गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से सहमे लोग, कई इलाकों में फैला पानी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मूसलाधार बारिश और नदियों का जलस्तर बढ़ने से स्थिति गंभीर होती जा रही है। गोमती नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर उठ रहा है, जिसके चलते रविवार को दुबग्गा के जेहटा रोड और आसपास की बस्तियों में बाढ़ का पानी फैल गया। शाम होते-होते जेहटा-माल रोड पर करीब डेढ़ फीट तक पानी बहने लगा, जिससे यातायात और स्थानीय गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गईं। माल और इटौंजा के ग्रामीण अंचलों में भी हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, और प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आने वाले चौबीस घंटों में जलस्तर और अधिक बढ़ सकता है।
प्रशासनिक अमले ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया, लेकिन कई अंदरूनी इलाकों में अत्यधिक जलभराव के कारण अधिकारियों के वाहन वापस लौटने को मजबूर हो गए। इससे स्थानीय ग्रामीणों में खासी नाराजगी देखने को मिली। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए रात्रि गश्त बढ़ाने और दाऊद नगर में एक अतिरिक्त कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
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किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, सैकड़ों बीघा फसल डूबी
नदी के उफान पर आने से ग्रामीण इलाकों के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। मंजौवा गांव में गोमती का पानी घुसने से लगभग 500 बीघा धान की पकी हुई फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। इसके अलावा खीरा, लौकी और भिंडी जैसी सब्जियों की फसलें भी बर्बाद हो गई हैं। किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में पानी में डूब गई, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
फसलों के नुकसान के साथ-साथ कई गरीब परिवारों के कच्चे मकान भी लगातार बारिश और बाढ़ के पानी के दबाव से ढह गए हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी किनारों तक तबाही का मंजर साफ दिखाई दे रहा है, और लोग अपने आशियानों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा राहत कार्यों का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन मैदानी स्तर पर मदद पहुंचने में देरी से लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग, महंगे किराए पर लेने पड़े कमरे
फैजुल्लागंज के नंदन चौराहा, अटल चौक, गणेश विहार और मामा चौराहा जैसी घनी कॉलोनियों में हालात बद से बदतर हो चुके हैं। कई दिनों से घरों में पानी भरा होने के कारण लोगों का सब्र अब जवाब दे चुका है। मजबूर होकर परिवार के लोग अपना जरूरी सामान और छोटे बच्चों को लेकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकल पड़े हैं। कई परिवारों ने त्रिवेणीनगर और अन्य सुरक्षित इलाकों में तीन से साढ़े तीन हजार रुपये महीने तक का किराया देकर नए कमरे किराए पर लिए हैं ताकि किसी तरह गुजर-बसर हो सके।
"पांच दिनों तक पानी घटने का इंतजार करते रहे, लेकिन जब हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए और घर में रहना असंभव हो गया, तब मजबूरी में कमरा किराए पर लेकर यहां से जाना पड़ा।" — सीमा जायसवाल, स्थानीय निवासी
घरों से बेघर हुए लोग अपने जीवन की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अब किराए चुकाने और त तबाही के बाद दोबारा जिंदगी पटरी पर लाने में खर्च करने को विवश हैं। बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की सेहत पर भी इस आपदा का बुरा असर पड़ रहा है।
पेयजल संकट और प्रशासन की सुस्ती से बढ़ा आक्रोश
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलभराव के साथ-साथ शुद्ध पेयजल का भयंकर संकट पैदा हो गया है। नलों से बदबूदार और दूषित पानी आ रहा है, जिसे पीना तो दूर हाथ धोना भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। नगर निगम द्वारा पानी के टैंकर भेजे जाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कई बस्तियों के भीतर तक ये टैंकर नहीं पहुंच पा रहे हैं। लोग जुगाड़ वाली नावों या खुद पानी में चलकर दूर से बाल्टियों में पानी ढोने को मजबूर हैं।
स्थिति इतनी विकट है कि छोटे बच्चों और परिवार को गोद में लेकर लोग प्रशासनिक मदद या ट्रैक्टर-नाव के इंतजार में घंटों बैठे रहते हैं, लेकिन कई बार केवल कोरे आश्वासन ही हाथ लगते हैं। गैस सिलिंडर और अन्य जरूरी रसद सामग्री लाने के लिए भी लोगों को डेढ़ से दो फीट तक गहरे गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है।
शवदाह स्थलों तक पहुंचा पानी, अंतिम संस्कार में भी भारी दुश्वारियां
गोमती नदी के विकराल रूप ने जीवित इंसानों के साथ-साथ मृतकों के अंतिम सफर की राह भी बेहद कठिन कर दी है। गुलाला घाट के अंत्येष्टि स्थल परिसर में पिछले तीन दिनों से नदी का पानी भरा हुआ है। घाट की तरफ जाने वाली मुख्य सड़क पर डेढ़ फीट तेज बहाव के साथ पानी बह रहा है। शव वाहनों को भी बेहद सावधानी से पानी के बीच से गुजारकर चबूतरे तक लाना पड़ रहा है।
परिसर में पानी भर जाने के कारण विद्युत शवदाह गृह की बिजली आपूर्ति ठप कर दी गई है, जिससे वह पूरी तरह बंद है। लोगों को पारंपरिक विधि से ही पानी के बीच खड़े होकर अंतिम संस्कार करने की मजबूरियां झेलनी पड़ रही हैं। कुल मिलाकर, राजधानी के इस हिस्से में बाढ़ ने आम जनजीवन को पूरी तरहस्त-व्यस्त कर दिया है और लोग राहत की सांस लेने के लिए आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं।







