होम/देश/भारत को हर साल चाहिए 36 से 40 फाइटर जेट, वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने चीन और पाकिस्तान को लेकर दी बड़ी चेतावनी
देशपढ़ने में समय: 6 मिनट

भारत को हर साल चाहिए 36 से 40 फाइटर जेट, वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने चीन और पाकिस्तान को लेकर दी बड़ी चेतावनी

भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि देश की वायु शक्ति को मजबूत बनाए रखने के लिए हर साल 36 से 40 लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है। उन्होंने चीन और पाकिस्तान के बीच पांचवीं पीढ़ी के विमानों की सांठगांठ को चिंता का विषय बताया है।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•3 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•26
🌐Read in English →
शेयर करें:
भारत को हर साल चाहिए 36 से 40 फाइटर जेट, वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने चीन और पाकिस्तान को लेकर दी बड़ी चेतावनी
📷 भारत को हर साल चाहिए 36 से 40 फाइटर जेट, वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने चीन और पाकिस्तान को लेकर दी बड़ी चेतावनी — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • भारतीय वायु सेना के पास मौजूदा समय में लड़ाकू स्क्वॉड्रन की संख्या घटकर 29 रह गई है, जबकि आधिकारिक मंजूर संख्या 42 है।
  • वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने स्पष्ट किया है कि तकनीक के विकास और उत्पादन में देरी का मतलब सीधे तौर पर उस तकनीक से वंचित होना है।
  • पाकिस्तान और चीन के बीच पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को लेकर चल रहा सहयोग एक बड़ी रणनीतिक चुनौती है।

वायु सेना प्रमुख की दो टूक: हर साल शामिल करने होंगे 36 से 40 नए फाइटर जेट

भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने देश की रक्षा तैयारियों और रणनीतिक चुनौतियों को लेकर एक बेहद अहम बयान दिया है। अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने लड़ाकू विमानों के बेड़े की घटती संख्या पर खुलकर बात की और साफ किया कि यदि समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो देश की ऑपरेशनल क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। वायु सेना प्रमुख के मुताबिक, भारतीय वायु सेना को अपनी हवाई ताकत को बरकरार रखने और दुश्मन देशों की चाल का मुकाबला करने के लिए हर साल कम से कम 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत है। यह संख्या करीब दो स्क्वॉड्रन के बराबर बैठती है।

वर्तमान समय में भारतीय वायु सेना के पास फाइटर स्क्वॉड्रनों की संख्या घटकर मात्र 29 रह गई है, जबकि आधिकारिक तौर पर मंजूर संख्या 42 है। इस भारी अंतर को पाटने के लिए देश के भीतर स्वदेशी निर्माण की रफ्तार को कई गुना तेज करने की आवश्यकता है। रक्षा कार्यक्रमों में बार-बार होने वाली देरी पर चिंता जताते हुए एयर चीफ ने कहा कि यदि समय पर संसाधन नहीं मिले, तो दुश्मन देश तकनीकी रूप से काफी आगे निकल जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि रक्षा क्षेत्र में देरी का मतलब सीधे तौर पर सुरक्षा से समझौता करना है।

संबंधित खबरें

बाली में बड़ा हादसा: रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद एयर एंबुलेंस से मुंबई लाई गईं नुसरत भरूचा

बाली में बड़ा हादसा: रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद एयर एंबुलेंस से मुंबई लाई गईं नुसरत भरूचा

IND vs WI: रनों की आंधी और ऐतिहासिक रनचेज, क्रिकेट के मैदान पर भारत-वेस्टइंडीज श्रृंखला ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

IND vs WI: रनों की आंधी और ऐतिहासिक रनचेज, क्रिकेट के मैदान पर भारत-वेस्टइंडीज श्रृंखला ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

सैकड़ों मील दूर खेल के मैदान से लेकर कैंसर की जंग तक: क्या है एल्गोरिदम और हकीकत का यह अजीब मेल?

सैकड़ों मील दूर खेल के मैदान से लेकर कैंसर की जंग तक: क्या है एल्गोरिदम और हकीकत का यह अजीब मेल?

स्पेनिश फुटबॉल का स्वर्णिम दौर: बेल्जियम को पछाड़कर सेमीफाइनल में मारी धांसू एंट्री, क्या टूटेगा 16 साल का सूखा?

स्पेनिश फुटबॉल का स्वर्णिम दौर: बेल्जियम को पछाड़कर सेमीफाइनल में मारी धांसू एंट्री, क्या टूटेगा 16 साल का सूखा?

