मध्य पूर्व में गहराता संकट और ट्रंप का सख्त रुख
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर एक बार फिर तनाव के काले बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले आठ महीनों से जारी टकराव अब एक निर्णायक और खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान की ओर से आए सात दिनों के युद्धविराम के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में होने वाले आगामी मिड-टर्म चुनावों और राजनीतिक समीकरणों के चलते वॉशिंगटन इस वक्त किसी भी नरमी के मूड में नहीं है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस तरह के प्रस्ताव केवल रणनीतिक चालें हैं ताकि अमेरिकी प्रतिक्रिया को धीमा किया जा सके।
व्हाइट हाउस से जुड़े सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों और सैन्य सलाहकारों को स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि चुनाव प्रक्रिया के तुरंत बाद सैन्य कार्रवाई को और अधिक तीव्र किया जा सकता है। अमेरिकी पक्ष का यह भी आकलन है कि ईरानी नेतृत्व मौजूदा प्रशासन को राजनीतिक रूप से दबाव में लाने की जुगत में है। इस बीच, कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद होते नजर आ रहे हैं और दोनों देशों के बीच जुबानी जंग के साथ-साथ जमीनी स्तर पर जंग की तैयारियां तेज हो गई हैं।
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ईरान के करीब पहुंच रहे अमेरिकी जंगी बेड़े और विमान वाहक पोत
क्षेत्रीय प्रभुत्व और सामरिक बढ़त हासिल करने के लिए अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया है। पेंटागन के निर्देश पर तीसरा विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट' अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ उस क्षेत्र की ओर कूच कर चुका है। इसके साथ ही हजारों मरीन सैनिकों से लैस एम्फीबियस ग्रुप और लगभग नौ से दस हजार अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की जा रही है। फारस की खाड़ी और आसपास के जलीय क्षेत्रों में पहले से ही 'यूएसएस जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश' और 'यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन' जैसे ताकतवर युद्धपोत तैनात हैं।
सैन्य जानकारों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में एक साथ तीन बड़े एयरक्राफ्ट कैरियरों की यह मौजूदगी वर्ष 2003 के इराक युद्ध के बाद इस क्षेत्र में सबसे बड़ा नौसैनिक जमावड़ा साबित होगी। इसके अलावा, अत्याधुनिक एफ-35 फाइटर जेट्स और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को सऊदी अरब तथा कतर के सैन्य अड्डों पर तैनात कर दिया गया है। पेंटागन का तर्क है कि इस विशाल सैन्य शक्ति के जरिए राष्ट्रपति ट्रंप के पास हर परिस्थिति से निपटने के लिए कड़े और त्वरित विकल्प उपलब्ध रहेंगे।
इजरायल का कड़ा तेहरान कनेक्शन और मोसाद की जांच
इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजरायल की सक्रियता ने स्थिति को और अधिक विस्फोटक बना दिया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि सुरक्षा मामलों में किसी भी प्रकार की चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक संदिग्ध घटना में ओमान से जुड़े एक पायलट के मामले को लेकर इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद और अमेरिकी सीआईए संयुक्त रूप से जांच में जुटी हुई हैं। नेतन्याहू ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में तेहरान की संलिप्तता साबित होती है, तो इसके परिणाम बहुत भयानक होंगे और इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
मध्य पूर्व के रणनीतिक जलमार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' को लेकर भी विवाद गहराया हुआ है। यह रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, और इस पर नियंत्रण को लेकर ईरान तथा पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से रस्साकशी चल रही है। हाल ही में समुद्री सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस मार्ग पर जहाजों पर हमलों की पुष्टि किए जाने के बाद से तनाव अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है, जिससे किसी भी वक्त एक बड़े युद्ध की चिंगारी भड़क सकती है.
वतन की हिफाजत के लिए हथियारों का प्रशिक्षण लेती ईरानी महिलाएं
एक तरफ जहां अमेरिकी और इजरायली सेनाएं आक्रामक रुख अख्तियार किए हुए हैं, वहीं ईरान ने भी किसी भी जमीनी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है। तेहरान के इमाम हुसैन स्क्वायर और हफ़्त-ए-तीर स्क्वायर स्थित सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों पर हाल ही में अनोखा नजारा देखने को मिला। वहां बड़ी संख्या में ईरानी महिलाएं और आम नागरिक सैन्य हथियारों को चलाने का प्रशिक्षण लेने मैदान में उतरे। हाथों में चूड़ियों की जगह असॉल्ट राइफलें और हैंडगन थामे इन महिलाओं ने युद्धकौशल और सटीक निशानेबाजी के गुर सीखे हैं।
"अगर हमारे दुश्मन एक बार फिर सैन्य टकराव का रास्ता चुनते हैं, तो हमारा जवाब पहले से कहीं अधिक कड़ा होगा। इस विवाद का कोई भी सैन्य समाधान नहीं निकल सकता और न ही नए प्रतिबंधों से कोई हल निकलेगा। न्याय और निष्पक्षता पर आधारित बातचीत ही इस संघर्ष को रोक सकती है।" — अब्बास अराघची, ईरान के विदेश मंत्री
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि नए प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों से तेहरान की नीतियों में कोई बदलाव नहीं आने वाला है। ईरानी रक्षा तंत्र ने हाल ही में आधुनिक मिसाइलों का परीक्षण भी किया है, जो दुश्मन के लड़ाकू विमानों को आसमान में ही नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कूटनीति जल्द ही पटरी पर नहीं लौटी, तो मध्य पूर्व की धरती पर एक भयानक मानवीय और सैन्य त्रासदी देखने को मिल सकती है।







