भारत अब सेवा आधारित देश से उत्पाद आधारित राष्ट्र बनने की ओर
देश का दूरसंचार क्षेत्र एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। भारत अब तक मुख्य रूप से एक सेवा आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब नीतियां और तकनीकें इस बात की गवाही दे रही हैं कि देश 'उत्पाद आधारित देश' बनने की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस दिशा में एक बहुत बड़ा और ठोस कदम मध्य प्रदेश के ग्वालियर में उठाया जा रहा है, जहां देश का पहला एकीकृत दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) स्थापित किया जा रहा है।
दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा हाल ही में देश के तकनीकी हब बेंगलुरु में तीसरी निवेशक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश-विदेश की दिग्गज तकनीक, टेलीकॉम, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को ग्वालियर में बन रहे इस आधुनिक ज़ोन में निवेश के लिए आमंत्रित करना था। बैठक में उद्योग जगत के दिग्गजों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भारत की इस नई विनिर्माण यात्रा में अपनी गहरी रुचि दिखाई है।
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ग्वालियर में बन रहा देश का पहला इंटीग्रेटेड टेलीकॉम ज़ोन
ग्वालियर में आकार ले रहे इस विशेष दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र को बेहद रणनीतिक तरीके से डिजाइन किया गया है। यह क्षेत्र केवल एक साधारण औद्योगिक इकाई नहीं होगा, बल्कि इसे एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के रूप में विकसित किया जा रहा है जहां अनुसंधान, विकास, डिजाइन और निर्माण एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। यहां मोबाइल उपकरणों से लेकर ऑप्टिकल फाइबर, अत्याधुनिक टेलीकॉम उपकरण और अगली पीढ़ी की 5G तथा 6G तकनीकों का उत्पादन किया जाएगा।
इस परियोजना की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्र सरकार इसके पहले चरण के लिए ₹493 करोड़ की सौ फीसदी वित्तीय सहायता दे रही है। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 170 एकड़ जमीन पूरी तरह मुफ्त में उपलब्ध कराई है। इसके अलावा निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रकार की सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था भी की गई है, जिससे कंपनियों को शुरुआती दौर में बड़ा आर्थिक संबल मिल सके।
केंद्र और राज्य के सहयोग से मजबूत हो रहा सहकारी संघवाद
इस पूरी परियोजना को धरातल पर उतारने में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिल रहा है। बेंगलुरु की बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त रूप से की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने इसे 'सहकारी संघवाद' का एक बेहतरीन और जीवंत उदाहरण बताया।
"दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र सहकारी संघवाद का एक मजबूत उदाहरण है। केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार मिलकर काम कर रही हैं। राज्य सरकार ने लगभग ₹8,000 करोड़ के प्रोत्साहन और सब्सिडी की व्यवस्था की है। इस तरह के सहयोग से निजी क्षेत्र को निवेश करने, नए प्रयोग करने और अपने कारोबार को बढ़ाने का भरोसा मिलता है।" — ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, केंद्रीय संचार मंत्री
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्रतिबद्धता केवल कागजी वादों तक सीमित नहीं है। निवेशकों की किसी भी समस्या या सवाल का समाधान महज 48 घंटे के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ग्वालियर सिर्फ एक मैन्युफैक्चरिंग हब न बने, बल्कि वहां उद्योग जगत को यह अटूट भरोसा हो कि सरकार उनका एक जिम्मेदार और मददगार भागीदार है।
निवेशकों का उमड़ा सैलाब: मिल रहे हैं बड़े निवेश प्रस्ताव
बेंगलुरु में आयोजित इस तीसरी निवेशक बैठक में निवेशकों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। इससे पहले दिल्ली और मुंबई में हुई बैठकों में उद्योग जगत ने करीब ₹5,500 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी, जिससे लगभग 18,000 नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। वहीं बेंगलुरु के रोडशो में निवेशकों ने और अधिक उत्साह दिखाया है।
कई बड़ी कंपनियों ने अपने उच्च प्रबंधन से मंजूरी मिलने के बाद व्यक्तिगत रूप से ₹700 करोड़ से ₹800 करोड़ तक के निवेश के प्रस्ताव दिए हैं। इसके अलावा कई अन्य तकनीकी कंपनियों ने भी सकारात्मक रुख दिखाते हुए जल्द ही उत्पादन स्थल का दौरा करने और विनिर्माण इकाइयों को स्थापित करने की इच्छा जताई है।
मध्य प्रदेश बन रहा देश का नया औद्योगिक और तकनीकी केंद्र
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर राज्य की औद्योगिक नीतियों और क्षमताओं का खुलकर बखान किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश अपनी शानदार रणनीतिक स्थिति, बेहतरीन कनेक्टिविटी और मजबूत बुनियादी ढांचे की वजह से देश का सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य बनता जा रहा है। राज्य सरकार उभरती हुई तकनीकों और दूरसंचार क्षेत्र के लिए पूरी तरह अनुकूल माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इस मेगा प्रोजेक्ट से न केवल राज्य में भारी मात्रा में नया निवेश आएगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर भी खुलेंगे। यह पहल भारत को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
क्वालकॉम के दौरे के साथ तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा
इस निवेशक बैठक से ठीक पहले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बेंगलुरु में दिग्गज टेक और टेलीकॉम कंपनी 'क्वालकॉम' के कार्यालय का दौरा भी किया था। इस दौरान उन्होंने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबी बैठक की। बैठक में देश में सेमीकंडक्टर क्षमता को बढ़ाने, नए उत्पादों के डिजाइन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा भविष्य की संचार तकनीकों में भारत की हिस्सेदारी को मजबूत करने पर विमर्श किया गया। सरकार चाहती है कि देश में केवल सामान असेंबल न हो, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक की 'बौद्धिक संपदा' (Intellectual Property) भी भारत में ही तैयार हो।
निष्कर्ष: 'मेक इन इंडिया' से 'मेक फॉर द वर्ल्ड' की ओर
ग्वालियर का यह दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' को जमीन पर उतारने का सबसे बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। भारत अब केवल वैश्विक उत्पादों का बाजार बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि वह दुनिया की जरूरत के हिसाब से तकनीक डिजाइन करने और उसका निर्यात करने की क्षमता विकसित कर रहा है। आने वाले दिनों में यह प्रोजेक्ट भारतीय अर्थव्यवस्था और तकनीकी आत्मनिर्भरता को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का काम करेगा।






