पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून ने भारी तबाही मचाई है। लगातार बारिश, बादलों के फटने की घटनाओं, अचानक आई बाढ़ और भीषण भूस्खलन के कारण जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। प्राकृतिक आपदा के इस तांडव से राज्य के बुनियादी ढांचे को गहरा आघात पहुंचा है। अब जबकि मानसून की रफ्तार धीमी पड़ी है, तो नुकसान के वास्तविक आंकड़ों की तस्वीर साफ होने लगी है। इसी क्रम में केंद्र सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता हासिल करने की उम्मीदों को पंख लगे हैं, क्योंकि नुकसानी का विस्तृत ब्योरा तैयार कर लिया गया है।
केंद्रीय दल का चार दिवसीय दौरा और जमीनी हकीकत की परख
आपदा से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक विशेष अंतर-मंत्रालय दल को हिमाचल प्रदेश भेजा गया था। इस केंद्रीय दल ने राज्य के सभी बारह जिलों में पहुंचकर जमीनी हालातों का बारीकी से निरीक्षण किया। चार दिनों तक चले इस दौरे के दौरान टीम ने उन क्षेत्रों का विशेष रूप से दौरा किया जो आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। सड़कों का टूटना, पुलों का बह जाना और रिहायशी इलाकों में मलबा घुसने जैसी गंभीर समस्याओं का केंद्रीय अधिकारियों ने जायजा लिया।
दौरे के समापन चरण में राजधानी शिमला में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और आपदा प्रबंधन से जुड़े नुमाइंदे मौजूद रहे। केंद्रीय दल के सदस्यों के साथ हुई इस चर्चा में प्रत्येक जिले में हुई क्षति के आंकड़ों को सिलसिलेवार तरीके से रखा गया। अधिकारियों ने बताया कि कैसे इस आपदा ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था और विकास कार्यों को पीछे धकेल दिया है।
संबंधित खबरें
विभिन्न विभागों को हुआ 3412.80 करोड़ रुपये का भारी नुकसान
समीक्षा बैठक के दौरान राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव सह निदेशक पुष्पेंद्र राणा ने नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा प्रस्तुत किया। प्रस्तुत किए गए विवरण के अनुसार, मानसून के दौरान राज्य को कुल 3,412.80 करोड़ रुपये की चपत लगी है। इस भारी-भरकम आंकड़े में कई अहम विभाग शामिल हैं, जिनके बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है।
सबसे अधिक नुकसान लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सड़कों और पुलों को हुआ है, जिससे कई इलाकों का संपर्क कट गया था। इसके अलावा जल शक्ति विभाग की पेयजल योजनाएं तहस-नहस हो गई हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई। विद्युत बोर्ड को बिजली के खंभों और ट्रांसफॉर्मर के बहने से बड़ा घाटा उठाना पड़ा है। साथ ही, किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि भी बह जाने या मलबे से पट जाने के कारण बर्बाद हो गई है।
एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के मानकों के तहत तैयार होगा ज्ञापन
बैठक के दौरान केंद्रीय दल ने राज्य सरकार के नुमाइंदों को निर्देश दिए कि राहत राशि के आवंटन के लिए नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। दल ने स्पष्ट किया कि नुकसान का अंतिम ज्ञापन राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के निर्धारित मानदंडों के अनुरूप ही तैयार किया जाना चाहिए। सभी दावों के समर्थन में पुख्ता दस्तावेज, तस्वीरें और तकनीकी रिपोर्ट संलग्न होना अनिवार्य है।
मुख्य सचिव केके पंत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि सभी औपचारिकताएं तय समयसीमा के भीतर पूरी कर ली जाएंगी। सरकार का प्रयास है कि त्रुटिहीन और पारदर्शी दस्तावेज केंद्र को सौंपे जाएं ताकि आर्थिक सहायता जारी होने में किसी प्रकार की प्रशासनिक अड़चन न आए।
"प्राकृतिक आपदा के इस दौर में हिमाचल प्रदेश को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे केंद्रीय मानकों के अनुरूप अपने नुकसान के दस्तावेजीकरण को जल्द से जल्द अंतिम रूप दें, ताकि केंद्र सरकार को समय पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा जा सके।" — प्रशासनिक सूत्र, हिमाचल प्रदेश सरकार
शीघ्र वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद और आगे की राह
हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी मुख्य रूप से बागवानी, कृषि और पर्यटन पर निर्भर है, और मानसून की इस आपदा ने इन तीनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाई है। सड़कों के बार-बार अवरुद्ध होने से सेब और अन्य फसलों की ढुलाई पर असर पड़ा, जिससे स्थानीय किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। अब जब केंद्रीय दल ने खुद मैदानी स्तर पर नुकसान का जायजा ले लिया है और राज्य सरकार ने भी विस्तृत आंकड़े सामने रख दिए हैं, तो प्रदेशवासियों को केंद्र से एक बड़े राहत पैकेज की उम्मीद बंध गई है।
आगामी दिनों में राज्य सरकार द्वारा अंतिम ज्ञापन औपचारिक रूप से केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद केंद्र स्तर पर अंतर-मंत्रालय समूह की बैठक में इस पैकेज को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हिमाचल की जनता और प्रशासन दोनों की निगाहें अब दिल्ली पर टिकी हैं ताकि इस आपदा की मार से उबरने के लिए पर्याप्त धनराशि जल्द से जल्द मिल सके।



