त्योहारी सीजन से ठीक पहले हवाई यात्रियों को बड़ा झटका
देश में फेस्टिव सीजन की शुरुआत के साथ ही आम आदमी के लिए यात्रा करना और अधिक खर्चीला होने जा रहा है। दिवाली और छठ पूजा के दौरान अपने घर-परिवार के पास जाने की योजना बना रहे यात्रियों को एयरलाइंस ने तगड़ा झटका दिया है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो (IndiGo Airlines) ने अपने विमानों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए किराए में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। कंपनी ने अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों श्रेणियों की उड़ानों के लिए एयर टर्बाइन फ्यूल चार्ज (ATF Surcharge) को संशोधित करते हुए बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर फ्लाइट टिकट के अंतिम मूल्य पर देखने को मिलेगा।
हवाई ईंधन यानी जेट फ्यूल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई लगातार तेजी के कारण विमानन कंपनियों के संचालन खर्च में भारी इजाफा हुआ है। इसी लागत के दबाव को कम करने के उद्देश्य से इंडिगो ने फ्यूल सरचार्ज में यह संशोधन किया है। त्योहारी सीजन के दौरान जब लोग एडवांस बुकिंग या आखिरी समय की टिकटों के जरिए अपने गंतव्य तक पहुंचने की कोशिश करते हैं, तब इस तरह की बढ़ोतरी यात्रियों के बजट को बुरी तरह प्रभावित करती है।
एयरलाइन प्रबंधन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ईंधन की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच एयरलाइन के संचालन और नेटवर्क अर्थव्यवस्था को संतुलित बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। यात्रियों को अब अपनी यात्रा की योजना बनाते समय बढ़े हुए शुल्कों को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि टिकट बुक करते समय फ्यूल सरचार्ज का यह अतिरिक्त घटक कुल किराए में जुड़कर आएगा।
संबंधित खबरें
घरेलू उड़ानों पर कितना बढ़ा फ्यूल सरचार्ज?
इंडिगो एयरलाइंस द्वारा घरेलू उड़ानों के लिए तय किए गए नए फ्यूल सरचार्ज को दूरी के अलग-अलग स्लैब में बांटा गया है। पूर्व की व्यवस्था की तुलना में अब यात्रियों को प्रति सेक्टर 100 रुपये से लेकर 350 रुपये तक अधिक शुल्क चुकाना होगा। नए नियमों के मुताबिक, 1000 किलोमीटर से 1500 किलोमीटर तक की दूरी वाले घरेलू मार्गों के लिए फ्यूल सरचार्ज बढ़ाकर 900 रुपये कर दिया गया है।
इसके अलावा, 1501 किलोमीटर से 2000 किलोमीटर तक की दूरी तय करने वाली उड़ानों के लिए यह शुल्क 1150 रुपये तय किया गया है। वहीं, जो उड़ानें 2000 किलोमीटर से अधिक की लंबी दूरी तय करती हैं, उनके लिए यात्रियों को अधिकतम 1300 रुपये का फ्यूल सरचार्ज देना होगा। यदि छोटे मार्गों की बात करें तो 500 किलोमीटर तक की दूरी के लिए भी आंशिक रूप से सौ रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
इससे पहले इंडिगो की ओर से लागू किए गए फ्यूल चार्ज दूरी के हिसाब से पांच अलग-अलग स्लैब में क्रमशः 275 रुपये, 400 रुपये, 600 रुपये, 800 रुपये और 950 रुपये हुआ करते थे। अब इन स्लैब में संशोधन होने के बाद घरेलू यात्रियों को अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ेगी, खासकर उन लोगों को जो महानगरों से दूर स्थित शहरों की यात्रा करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर सबसे बड़ा वित्तीय बोझ
केवल घरेलू मार्ग ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी यह खबर बेहद निराशाजनक है। वैश्विक उड़ानों के बढ़ते परिचालन खर्च को देखते हुए इंडिगो ने अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर फ्यूल सरचार्ज को भारी-भरकम रूप से बढ़ाते हुए 10,000 रुपये तक पहुंचा दिया है। विदेश यात्रा करने वाले पर्यटकों, छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए यह वृद्धि टिकट की कुल लागत को काफी महंगा बना देगी।
