नई दिल्ली/मुंबई: देश के सर्राफा बाजारों में पिछले कुछ घंटों के दौरान जो हुआ है, उसने निवेशकों और खरीदारों दोनों को हिलाकर रख दिया है। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम ने जब दिल्ली के चांदनी चौक और मुंबई के झावेरी बाजार जैसे देश के प्रमुख सर्राफा केंद्रों का दौरा किया, तो वहां एक अजीब सी खामोशी और गहरी चिंता का माहौल दिखाई दिया। कभी खरीदारों की भीड़ से गुलजार रहने वाली इन दुकानों पर इस समय केवल एक ही चर्चा है—सोने और चांदी की कीमतों में अचानक आई यह भारी और अप्रत्याशित गिरावट।
महज कुछ घंटों में ऐतिहासिक गिरावट
बाजार के ताजा आंकड़ों और हमारे फील्ड सर्वे के अनुसार, पिछले 30 से 48 घंटों के भीतर सोने और चांदी के दामों में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है। स्थिति यह है कि सोना पिछले दो दिनों में ही करीब ₹4,500 तक सस्ता हो चुका है, जबकि पिछले कुछ हफ्तों के रिकॉर्ड को देखें तो यह सीधे सात हफ्ते के सबसे निचले स्तर (लो) पर आ लुढ़का है। वहीं, सफेद धातु यानी चांदी की चाल ने तो सभी अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। एक ही झटके में 1 किलो चांदी की कीमत में ₹11,000 से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे इसके दाम गिरकर ₹2.22 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास आ गए हैं।
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क्या ₹1.40 लाख के नीचे आएगा सोना?
हमारी पड़ताल में सबसे बड़ा सवाल जो सामने आ रहा है, वह यह है कि क्या सोना अब मनोवैज्ञानिक रूप से अहम माने जाने वाले ₹1.40 लाख के स्तर से भी नीचे फिसल जाएगा? वर्तमान में, विभिन्न महानगरों में सोने का भाव ₹1.46 लाख के आसपास ट्रेड कर रहा है। पिछले कुछ सत्रों में आई लगातार गिरावट (जिसमें कुछ ही घंटों में 14 हजार तक के उतार-चढ़ाव देखे गए) ने खुदरा निवेशकों के होश उड़ा दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक दबाव इसी तरह बना रहा, तो आने वाले दिनों में कीमतें और नीचे जा सकती हैं, जिससे उन छोटे निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है जिन्होंने हाल ही में सर्वोच्च स्तर पर खरीदारी की थी।
चांदी में सबसे बड़ा करेक्शन
सोने के मुकाबले चांदी में आया भूचाल कहीं अधिक गहरा है। महज दो दिनों के भीतर चांदी लगातार फिसलती चली गई और लगभग ₹2,900 से लेकर ₹11,000 तक का गोता लगा चुकी है। औद्योगिक मांग में कमी और अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजारों (Global Commodities Market) में मुनाफावसूली को इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि इतने कम समय में चांदी में इस तरह का भारी करेक्शन पिछले कुछ महीनों में नहीं देखा गया था।
वैश्विक उथल-पुथल और घरेलू बाजार पर असर
हमारी खोजी रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे केवल घरेलू कारक जिम्मेदार नहीं हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर रुख, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक समीकरणों में बदलाव ने बुलियन मार्केट की चाल को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। जब वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्पों की तरफ दोबारा देख रहे हैं, तब कमोडिटी मार्केट से पैसा तेजी से बाहर निकाला जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातकों पर पड़ रहा है।
आम आदमी और निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
"बाजार में इस तरह की तेज गिरावट हमेशा एक चेतावनी और एक अवसर दोनों लेकर आती है। जिन लोगों ने ऊंचे दामों पर सोना या चांदी खरीद लिया था, उन्हें घबराने के बजाय लंबी अवधि के नजरिए से सोचना चाहिए। हालांकि, शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए यह समय बेहद जोखिम भरा है," बाजार विश्लेषक राकेश मल्होत्रा ने 'द फ्रीलान्स' से बातचीत में कहा।
अंततः, यह साफ है कि सर्राफा बाजार में अभी अस्थिरता का दौर थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। जैसे-जैसे वैश्विक संकेत स्पष्ट होंगे, सोने और चांदी की अगली चाल तय होगी। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और निवेशकों तक जमीनी सच पहुंचाता रहेगा।










