नई दिल्ली से 'द फ्रीलान्स' की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट। भारतीय वायुसेना (IAF) के शीर्ष नेतृत्व द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों ने देश की सामरिक हलकों में खलबली मचा दी है। वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि पाकिस्तान के बेड़े में शामिल होने जा रहा अत्याधुनिक J-35 फाइटरजेट भारत के लिए एक गंभीर रणनीतिक चिंता का विषय है। इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच, देश की आंतरिक सुरक्षा और रक्षा तंत्र से जुड़े कई अन्य घटनाक्रम भी समानांतर रूप से सामने आ रहे हैं, जो समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे की एक जटिल तस्वीर पेश करते हैं।
पाकिस्तान का J-35 और वायुसेना की बढ़ती मांग
वायुसेना मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, पड़ोसी देश की वायु शक्ति में हो रहे आधुनिकीकरण को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इस चुनौती से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना ने अपनी युद्धक क्षमता को त्वरित गति से बढ़ाने की वकालत की है। रिपोर्ट के मुताबिक, वायुसेना प्रमुख ने बल देकर कहा है कि भारत को अपनी स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ बनाए रखने और किसी भी दो-मोर्चे की जंग (Two-Front War) से निपटने के लिए हर साल कम से कम 36 से 40 नए फाइटर जेट्स की सख्त जरूरत है। मौजूदा आपूर्ति और उत्पादन की गति इस आवश्यकता से काफी पीछे है, जो नीति निर्माताओं के लिए चिंता का बड़ा कारण है।
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रक्षा उत्पादन और स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ का संकट
स्वदेशीकरण के तमाम दावों के बावजूद, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और अन्य रक्षा उत्पादन इकाइयों के सामने समय पर विमानों की डिलीवरी देना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। तेजस एमके-1ए और भविष्य के एमके-2 प्रोजेक्ट्स में हो रही देरी ने वायुसेना की चिंता को और बढ़ा दिया है। मिग-21 जैसे पुराने विमानों के चरणबद्ध तरीके से बाहर होने के कारण फाइटर स्क्वाड्रन्स की संख्या स्वीकृत 42 से घटकर काफी कम हो चुकी है। ऐसे में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए प्रोक्योरमेंट प्रोसेस में तेजी लाना अनिवार्य हो गया है।
आंतरिक सुरक्षा और सीमा पार आतंकी नेटवर्क
एक तरफ जहां वायुसेना आसमान की सुरक्षा को लेकर चिंतित है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर देश की आंतरिक सुरक्षा एजेंसियां भी एक बड़े खतरे से जूझ रही हैं। हाल ही में कर्नाटक से एक युवक की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि किस तरह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करके सीमा पार से आतंकी नेटवर्क और हथियार तस्करी के जाल फैलाए जा रहे हैं। दक्षिण भारत में इस तरह के स्लीपर सेल या स्थानीय संपर्कों का सक्रिय होना यह दर्शाता है कि खतरा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के भीतर भी डीप स्टेट के मोहरे सक्रिय हैं।
कानून और व्यवस्था: सुरक्षा बलों की जवाबदेही पर सवाल
इन तमाम बाहरी और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के बीच, राजधानी दिल्ली से सामने आई एक घटना ने कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी पर एक महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी और शारीरिक उत्पीड़न (सीने पर हाथ मारने का गंभीर आरोप) करने का मामला सामने आया है। इस घटना के विरोध में पत्रकारों और नागरिक समाज ने कड़ा रुख अपनाते हुए घंटों प्रदर्शन किया और आरोपी अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। सुरक्षा देने वाली खाकी जब खुद ऐसे मामलों में घिरती है, तो न्याय व्यवस्था पर से आम जनता का भरोसा डगमगाता है।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
'द फ्रीलान्स' की इस पड़ताल से यह स्पष्ट होता है कि भारत इस वक्त एक दोहरी जंग लड़ रहा है—एक तरफ जहां उसे चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य ताकत (जैसे J-35) का मुकाबला करने के लिए अपनी वायु शक्ति को तुरंत अपग्रेड करना है, वहीं दूसरी तरफ साइबर आतंकवाद, हथियार तस्करी और आंतरिक प्रशासनिक सुधारों जैसे मोर्चों पर भी उतनी ही मुस्तैदी से काम करना होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के भीतर की प्रणालीगत मजबूती पर भी उतनी ही निर्भर करती है।








