सिनेमाघरों में छाई 'हनुमान अंश' की आंधी, दो महीने बाद भी बॉक्स ऑफिस पर बरकरार है फिल्म का जलवा
भारतीय सिनेमा जगत में इन दिनों एक ऐसी फिल्म की चर्चा चारों तरफ हो रही है, जिसने कम बजट में बड़ी फिल्मों को भी पछाड़कर रख दिया है। लेखक और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी डिवोशनल ड्रामा फिल्म 'हनुमान अंश' (Hanuman Ansh) ने सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। आध्यात्मिक संत नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी अद्भुत शिक्षाओं पर आधारित इस बायोपिक ने दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना ली है। फिल्म रिलीज के दो महीने यानी 60 दिन पूरे होने के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर लगातार डटी हुई है और इसकी कमाई का सिलसिला अभी थमा नहीं है।
महज दो करोड़ रुपये के मामूली बजट से बनाई गई इस फिल्म ने दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार कर लिया है। ट्रेड एनालिस्ट्स और फिल्म समीक्षक भी इस बात से हैरान हैं कि बिना किसी बड़े तामझाम और भारी-भरकम बजट के एक धार्मिक विषय पर बनी फिल्म ने ऐसा ऐतिहासिक जादुई प्रदर्शन कैसे कर दिखाया। सिनेमाघरों में अपने दो महीने पूरे करने के बाद भी मंडे टेस्ट में इस फिल्म ने लाखों रुपये का कलेक्शन कर यह साबित कर दिया है कि दर्शकों के बीच इसकी लोकप्रियता का स्तर कितना ऊंचा है।
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कैंची धाम में उमड़ी अप्रत्याशित भीड़, निर्देशक विशाल चतुर्वेदी को जारी करना पड़ा वीडियो संदेश
फिल्म 'हनुमान अंश' की रिलीज के बाद से ही उत्तराखंड के प्रसिद्ध आध्यात्मिक आश्रम और हनुमान मंदिर 'कैंची धाम' में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। गांधी जयंती के लंबे वीकेंड (2 से 4 अक्टूबर) के दौरान स्थिति यह हो गई कि वहां पर्यटकों और भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में मंदिर परिसर के बाहर लंबी कतारें साफ देखी जा सकती हैं।
इस अभूतपूर्व भीड़ और अव्यवस्था की आशंका को देखते हुए फिल्म के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने खुद आगे आकर मोर्चा संभाला है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो नोट शेयर करते हुए कैंची धाम जाने वाले तमाम श्रद्धालुओं से एक बहुत ही संयमित और व्यावहारिक अपील की है। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे लोगों से हालात का जायजा लेकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाने का आग्रह कर रहे हैं।
"नमस्कार जय सीताराम! मैं डॉक्टर विशाल चतुर्वेदी, 'हनुमान अंश' फिल्म का राइटर हूं। इस समय कैंची धाम में बहुत ज्यादा भीड़ हो रही है। बहुत सारे लोगों का यह कहना है कि फिल्म देखने के बाद वहां लोग पहुंच रहे हैं, जिसके चलते भारी भीड़ इकट्ठी हो गई है। अगर ऐसा है भी और अगर ऐसा नहीं भी है, तो भी जो लोग कैंची धाम पहुंच रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि वहां कब और कैसे जाना है। लोगों को वहां की मौजूदा परिस्थिति की पूरी जानकारी होनी चाहिए।"— डॉ. विशाल चतुर्वेदी, लेखक और निर्देशक
कैंची धाम के अलावा नीम करोली बाबा के अन्य पवित्र स्थलों के दर्शन की सलाह
अपनी वीडियो अपील में निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने केवल कैंची धाम तक ही सीमित रहने के बजाय नीम करोली बाबा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण और पवित्र स्थानों का भी रुख करने का सुझाव दिया है। उन्होंने भक्तों को याद दिलाया कि बाबा महाराज जी के आशीर्वाद और उनके चरण से जुड़े देश में कई अन्य दिव्य स्थान भी मौजूद हैं, जहां आसानी से दर्शन किए जा सकते हैं।
चतुर्वेदी ने उत्तर प्रदेश के अकबरपुर स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसे महाराज जी के जन्म से जुड़ा हुआ पावन स्थान माना जाता है। इसके अलावा उन्होंने वृंदावन का भी जिक्र किया, जहां नीम करोली बाबा ने अपनी समाधि ली थी, और साथ ही नीम करोली गांव की ऐतिहासिक महत्ता के बारे में भी बताया। उनका यह मानना है कि यदि भक्त इन अन्य स्थानों पर भी अपनी यात्रा की योजना बनाएंगे, तो इससे कैंची धाम पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
रिचा चड्ढा का बयान और भारतीय सिनेमा के बदलते ट्रेंड पर चर्चा
फिल्म की इस अपार सफलता के बीच बॉलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने भी हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शकों के बीच पौराणिक और धार्मिक विषयों पर आधारित फिल्में हमेशा से एक सुरक्षित विकल्प रही हैं, जिन्हें देखने के लिए परिवार के लोग बड़ी संख्या में सिनेमाघरों का रुख करते हैं। उनके अनुसार, हनुमान अंश की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही भावनाओं और आस्था से जुड़े मुद्दों को पर्दे पर उतारने से दर्शक सिनेमाहॉल तक जरूर खिंचे चले आते हैं।
हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल धार्मिक विषयों के भरोसे ही पूरी फिल्म इंडस्ट्री के अच्छे दिनों की गारंटी नहीं दी जा सकती। इंडस्ट्री को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने के लिए अच्छी कहानियों, मजबूत पटकथा और जमीन से जुड़े लेखकों को सही वित्तीय और रचनात्मक सम्मान मिलना बेहद जरूरी है। इसके बावजूद, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वर्तमान दौर में 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर जो मील का पत्थर स्थापित किया है, वह आने वाले समय के फिल्म निर्माताओं के लिए एक बड़ा उदाहरण बन चुका है।
निष्कर्ष और आगे का परिदृश्य
कुल मिलाकर, 'हनुमान अंश' फिल्म की सफलता और कैंची धाम में उमड़ रही भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय जनमानस में आध्यात्मिकता और लोक-संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं। जहां एक ओर फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़कर नया इतिहास रचा है, वहीं दूसरी ओर इसके निर्देशक द्वारा की गई अपील ने जिम्मेदारी भरी नागरिकता का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश किया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या साउथ की भाषाओं में रिलीज होने के बाद यह फिल्म कमाई के कौन से नए शिखर छूती है।






