IIT बॉम्बे छात्र खुदकुशी मामले में गरमाई सियासत, राहुल गांधी ने परिजनों से की बात
देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) में एक बीटेक छात्र की संदिग्ध आत्महत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर प्रकरण पर अब राष्ट्रीय स्तर पर सियासी और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मृतक छात्र साहिल वाकोडे के माता-पिता से वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क साधा। उन्होंने शोकसंतप्त परिवार को सांत्वना दी और इस कठिन समय में हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। एजेंसी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बातचीत के दौरान परिवार ने अपनी पीड़ा साझा की।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कैंपस के भीतर छात्रों का गुस्सा और रोष लगातार बढ़ रहा था। साहिल वाकोडे एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में दूसरे वर्ष का छात्र था और पवई स्थित हॉस्टल परिसर में उसका शव मिलने के बाद से ही संस्थान में तनाव का माहौल बना हुआ था। छात्रों ने घटना के विरोध में कई दिनों तक प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रशासन को उनकी कई मांगें मानने पर विवश होना पड़ा।
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मौत से पहले दोस्त से हुई थी बातचीत, पेपर खराब होने की कही थी बात
जांच एजेंसियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अपनी जीवनलीला समाप्त करने से कुछ घंटे पहले साहिल ने फोन पर अपनी एक करीबी दोस्त से लंबी बातचीत की थी। इस दौरान उसने अकादमिक दबाव का जिक्र करते हुए बताया था कि उसका थर्मोडायनेमिक्स का पेपर काफी खराब हुआ था। उसने बातचीत के अंत में यह भी कहा था कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है। इसके बाद जब उस दोस्त ने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो साहिल की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।
शुरुआती बातचीत के इन बौरों के बीच मामले का एक अन्य पहलू भी सामने आया है। साहिल के परिजनों ने आरोप लगाया है कि संस्थान के कुछ लोगों ने उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और जातिसूचक टिप्पणियां कीं। हालांकि, दोस्त के साथ हुई उस आखिरी बातचीत में किसी प्रकार की जातीय टिप्पणी का प्रत्यक्ष जिक्र होने की बात सामने नहीं आई है। पुलिस और क्राइम ब्रांच इस एंगल से भी मामले की गहराई से छानबीन कर रही है कि परीक्षा के दौरान असल में क्या स्थितियां बनी थीं।
परीक्षा हॉल का सीसीटीवी फुटेज और नकल का विवाद
घटना के तूल पकड़ने के बाद परीक्षा हॉल के भीतर का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया, जिसने इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया। फुटेज में नजर आ रहा है कि परीक्षा के दौरान प्रोफेसर साहिल के पास आते हैं और उससे बातचीत करते हैं। इसके बाद छात्र उन्हें अपना मोबाइल फोन और उत्तर पुस्तिका सौंप देता है और कक्ष से बाहर चला जाता है।
"जांच पूरी होने से पहले इस तरह के संवेदनशील मामलों में कोई भी शुरुआती निष्कर्ष या बयान जारी करना उचित नहीं था। हम पूरी पारदर्शिता के साथ इस पूरी घटना की सच्चाई सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं।" — संस्थान के अधिकारी
शुरुआत में संस्थान की ओर से यह दावा किया गया था कि छात्र को मोबाइल के जरिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता टूल का इस्तेमाल करते हुए नकल करते पकड़ा गया था और उसने प्रश्नपत्र अपलोड करने का प्रयास किया था। हालांकि, भारी विरोध और आलोचनाओं के बाद संस्थान ने अपने उस बयान पर खेد जताते हुए उसे वापस ले लिया था और स्पष्ट किया था कि पूरी जांच प्रक्रिया संपन्न होने से पहले कोई अंतिम टिप्पणी करना सही नहीं था।
परिजनों का गंभीर आरोप और पुलिसिया जांच की दिशा
मृतक छात्र के पिता रविंद्र वाकोडे ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ मुंबई से जबरन निजी वाहन में बिठाकर वाशिम जिले भेज दिया गया, जो घटनास्थल से करीब 555 किलोमीटर दूर है। परिवार का इरादा पवई परिसर के मुख्य द्वार पर शांतिपूर्ण तरीके से भूख हड़ताल शुरू करने का था ताकि नामित प्रोफेसर और संस्थान के निदेशक की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जा सके।
परिवार का मुख्य सवाल यह है कि यदि प्राथमिकी (FIR) में आरोपियों के नाम दर्ज हैं, तो अब तक उनकी औपचारिक गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई है। इस बीच, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने परीक्षा हॉल, गलियारों और हॉस्टल परिसरों के सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लेकर साहिल की हर एक गतिविधि और उसके अंतिम घंटों के घटनाक्रम को डिकोड करने की कोशिश शुरू कर दी है।
छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद संस्थान का बड़ा प्रशासनिक निर्णय
साहिल की असामयिक मृत्यु के पश्चात आईआईटी बॉम्बे के छात्रों ने उग्र प्रदर्शन का रास्ता अपनाया और लगातार तीन दिनों तक धरने पर बैठे रहे। छात्रों द्वारा संस्थान के सामने 18 सूत्रीय मांगों का एक चार्टर रखा गया था, जिसमें स्वतंत्र न्यायिक जांच, दोषी प्रोफेसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श तंत्र को मजबूत करना और प्रदर्शनकारी छात्रों पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करना शामिल था।
परिस्थितियों की नजाकत को भांपते हुए संस्थान के निदेशक ने छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ लंबी बैठक की और उनकी अधिकतर मांगों पर अपनी सहमति जताई। इसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए संस्थान ने कैंपस के सभी कमرات और हॉस्टलों से पारंपरिक सीलिंग फैन हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इनकी जगह अब दीवारों पर लगने वाले सुरक्षित वॉल-माउंटेड पंखे लगाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।






