कल्याणकारी योजनाओं के दायरे को पारदर्शी बनाने की कवायद
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में गरीबों और अति जरूरतमंद परिवारों को सरकारी मदद का पूरा हक दिलाने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजनाओं के नियमों में बड़े पैमाने पर बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। सरकार का मुख्य जोर यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता का लाभ केवल और केवल उन लोगों तक पहुंचे, जो वास्तविक रूप से इसके हकदार हैं। इस कड़ी में 'मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना' की निगरानी व्यवस्था को अपग्रेड करने की तैयारी चल रही है, ताकि किसी भी तरह की खामी या फर्जीवाड़े की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, इस योजना की शुरुआत मूल रूप से समाज के अत्यंत निर्धन तबके को संबल प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। इसके लिए विभिन्न चरणों में सर्वे करवाकर पात्र लाभार्थियों का चयन भी किया गया था। हालांकि, मैदानी स्तर पर यह बात लगातार सामने आ रही थी कि कई ऐसे परिवार भी इस सूची में जगह बनाने में कामयाब हो गए हैं जो या तो तय मानकों पर खरे नहीं उतरते थे या फिर सर्वे के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आ चुका है। ऐसे मामलों पर लगाम कसने के लिए अब सरकार एक फुल-प्रूफ मेकैनिज्म तैयार कर रही है।
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अपात्र परिवारों को बाहर करने का बनेगा स्पष्ट प्रावधान
मौजूदा व्यवस्था के तहत इस योजना में एक बार नाम जुड़ जाने के बाद यदि कोई परिवार भविष्य में अपात्र हो जाता है, तो उसे सूची से बाहर करने के लिए कोई स्पष्ट और पारदर्शी नियम निर्धारित नहीं थे। इसी कानूनी और प्रशासनिक कमी को दूर करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने काम करना शुरू कर दिया है। नए प्रावधानों के लागू होने के बाद योजना के मापदंडों का उल्लंघन करने वाले या गलत जानकारी के जरिए अनुचित लाभ लेने वाले चेहरों की पहचान करना और उन्हें सूची से हटाना बहुत आसान हो जाएगा।
प्रशासनिक हलकों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, नए नियमों के दायरे में केवल नए मामलों की जांच ही नहीं होगी, बल्कि पहले से लाभ ले रहे लोगों की भी समय-समय पर स्क्रूटनी की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति जांच के दौरान तय आय या अन्य शर्तों को पूरा नहीं करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उसे योजना के दायरे से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इस पूरी कवायद का मकसद सरकारी खजाने से मिलने वाली मदद का सही दिशा में सदुपयोग करना है।
"भविष्य में मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना में यदि कोई व्यक्ति अपात्र पाया जाता है, तो उसे योजना से हटाने के लिए सरकार नियम बनाने जा रही है। इसी तरह स्थानीय जनता भी उच्चाधिकारियों सहित अन्य माध्यमों से शिकायत कर सकेगी, इसके लिए भी नियमों में प्रावधान होगा। इन नियमों को जल्द तैयार कर अधिसूचित किया जाएगा।" — सी पाल रासू, सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज
आम नागरिक भी कर सकेंगे अपात्रों की लिखित शिकायत
योजना में भ्रष्टाचार और हेरफेर रोकने के लिए सरकार ने आम जनता को भी एक बड़ी ताकत देने का मन बनाया है। प्रस्तावित संशोधनों के मुताबिक अब कोई भी आम नागरिक यदि अपने आस-पास किसी ऐसे परिवार को देखता है जो गलत तथ्यों के आधार पर इस योजना का लाभ उठा रहा है, तो वह इसकी सीधी शिकायत संबंधित उच्चाधिकारियों से कर सकेगा। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन के लिए उस मामले की गहराई से जांच करवाना अनिवार्य होगा।
इस जन-शिकायत तंत्र के जुड़ जाने से जमीनी स्तर पर पारदर्शिता स्वतः मजबूत होगी। अक्सर यह देखा गया है कि स्थानीय लोग अपने क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से सबसे बेहतर वाकिफ होते हैं। ऐसे में जब जनता खुद निगरानीकत्ता की भूमिका निभाएगी, तो फर्जीवाड़े की गुंजाइश अपने आप नगण्य हो जाएगी। सरकार का यह कदम लोकतंत्र में जन-सहभागिता का एक बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है, जिससे पात्र और जरूरतमंद परिवारों का हक सुरक्षित रहेगा।
बीपीएल सूचियों की तرش पर कड़े किए जाएंगे प्रशासनिक मानदंड
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना में जोड़े जाने वाले नए नियम काफी हद तक ग्रामीण क्षेत्रों की बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) सूचियों के चयन और निष्कासन प्रक्रिया से मेल खाते होंगे। जिस प्रकार बीपीएल सूचियों में बदलाव या अपात्रों को हटाने के लिए ग्राम सभा और निर्धारित स्थानीय प्रक्रियाओं का सहारा लिया जाता है, ठीक उसी तर्ज पर इस योजना को भी कानूनी जामा पहनाने की तैयारी है। इससे प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगेगी और हर एक फैसले के पीछे ठोस दस्तावेज तथा सामाजिक सत्यापन मौजूद रहेगा।
सरकार की ओर से हाल ही में बीपीएल सूचियों को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें ग्राम सभा की भूमिका को सर्वोपरि रखा गया है। इन तमाम बदलावों का सामूहिक असर यह होगा कि हिमाचल प्रदेश में चलाई जा रही हर एक गरीब कल्याण योजना अधिक सटीक और प्रभावकारी बनेगी। आने वाले दिनों में जब इन नए नियमों का नोटिफिकेशन जारी होगा, तो योजना के क्रियान्वयन में एक नया और सख्त प्रशासनिक अनुशासन देखने को मिलेगा।