दुर्गापूजा से पहले पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा तोहफा, दो करोड़ परिवारों को आधी कीमत पर मिलेगा राशन

दुर्गापूजा से पहले पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा तोहफा, दो करोड़ परिवारों को आधी कीमत पर मिलेगा राशन

उत्तराखंड में एसआईआर अभियान का बड़ा असर: देहरादून में घटे करीब 3 लाख मतदाता, राजनीतिक दलों के समीकरण बदले

उत्तराखंड में एसआईआर अभियान का बड़ा असर: देहरादून में घटे करीब 3 लाख मतदाता, राजनीतिक दलों के समीकरण बदले

देशभर में तेजी से बढ़ रहा कैंसर का खतरा: मुंह के कैंसर के मामलों ने बढ़ाई डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता

देशभर में तेजी से बढ़ रहा कैंसर का खतरा: मुंह के कैंसर के मामलों ने बढ़ाई डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता

पृथ्वी और मंगल का अलग है इतिहास: एक ही धूल के बादल से बने दोनों ग्रह, फिर भी क्यों हुआ ऐसा?

पृथ्वी और मंगल का अलग है इतिहास: एक ही धूल के बादल से बने दोनों ग्रह, फिर भी क्यों हुआ ऐसा?

चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियां और पांचवीं पीढ़ी के जेट्स की चुनौती

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने पाकिस्तान और चीन के बीच पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को लेकर चल रहे रक्षा सहयोग पर सवाल पूछा, तो वायु सेना प्रमुख ने इसे एक गंभीर चिंता का विषय बताया। ऐसी रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं कि पाकिस्तान अपने बेड़े को मजबूत करने के लिए चीन से आधुनिक विमान हासिल कर सकता है और उसके पायलट चीनी वायु सेना के कैंपों में ट्रेनिंग ले रहे हैं। इस रणनीतिक स्थिति पर बोलते हुए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि हालांकि यह चिंताजनक है, लेकिन भारतीय वायु सेना हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है और उसके पास जरूरी जवाबी क्षमताएं मौजूद हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आधुनिक हथियारों या विमानों को खरीद लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि उन्हें देश की पूरी सैन्य प्रणाली और युद्ध कौशल के साथ बेहतर ढंग से जोड़ना बेहद जरूरी होता है। पाकिस्तान के पास पहले भी सैन्य ताकत रही है, लेकिन हालिया अभियानों में उनकी युद्ध प्रणालियों की कमजोरियां साफ उजागर हो चुकी हैं। इसके बावजूद, भारत को अपनी रक्षा तैयारियों में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरतनी चाहिए और समय से पहले अपनी क्षमताओं को अपग्रेड करना होगा।

तेजस और एएमसीए प्रोजेक्ट्स की रफ्तार और घरेलू उत्पादन पर जोर

घरेलू रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल (HAL) की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वायु सेना प्रमुख ने बताया कि एचएएल को अपनी उत्पादन क्षमता को और बढ़ाते हुए हर साल कम से कम 24 या उससे अधिक विमान तैयार करने की दिशा में तेजी से काम करना होगा। वायु सेना की स्क्वॉड्रन की कमी को दूर करने के लिए तेजस मार्क-1ए, तेजस मार्क-2, और भारत के महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इसके अलावा, 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम को लेकर भी प्रक्रिया जारी है। यदि ये सभी रक्षा परियोजनाएं तय समयसीमा के भीतर पूरी हो जाती हैं, तो वायु सेना को वह जरूरी इंडक्शन रेट हासिल हो जाएगा जिसकी आज सबसे ज्यादा आवश्यकता है। एयर चीफ ने यह भी चेताया कि अगर एएमसीए प्रोजेक्ट या अन्य स्वदेशी कार्यक्रमों में किसी भी तरह की रुकावट आती है, तो देश को अंतरिम विकल्प के रूप में दूसरे लड़ाकू विमानों के विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है।

ड्रॉप फोर्स और आधुनिक हथियारों के एकीकरण पर वायु सेना का दृष्टिकोण

हाल के दिनों में युद्ध के तरीकों में आए बड़े बदलावों को देखते हुए ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन की भूमिका पर भी बात की गई। वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने एक अलग से स्वतंत्र 'ड्रोन फोर्स' बनाए जाने की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि मानव रहित प्रणालियों को अलग-थलग रखने के बजाय उन्हें मौजूदा युद्ध संरचना और हथियारों के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना ज्यादा असरदार होता है। उन्होंने बताया कि भारतीय वायु सेना के पास पहले से ही ड्रोन से जुड़ी उन्नत क्षमताएं मौजूद हैं और जरूरत के मुताबिक उनकी संख्या और प्रकारों में लगातार विस्तार किया जा रहा है।