विमानन जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में ईंधन की खपत घरेलू उड़ानों की तुलना में बहुत अधिक होती है, और जेट फ्यूल की कीमतों में वैश्विक स्तर पर आने वाले उतार-चढ़ाव का सबसे ज्यादा असर लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर ही पड़ता है। खाड़ी देशों, दक्षिण-पूर्वी एशिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ान भरने वाले यात्रियों को अब टिकट बुक करते वक्त इस बड़े शुल्क का सामना करना पड़ेगा।
एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि विमानन क्षेत्र में ईंधन की लागत कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा होती है। ऐसे में जेट फ्यूल के दामों में होने वाली एक छोटी सी बढ़ोतरी भी एयरलाइंस के वित्तीय संतुलन को हिला देती है, जिसके चलते उन्हें मजबूरन यह अतिरिक्त भार यात्रियों पर डालना पड़ता है।
मंगलवार से लागू होंगे नए नियम और पुरानी बुकिंग पर राहत
यात्रियों के लिए एक राहत भरी बात यह है कि ये नए शुल्क तत्काल प्रभाव से पुरानी टिकटों पर लागू नहीं होंगे। इंडिगो एयरलाइंस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संशोधित एटीएफ फ्यूल चार्ज आगामी मंगलवार, यानी 6 अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे के बाद से की जाने वाली सभी नई बुकिंग पर प्रभावी होंगे।
इसका मतलब साफ है कि जिन यात्रियों ने इस तारीख से पहले ही अपनी टिकटें बुक करवा ली हैं, उन्हें किसी भी प्रकार का अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा। उनकी यात्रा पहले तय किए गए किराए पर ही पूरी होगी। हालांकि, जो लोग अब आने वाले दिनों में त्योहारी सीजन के मद्देनजर नई टिकट बुक करने जा रहे हैं, उन्हें बढ़े हुए दरों के हिसाब से ही भुगतान करना होगा।
विशेषज्ञों की सलाह है कि त्योहारों के समय अचानक टिकटों की मांग बढ़ने और कीमतों में उछाल आने से बचने के लिए यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना जितनी जल्दी हो सके बना लेनी चाहिए ताकि अंतिम समय की भारी-भरकम कीमतों से बचा जा सके।
वेस्ट एशिया जंग और वैश्विक बाजार में जेट फ्यूल की आग
इस पूरी बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव हैं। पिछले कुछ महीनों से मध्य पूर्व के हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिसका सीधा असर ग्लोबल क्रूड ऑयल और एटीएफ (एयर टर्बाइन फ्यूल) की सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।
हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने की तुलना में जेट फ्यूल की कीमतों में 14 प्रतिशत से अधिक की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ईंधन की लागत पिछले एक दशक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। घरेलू मोर्चे पर भी एटीएफ की कीमतों में करीब 13.2 प्रतिशत (यानी लगभग 16 रुपये प्रति लीटर) का इजाफा हुआ है, जिसके बाद कीमतें बढ़कर लगभग 137 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। पिछले तीन महीनों में यह लगातार तीसरा मौका है जब जेट ईंधन के दाम बढ़े हैं।
"मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में आए भारी उछाल के कारण हमारा परिचालन खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। एयरलाइन की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए यह संशोधन आवश्यक था।" — इंडिगो एयरलाइंस प्रबंधन
निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि वैश्विक उथल-पुथल का यह दौर अब सीधे तौर पर आम नागरिकों की जेब पर असर डाल रहा है। त्योहारी सीजन में घर जाने की उम्मीद संजोए बैठे यात्रियों को अब अपने यात्रा बजट में संशोधन करना ही होगा।





