नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के बड़े सरकारी बैंकों में शुमार आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया अब अपने अंतिम और निर्णायक दौर में पहुंच गई है। केंद्र सरकार ने बैंक में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेचने का बड़ा फैसला लिया है। हाल ही में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस मेगा डील पर औपचारिक मुहर लगा दी गई है। इस पूरी बिक्री प्रक्रिया के तहत सरकार बैंक में अपनी करीब साठ दशमलव बहत्तर प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इस सौदे की कुल कीमत बावन हजार आठ सौ अठत्तर करोड़ रुपये तय की गई है, जो भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास के सबसे बड़े सौदों में से एक माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस भारी-भरकम हिस्सेदारी को खरीदने के लिए एक प्रमुख कनाडाई कंपनी के साथ सहमति बनी है। सरकार लंबे समय से घाटे और वित्तीय दबाव से जूझ रहे सार्वजनिक उपक्रमों और बैंकों से अपनी हिस्सेदारी कम करने की रणनीति पर काम कर रही है। एअर इंडिया के सफल निजीकरण के बाद सरकार का यह दूसरा सबसे बड़ा कदम है, जो देश के बैंकिंग ढांचे में एक बड़ा बदलाव लाएगा। इस डील के बाद आईडीबीआई बैंक का पूरा मालिकाना हक और नियंत्रण निजी हाथों में चला जाएगा, जिससे इसकी कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल जाएगी।
तीन साल में बदलेगा बैंक का नाम और रूप
इस मेगा डील के पूरा होने के बाद आने वाले समय में बैंक के नाम, लोगो और कामकाज के तौर-तरीकों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस सौदे की प्रक्रिया पूरी होने के अगले तीन सालों के भीतर बैंक अपना नाम भी बदल सकता है। हालांकि, सरकार और खरीदार कंपनी के बीच यह तय हुआ है कि मौजूदा ग्राहकों, खाताधारकों और बैंक कर्मचारियों के हितों की पूरी रक्षा की जाएगी। बैंक की शाखाओं का नेटवर्क देश भर में फैला हुआ है, इसलिए इस बड़े बदलाव का असर सीधे तौर पर आम जनता और खाताधारकों की बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निजी हाथों में जाने के बाद बैंक की कार्यक्षमता में सुधार होगा और एनपीए यानी फंसे हुए कर्ज की समस्या से निपटने में आसानी होगी। सरकारी नियंत्रण हटने के बाद बैंक बाजार की प्रतिस्पर्धा में तेजी से फैसले ले सकेगा। पिछले कुछ सालों से आईडीबीआई बैंक को उबारने के लिए सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम ने मिलकर काफी पैसा लगाया था। अब इस मेगा डील के जरिए सरकार इस बैंक से अपनी बड़ी पूंजी निकालकर देश के अन्य विकास कार्यों में उसका उपयोग करना चाहती है।
बाजार और ग्राहकों पर इस मेगा डील का असर
इस बड़ी खबर के सामने आने के बाद से ही शेयर बाजार और वित्तीय जगत में हलचल तेज हो गई है। निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कनाडाई कंपनी किस तरह से बैंक की कमान संभालती है और इसके शेयरधारकों को क्या फायदा मिलता है। बैंक के कर्मचारियों की यूनियन और अधिकारी भी इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, सरकार की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारियों की नौकरी और वेतन से जुड़ी शर्तों का पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि किसी भी प्रकार का विवाद न पैदा हो।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल के मुताबिक, आम खाताधारकों को अपनी जमा पूंजी को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। बैंक के सभी पुराने नियम और जमा राशि पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। आने वाले हफ्तों में इस डील से जुड़े कानूनी और वित्तीय दस्तावेजों पर अंतिम हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। जैसे-जैसे इस प्रक्रिया के अगले कदम आगे बढ़ेंगे, देश के बैंकिंग सेक्टर में एक नए दौर की शुरुआत साफ तौर पर दिखाई देगी।








