और इंतजार करना चाहिए। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों और शादियों के सीजन में भारत में सोने की मांग कभी पूरी तरह शून्य नहीं होती, क्योंकि यह हमारी सांस्कृतिक परंपराओं का एक अनिवार्य हिस्सा है।
यदि कोई खरीदार व्यक्तिगत इस्तेमाल या पारंपरिक उपहार के लिए सोना खरीदना चाहता है, तो उसे बाजार के छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव से ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, जो लोग केवल निवेश के उद्देश्य से बाजार में उतरना चाहते हैं, उन्हें विशेषज्ञ की सलाह और वैश्विक आर्थिक रुझानों को ध्यान में रखते हुए किश्तों में निवेश करने की रणनीति अपनानी चाहिए ताकि वे जोखिम को न्यूनतम कर सकें।