युद्ध के मैदान में किसी भी तरह की सफलता के लिए विभिन्न प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल का होना अनिवार्य है। वायु सेना का मानना है कि कोई भी हथियार अकेले दम पर जंग नहीं जीत सकता, इसलिए समन्वित अभियानों की नीति पर जोर दिया जा रहा है।

"रक्षा कार्यक्रमों में देरी सीधे तौर पर हमारी ऑपरेशनल क्षमता को नुकसान पहुंचाती है। तकनीक के विकास में यदि अत्यधिक देरी हो जाए, तो वह तकनीक अपना महत्व और प्रासंगिकता खो देती है। हमें हर साल कम से कम 36 से 40 नए विमानों को अपने बेड़े में शामिल करना ही होगा।" — एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, वायु सेना प्रमुख

निष्कर्ष और आगे की रक्षा रणनीति

भारतीय वायु सेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं और सीमाओं पर चौकसी बनाए रखना देश की प्राथमिकता है। पड़ोसी देशों की हरकतों पर पैनी नजर रखते हुए भारत सरकार और सैन्य नेतृत्व स्वदेशी रक्षा उत्पादन को गति देने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहा है। आने वाले समय में रक्षा सौदों की रफ्तार और घरेलू विमान निर्माण की सफलता ही यह तय करेगी कि भारतीय वायु सेना आकाश में अपनी रणनीतिक बढ़त को किस प्रकार सुरक्षित रखती है।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।

संबंधित खबरें (Related Articles)

बाली में बड़ा हादसा: रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद एयर एंबुलेंस से मुंबई लाई गईं नुसरत भरूचाNATIONAL

बाली में बड़ा हादसा: रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद एयर एंबुलेंस से मुंबई लाई गईं नुसरत भरूचा

4 अक्टू॰41
IND vs WI: रनों की आंधी और ऐतिहासिक रनचेज, क्रिकेट के मैदान पर भारत-वेस्टइंडीज श्रृंखला ने तोड़े सारे रिकॉर्डNATIONAL

IND vs WI: रनों की आंधी और ऐतिहासिक रनचेज, क्रिकेट के मैदान पर भारत-वेस्टइंडीज श्रृंखला ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

4 अक्टू॰31
सैकड़ों मील दूर खेल के मैदान से लेकर कैंसर की जंग तक: क्या है एल्गोरिदम और हकीकत का यह अजीब मेल?NATIONAL

सैकड़ों मील दूर खेल के मैदान से लेकर कैंसर की जंग तक: क्या है एल्गोरिदम और हकीकत का यह अजीब मेल?

4 अक्टू॰39
स्पेनिश फुटबॉल का स्वर्णिम दौर: बेल्जियम को पछाड़कर सेमीफाइनल में मारी धांसू एंट्री, क्या टूटेगा 16 साल का सूखा?NATIONAL

स्पेनिश फुटबॉल का स्वर्णिम दौर: बेल्जियम को पछाड़कर सेमीफाइनल में मारी धांसू एंट्री, क्या टूटेगा 16 साल का सूखा?

4 अक्टू॰26
दुर्गापूजा से पहले पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा तोहफा, दो करोड़ परिवारों को आधी कीमत पर मिलेगा राशनNATIONAL

दुर्गापूजा से पहले पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा तोहफा, दो करोड़ परिवारों को आधी कीमत पर मिलेगा राशन

4 अक्टू॰27
उत्तराखंड में एसआईआर अभियान का बड़ा असर: देहरादून में घटे करीब 3 लाख मतदाता, राजनीतिक दलों के समीकरण बदलेNATIONAL

उत्तराखंड में एसआईआर अभियान का बड़ा असर: देहरादून में घटे करीब 3 लाख मतदाता, राजनीतिक दलों के समीकरण बदले

4 अक्टू॰48
देशभर में तेजी से बढ़ रहा कैंसर का खतरा: मुंह के कैंसर के मामलों ने बढ़ाई डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंताNATIONAL

देशभर में तेजी से बढ़ रहा कैंसर का खतरा: मुंह के कैंसर के मामलों ने बढ़ाई डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता

4 अक्टू॰51
पृथ्वी और मंगल का अलग है इतिहास: एक ही धूल के बादल से बने दोनों ग्रह, फिर भी क्यों हुआ ऐसा?NATIONAL

पृथ्वी और मंगल का अलग है इतिहास: एक ही धूल के बादल से बने दोनों ग्रह, फिर भी क्यों हुआ ऐसा?

4 अक्टू॰28