भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई बार ऐसी फिल्में आई हैं जिन्होंने बेहद कम बजट में बड़े पर्दे पर ऐसा इतिहास रचा है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। ऐसी ही एक असाधारण सफलता इन दिनों निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की डिवोशनल फिल्म 'हनुमान अंश' हासिल कर रही है। पिछले कुछ हफ्तों से बॉक्स ऑफिस पर सुस्त पड़ी फिल्मों के बीच इस मूवी ने अपनी बेमिसाल रफ्तार से ट्रेड एनालिस्ट्स को भी हैरान कर दिया है। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसने साबित कर दिया कि बेहतरीन कहानी और मजबूत वर्ड ऑफ माउथ के आगे बड़े बजट की चमक फीकी पड़ जाती है।
नीम करोली बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक दर्शन से प्रेरित इस फिल्म ने सिनेमाघरों में अपनी लंबी पारी खेलते हुए सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। शुरुआत में जब यह फिल्म 7 अगस्त को रिलीज हुई थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह छोटे पर्दे या सीमित स्क्रीन से निकलकर ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा देगी। शुरुआती दो हफ्तों तक फिल्म की रफ्तार बेहद धीमी रही और इसका इंडिया नेट कलेक्शन महज शुरुआती आंकड़ों तक ही सीमित था। लेकिन तीसरे हफ्ते से जो मैजिक शुरू हुआ, उसने हर किसी को चौंका दिया।
छोटे बजट की फिल्म का बड़ा धमाका और हैरान करने वाले आंकड़े
किसी भी फिल्म की सफलता का पैमाना उसका बजट और उससे मिलने वाला रिटर्न होता है। इस मामले में 'हनुमान अंश' ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और फिल्म मेकर्स के दावों के मुताबिक, इस पूरी फिल्म को बनाने में 2 करोड़ रुपये से भी कम की लागत आई थी। इतने कम संसाधनों और छोटे पैमाने पर बनी फिल्म का ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होना अपने आप में एक मिसाल है।
जाने-माने फिल्म समीक्षकों और ट्रेड जानकारों ने भी इस फिल्म के लगातार टिके रहने की सराहना की है। जहां एक ओर बड़ी और महंगी फिल्में रिलीज के चंद दिनों बाद ही सिनेमाघरों से गायब हो जाती हैं, वहीं यह डिवोशनल फिल्म आठवें हफ्ते में भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में कामयाब रही है। फिल्म के शोज और ऑक्यूपेंसी ने यह साबित कर दिया कि भारतीय दर्शक आज भी सार्थक, प्रेरणादायक और आध्यात्मिक रूप से जुड़े कंटेंट को देखना पसंद करते हैं।
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क्यों खास है 'हनुमान अंश' की यह लंबी और संघर्षपूर्ण बॉक्स ऑफिस यात्रा?
किसी भी फिल्म की सफलता के पीछे उसकी पटकथा और दर्शकों के साथ उसका भावनात्मक जुड़ाव सबसे बड़ा कारक होता है। 'हनुमान अंश' के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। शुरुआती दिनों में जब इस फिल्म को सिनेमाघरों में दर्शक नहीं मिल रहे थे, तब मेकर्स ने हिम्मत नहीं हारी। धीरे-धीरे सिनेमाघरों में बैठे दर्शकों ने जब इस मूवी की प्रशंसा करनी शुरू की, तो माउथ पब्लिसिटी ने अपना जादू दिखाना शुरू कर दिया।
फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की मेहनत और कलाकारों के सधे हुए अभिनय ने पर्दे पर एक ऐसा असर छोड़ा कि लोग इसे देखने के लिए बार-बार सिनेमाघरों का रुख करने लगे। चौथे, पांचवें और छठे हफ्ते में फिल्म ने जिस तरह की जबरदस्त छलांग लगाई, उसने बॉक्स ऑफिस के पुराने गणित को ही बदल कर रख दिया। वीकेंड के साथ-साथ वीकडेज पर भी इस फिल्म को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटना इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
"फिल्म 'हनुमान अंश' की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि आपकी कहानी में सच्चाई और गहराई है, तो दर्शक खुद-ब-खुद उसे फर्श से अर्श तक पहुंचा देते हैं। यह हमारी पूरी टीम की कड़ी मेहनत का नतीजा है।" — डॉ. विशाल चतुर्वेदी, निर्देशक
मिला पहला प्रतिष्ठित सम्मान और लखनऊ में मिला खास प्रोत्साहन
बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता के साथ-साथ इस फिल्म को अब कला और संस्कृति के स्तर पर भी सराहना मिलनी शुरू हो गई है। हाल ही में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में खुशी फाउंडेशन एवं दिशा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान 'हनुमान अंश' को प्रतिष्ठित 'सेवा शिखर सम्मान' से नवाजा गया। यह इस फिल्म को मिला पहला बड़ा अवार्ड है, जिसने पूरी टीम का उत्साह और अधिक बढ़ा दिया है।
निदेशक विशाल चतुर्वेदी ने इस सम्मान के मिलने पर अपना आभार जताते हुए कहा कि यह पुरस्कार केवल एक ट्रॉफी नहीं है, बल्कि उन तमाम लोगों के समर्पण का अभिनंदन है जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को अपना खून-पसीना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह सम्मान इस फिल्म के लिए एक नई शुरुआत है और आने वाले दिनों में यह देश के अन्य बड़े मंचों पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगी।
अन्य फिल्मों के मुकाबले कैसी रही 'हनुमान अंश' की स्थिति?
मौजूदा बॉक्स ऑफिस पर कई बड़ी और चर्चित फिल्में भी अपनी किस्मत आजमा रही हैं। नानी की फिल्म 'द पैराडाइज' जहां अपनी शुरुआती रिलीज के बाद तेजी से कमाई के नए रिकॉर्ड बना रही है, वहीं 'हनुमान अंश' का मुकाबला बिल्कुल अलग ट्रैक पर चल रहा है। 'द पैराडाइज' को जहां शुरुआती दिनों में भारी-भरकम शोज और ओपनिंग मोमेंटम का फायदा मिला, वहीं 'हनुमान अंश' ने अपने दम पर लंबी रेस का घोड़ा बनकर यह साबित किया कि निरंतरता सबसे बड़ी ताकत होती है।
भले ही हाल ही में फिल्म के मंडे कलेक्शन में मामूली गिरावट दर्ज की गई हो, लेकिन 50 से अधिक दिनों तक सिनेमाघरों में डटे रहना अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। ओवरसीज मार्केट से मिले शानदार रिस्पांस और भारत के विभिन्न राज्यों में मिल रहे पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ ने इस फिल्म को उस मुकाम पर ला खड़ा किया है जहां पहुंचना हर निर्माता का सपना होता है।
निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि 'हनुमान अंश' ने यह दिखा दिया है कि भारतीय सिनेमा में अच्छी कहानियों की कभी कमी नहीं रही है। कम बजट में बनी इस फिल्म ने जिस तरह से बॉक्स ऑफिस पर अपने झंडे गाड़े हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक सबक रहेगा कि बिना किसी बड़े स्टारकास्ट के भी केवल मजबूत कहानी के दम पर सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।










