नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत और पड़ोसी देश बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ महीनों से हालात लगातार बदल रहे हैं। एक तरफ जहां दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नए रास्ते खोले जा रहे हैं, वहीं कूटनीतिक मोर्चे पर कई नए सवाल भी खड़े हो गए हैं। हाल ही में असम के डिब्रूगढ़ से बांग्लादेश के लिए एक बड़ा कार्गो जहाज रवाना किया गया है। आजादी के बाद यह पहला मौका है जब जलमार्ग के जरिए इस तरह का व्यापार फिर से शुरू हुआ है। इससे दोनों देशों के कारोबारियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है और माल ढुलाई का खर्च भी काफी कम हो जाएगा।
दूसरी तरफ कृषि क्षेत्र से जुड़ी अच्छी खबर यह है कि झारखंड के गोला इलाके का शकरकंद अब सीधे बांग्लादेश के बाजारों तक पहुंच रहा है। वहां के स्थानीय किसानों को इस अंतरराष्ट्रीय बाजार से बहुत अच्छा मुनाफा मिल रहा है। किसानों का कहना है कि पहले उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए दूर-दराज की मंडियों में जाना पड़ता था और सही दाम नहीं मिलते थे। अब बांग्लादेश की मांग बढ़ने से किसानों की आमदनी में सुधार हुआ है और गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं। यह व्यापारिक सहयोग दोनों देशों के आम लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।
शेख हसीना की वापसी और कूटनीतिक बयानबाजी
व्यापारिक रिश्तों के बीच राजनीतिक गलियारों में शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी का मुद्दा गरमाया हुआ है। भारत सरकार के सामने यह बड़ा सवाल है कि पूर्व प्रधानमंत्री की वापसी और उनकी सुरक्षा को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। इस बीच बांग्लादेश की तरफ से अचानक सुलह की बात करने के संकेत भी मिले हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह बदलाव अचानक हुआ है या इसके पीछे कोई बड़ा कूटनीतिक दांव है, इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय बारीकी से नजर बनाए हुए है। शेख हसीना के भविष्य को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक और पक्की समयसीमा सामने नहीं आई है।
कूटनीतिक मुलाकातों और बयानों के बीच सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। खुफिया रिपोर्टों के हवाले से यह दावा किया गया है कि एक मोस्ट वांटेड आतंकी अचानक कराची से बांग्लादेश पहुंच गया है। पूर्व रॉ एजेंटों का मानना है कि यह स्थिति भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों को पहले से ही हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी घुसपैठ या अवैध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके। बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती है कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी ताकतों के लिए न होने दे।
जलमार्ग व्यापार और किसानों की बढ़ी उम्मीदें
डिब्रूगढ़ से रवाना हुआ कार्गो जहाज भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत होते लॉजिस्टिक्स का बड़ा उदाहरण है। ब्रह्मपुत्र नदी और प्रोटोकॉल रूट के जरिए जहाजों की आवाजाही शुरू होने से सड़क मार्ग पर ट्रकों का दबाव कम होगा। पर्यावरण और लागत दोनों दृष्टियों से यह जलमार्ग व्यापार बहुत कारगर साबित हो रहा है। झारखंड के किसानों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही रास्ते मिल जाएं तो छोटे किसान भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना सकते हैं।
जमीनी स्तर पर हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और सुरक्षा के मोर्चे पर सतर्कता बरतनी जरूरी है। भारत सरकार हर एक घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है ताकि देश की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बांग्लादेश की नई सरकार भारत के साथ द्विपक्षीय समझौतों को किस दिशा में आगे बढ़ाती है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर आगे भी अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए आपको सबसे सटीक और सच्ची खबरें देती रहेगी।





