हिमाचल प्रदेश की आबोहवा में इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक सरगर्मी काफी तेज है। राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की फेहरिस्त के बीच शिक्षा और स्वास्थ्य के मोर्चे पर बड़ा बयान दिया है। शिमला जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र के नोगली में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान सीएम सुक्खू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश सरकार आम आदमी के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है और आने वाले दिनों में रोजगार के मोर्चे पर युवाओं को राहत मिलने जा रही है।
शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव: 10 हजार नौकरियां और आगे का रोडमैप
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि प्रदेश की शिक्षण व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने युद्धस्तर पर काम किया है। वर्तमान सरकार के गठन के बाद से अब तक विभिन्न श्रेणियों के 10 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती की जा चुकी है। ग्रामीण इलाकों के बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्यभर में 150 से अधिक सीबीएसई स्कूल खोले गए हैं, जिनमें लगभग दो हजार शिक्षकों को तैनात किया गया है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से जुड़े 300 स्कूलों को 'स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जा रहा है।
सीएम सुक्खू ने पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए आंकड़े सामने रखे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में गुणात्मक शिक्षा के मामले में हिमाचल प्रदेश देश भर में 21वें स्थान पर खड़ा था। लेकिन वर्तमान सरकार के सुनियोजित प्रयासों और ढांचागत सुधारों के कारण आज यह रैंकिंग सुधरकर सीधे पांचवें स्थान पर पहुंच गई है। सरकार का दावा है कि आने वाले छह महीनों के भीतर चार हजार और नए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरी तरह दूर हो जाएगी।
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स्वास्थ्य सेवाओं का आधुनिकीकरण और एम्स की तर्ज पर सुविधाएं
शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और चमियाना स्थित अटल मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी संस्थान को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस किया जा रहा है। स्वास्थ्य संस्थानों में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की तर्ज पर उच्च स्तरीय मशीनें स्थापित की जा रही हैं। पिछले लगभग दो दशकों से पुरानी हो चुकी स्वास्थ्य मशीनों को चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है, ताकि मरीजों को बेहतर इलाज के लिए राज्य से बाहर न भटकना पड़े।
चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रहे अस्पतालों को राहत देते हुए सरकार ने हाल ही में 500 नए डॉक्टरों की नियुक्ति की है। मुख्यमंत्री ने दृढ़ता से कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वित्तीय संसाधनों की कमी को कभी भी आड़े नहीं आने दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हर नागरिक तक बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो सकें।
कर्मचारियों के हित में बड़े फैसले: पुरानी पेंशन और आउटसोर्स नीति
सरकारी कर्मचारियों और विभिन्न श्रेणियों के कामगारों के लिए मुख्यमंत्री ने कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने दोहराया कि राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिया जा रहा है और जब तक कांग्रेस पार्टी सत्ता में है, इसे किसी भी कीमत पर बंद नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, अनुबंध और आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक व्यापक नीति तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही धरातल पर उतारा जाएगा।
करुणामूलक आधार पर नौकरी पाने के पात्र मामलों को लेकर भी सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, ऐसे लगभग 70 प्रतिशत मामलों का सफल समाधान करते हुए पात्र युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। सरकार का मानना है कि कर्मचारियों और श्रमिकों का कल्याण ही राज्य के वास्तविक विकास की धुरी है।
पूर्व सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का गंभीर आरोप
अपनी सरकार की उपलब्धियों गिनाने के साथ-साथ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पिछली बीजेपी सरकार पर जमकर सियासी हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार को विरासत में लगभग 76 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज और कर्मचारियों से जुड़ी करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां मिली हैं।
"प्रदेश का धन केवल और केवल जनता की अमानत है। हमारी सरकार का एकमात्र उद्देश्य इस धन का उपयोग आम आदमी के कल्याण और राज्य के संतुलित विकास के लिए करना है। व्यवस्था परिवर्तन का असली मतलब गरीब की आवाज सुनना और उसके दर्द को समझना है।" — सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश
सीएम ने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम छह महीनों के दौरान राजनीतिक लाभ के लिए पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक की घोषणाएं कर डालीं, लेकिन उनके लिए न तो जरूरी स्टाफ की व्यवस्था की और न ही कोई बुनियादी ढांचा तैयार किया। इसके बावजूद, मौजूदा सरकार वित्तीय चुनौतियों का डटकर सामना करते हुए प्रदेश को प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ा रही है।







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