मध्य पूर्व के तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी राहत
दुनियाभर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल और मध्य पूर्व के सुलगते हालात के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर लगातार चिंताएं बनी हुई हैं। हालांकि, इन सबके बीच ऊर्जा बाजारों से एक सकारात्मक और राहत भरी खबर सामने आई है। दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से लिक्विड नेचुरल गैस यानी एलएनजी की आवाजाही ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सुरक्षा के तमाम खतरों और कड़े प्रतिबंधों की आशंकाओं को दरकिनार करते हुए सितंबर के महीने में इस रूट से भारी संख्या में गैस टैंकर सुरक्षित बाहर निकले हैं।
इस ताजा घटनाक्रम से भारत जैसे विकासशील देशों को सबसे बड़ी राहत मिली है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। जानकारों का मानना है कि यदि अक्टूबर के महीने में भी शिपिंग की यह रफ्तार इसी तरह बरकरार रहती है, तो देश के भीतर त्योहारी सीजन के दौरान किसी भी तरह के ऊर्जा संकट या गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख निर्यातक देशों से लगातार आ रहे जहाजों ने भारतीय बाजारों में राहत की सांस ली है।
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सितंबर में रिकॉर्ड जहाजों की आवाजाही और S&P ग्लोबल के आंकड़े
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली प्रतिष्ठित एजेंसी S&P ग्लोबल एनर्जी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के महीने में कुल 19 एलएनजी कार्गो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करने में सफल रहे। इनमें से 13 जहाज अकेले कतर से रवाना हुए थे, जबकि 6 जहाज संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के एनर्जी टर्मिनलों से जुड़े हुए थे। एजेंसी के वरिष्ठ विश्लेषकों का कहना है कि महीने के आखिरी पखवाड़े यानी अंतिम 15 दिनों में जहाजों की आवाजाही में अचानक और तेज उछाल देखने को मिला है।
जून के महीने में इसी रास्ते से महज 15 एलएनजी कार्गो ही गुजर पाए थे, जिसके मुकाबले सितंबर का यह आंकड़ा काफी बड़ा माना जा रहा है। शिपिंग डेटा उपलब्ध कराने वाली दूसरी प्रमुख कंपनी 'केप्लर' (Kpler) के रिकॉर्ड भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि सितंबर में इस मार्ग से गुजरने वाले कुल जहाजों की संख्या बढ़कर 21 तक पहुंच गई थी। इनमें भरे हुए जहाजों के साथ-साथ कुछ खाली कार्गो भी शामिल थे, जो वापसी की यात्रा पर थे।
कतर के एनर्जी टर्मिनलों से भारत की ओर बढ़े जहाज
शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों से यह साफ पता चलता है कि कतर के प्रमुख रास लाफान निर्यात टर्मिनल से जुड़े कई बड़े एलएनजी कैरियर इस संकटपूर्ण दौर में भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें 'अल खरायतियत', 'अल घाराफा' और 'मिलाहा कतर' जैसे नामचीन जहाज शामिल हैं। कतर-एनर्जी से जुड़े इन जहाजों की गतिविधियों पर वैश्विक एजेंसियों की पैनी नजर बनी हुई थी, क्योंकि ये सीधे तौर पर एशियाई बाजारों को ईंधन सप्लाई करते हैं।
ट्रैकिंग रिपोर्ट बताती है कि 'अल खरायतियत' और 'अल घाराफा' जैसे विशालकाय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने के बाद सीधे भारत के पश्चिमी तट के करीब ट्रैक किए गए। इनमें से एक जहाज ने तो गुजरात के हजीरा बंदरगाह पर सफलतापूर्वक अपना एलएनजी कार्गो खाली करना भी शुरू कर दिया है। समुद्री रास्तों में संभावित खतरों के बावजूद इन जहाजों का सुरक्षित पहुंचना भारतीय ऊर्जा कंपनियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं है।
"सितंबर के आखिरी पखवाड़े में एलएनजी जहाजों के आवागमन में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है। यदि आने वाले हफ्तों में भी यही ट्रेंड जारी रहता है, तो युद्ध से पहले के सामान्य स्तर की तुलना में सप्लाई करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो एशियाई बाजारों के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।" — एरिक येप, प्रिंसिपल एनालिस्ट, S&P ग्लोबल एनर्जी
भारतीय अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं के लिए इसके मायने
भारत अपनी प्राकृतिक गैस और एलएनजी की कुल आवश्यकता का एक बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों से आयात करता है। ऐसे में यदि होर्मुज मार्ग पर किसी भी प्रकार की बाधा आती है, तो देश के भीतर सीएनजी, पीएनजी और औद्योगिक गैस की कीमतें आसमान छू सकती हैं। लेकिन मौजूदा आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि तमाम सैन्य तनावों के बावजूद सप्लाई चेन सुचारू रूप से काम कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अक्टूबर के महीने में यदि क्षेत्रीय हालात नियंत्रण में रहते हैं और भू-राजनीतिक मोर्चे पर स्थिति नहीं बिगड़ती है, तो भारत में घरेलू गैस आपूर्ति पर कोई आंच नहीं आएगी। त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े देश के लिए यह स्थिरता आर्थिक मोर्चे पर बहुत बड़ी राहत लेकर आई है, जिससे महंगाई और ईंधन के मोर्चे पर आम जनता को अतिरिक्त बोझ से बचाया जा सकेगा।








