अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी ने खेल के नियमों में व्यापक फेरबदल किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत क्रिकेट के मैदान पर सुस्ती दिखाने वाले खिलाड़ियों और रणनीतिकारों पर अब कड़ी नजर रखी जाएगी। खेल की गति तेज करने और रोमांच बनाए रखने के उद्देश्य से ये नए प्रावधान तैयार किए गए हैं। इन बदलावों के लागू होने से खेल का पूरा मिजाज बदलता नजर आ रहा है, जिसका सीधा असर टीमों की रणनीति पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक क्रिकेट में ओवर-रेट और समय की बर्बादी हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए गवर्निंग बॉडी ने सख्त रुख अपनाया है। दुनिया भर की टीमों और खिलाड़ियों को इन नए मानकों के हिसाब से खुद को ढालना होगा, अन्यथा उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
समय बर्बाद करने वाले बल्लेबाजों पर गिरेगी गाज, लगेगा जुर्माना
नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई बल्लेबाज क्रीज पर आने के बाद या दो गेंदों के बीच जरूरत से ज्यादा समय गंवाता है, तो उसे सख्त चेतावनी दी जाएगी। अंपायर की पहली और दूसरी चेतावनी को नजरअंदाज करने पर बल्लेबाज और उसकी टीम को भारी कीमत चुकानी होगी। यदि कोई खिलाड़ी तीसरी बार ऐसी गलती दोहराता है, तो विरोधी टीम यानी गेंदबाजी करने वाली टीम के खाते में सीधे 5 पेनल्टी रन जोड़ दिए जाएंगे।
इस नियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेल तय समय के भीतर बिना किसी रुकावट के आगे बढ़े। कई बार बल्लेबाज जानबूझकर या मानसिक दबाव बनाने के लिए समय लेते हैं, जिससे मैच का रोमांच फीका पड़ जाता है। अब इस प्रकार की हरकतों पर पूरी तरह से लगाम कसने की तैयारी कर ली गई है। बार-बार नियम तोड़ने पर खिलाड़ियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
मैदान पर खेल की निरंतरता बनाए रखने के लिए अंपायरों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। क्रिकेट समिति के अनुसार, खेल को सुचारू रूप से चलाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी था, क्योंकि दर्शकों को भी एक तेज और रोमांचक मुकाबला देखना पसंद है।
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दिन के टेस्ट मैचों में भी दिखेगा गुलाबी गेंद का रोमांच
पारंपरिक रूप से टेस्ट मैच हमेशा लाल गेंद से ही खेले जाते रहे हैं और गुलाबी गेंद का इस्तेमाल केवल डे-नाइट मुकाबलों में होता था। लेकिन अब आईसीसी ने एक और बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाते हुए दिन में खेले जाने वाले टेस्ट मैचों में भी गुलाबी गेंद के ट्रायल को हरी झंडी दे दी है। इसके पीछे मुख्य वजह खराब रोशनी या धुंध के कारण खेल के समय होने वाले नुकसान को रोकना है।
हालांकि, इस नियम का इस्तेमाल करने के लिए दोनों खेल रही टीमों की आपसी सहमति होना अनिवार्य होगा। एक बार मैच शुरू होने के बाद गेंद के रंग को बदला नहीं जा सकेगा। यदि टीमों ने मैच से पहले गुलाबी गेंद से खेलने का फैसला कर लिया, तो पूरे मुकाबले में उसी गेंद का इस्तेमाल जारी रखना होगा।
आईसीसी पुरुष क्रिकेट समिति के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने इस संदर्भ में अपने विचार रखते हुए खेल की गति और गुणवत्ता में सुधार की बात कही है। उनके अनुसार, क्रिकेट को वक्त के साथ प्रासंगिक बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे बदलाव बेहद जरूरी होते हैं ताकि खेल का स्तर और ऊंचा उठ सके।
"खेल की शर्तों में कुछ बेहद महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य खेल की गति में सुधार लाना और फैसलों में अधिक पारदर्शिता लाना है। ये कदम आधुनिक क्रिकेट की जरूरतों को पूरा करते हैं।" — सौरव गांगुली, अध्यक्ष, आईसीसी पुरुष क्रिकेट समिति
ओवरथ्रो, रन आउट और स्टंपिंग के नियमों में आई नई स्पष्टता
मैदान पर कई बार अंपायरों के फैसलों को लेकर असमंजस की स्थिति बन जाती थी, जिसे दूर करने के लिए इस बार नियमों को बेहद स्पष्ट किया गया है। ओवरथ्रो की परिभाषा को अब और अधिक सटीक बना दिया गया है। इसके तहत केवल उन्हीं प्रयासों को ओवरथ्रो माना जाएगा जहां जानबूझकर गेंद को स्टंप्स की ओर निर्देशित किया गया हो, सामान्य मिसफील्ड इसमें शामिल नहीं होंगे।
इसके अलावा, रन आउट और स्टंपिंग के दौरान नियमों की पेचीदगियों को भी सुलझाया गया है। अब विकेट गिराते समय फील्डर का गेंद पर पूरी तरह से नियंत्रण होना बेहद जरूरी है। केवल हाथ या उंगली का हल्का सा स्पर्श कर देना ही विकेट गिराने के लिए वैध नहीं माना जाएगा जब तक कि खिलाड़ी के हाथ में गेंद पर पूरा अधिकार न हो।
गेंद के वजन और आकार को लेकर भी विभिन्न श्रेणियों के तहत सख्त मानक तय किए गए हैं। पुरुष, महिला और जूनियर क्रिकेट के लिए इस्तेमाल होने वाली गेंदों के मानक अब बिल्कुल अलग और स्पष्ट होंगे, जिससे किसी भी प्रकार के विवाद की गुंजाइश नहीं बचेगी।
कब्जे में आई खेल की गति, कब और कैसे लागू होंगे प्रावधान
ये सभी नए प्रावधान 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली या उसके बाद की अंतरराष्ट्रीय सीरीज पर लागू होंगे। जो श्रृंखलाएं पहले से चल रही हैं, उनमें पुराने नियम ही मान्य रहेंगे। इसके अलावा, टेस्ट मैचों में अंतिम ओवर के दौरान विकेट गिरने पर खेल स्वतः समाप्त नहीं होगा, बल्कि तय ओवरों की संख्या पूरी कराई जाएगी ताकि समय की बर्बादी न हो।
इन तमाम बदलावों से साफ है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का स्वरूप काफी बदला हुआ और अनुशासित नजर आएगा। खिलाड़ियों को अपनी रणनीति में इन नए नियमों को शामिल करना होगा, तभी वे मैदान पर सफलता हासिल कर सकेंगे।








