तेल अवीव से हमारी विशेष फील्ड रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल इस समय अपने इतिहास के सबसे दौर से गुजर रहा है। देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। गाजा जंग और बंधकों की रिहाई को लेकर सरकार की नीतियां पूरी तरह फेल होती दिख रही हैं। सड़कों पर रोजाना हजारों लोग उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। आम नागरिकों का यह गुस्सा अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विद्रोह का रूप लेता जा रहा है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इस बात का खुलकर जिक्र किया है। एजेंसी का साफ कहना है कि इजरायल अब आंतरिक कलह की आग में सुलग रहा है। नेतन्याहू के फैसलों ने देश की जनता को दो स्पष्ट हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ कट्टरपंथी धड़ा सरकार के समर्थन में खड़ा है, तो दूसरी तरफ आम जनता और विपक्षी दल प्रधानमंत्री को देश की बर्बादी का जिम्मेदार मान रहे हैं। इस गहरी खाई के कारण देश के भीतर हालात विस्फोटक बन चुके हैं।
नेतन्याहू की राजनीतिक चालें और घटता जनादेश
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पिछले कई दशकों से इजरायल की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। लेकिन इस बार उनकी राजनीतिक सूझबूझ भी देश को बचाने में नाकाम साबित हो रही है। अपनी कुर्सी बचाने के लिए वे लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं जो समाज में नफरत को और ज्यादा बढ़ा रहे हैं। सेना के कई बड़े अधिकारी और पूर्व रक्षा मंत्री भी अब खुलकर नेतन्याहू की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं। इससे सरकार और सुरक्षा तंत्र के बीच भी गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं।
देश की अर्थव्यवस्था पर भी इस अंदरूनी कलह का बहुत बुरा असर पड़ रहा है। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और हड़तालों के कारण इजरायली बाजार ठप होने की कगार पर पहुंच गए हैं। विदेशी निवेशक अपना पैसा तेजी से बाहर निकाल रहे हैं। आम आदमी की जेब पर महंगाई का भारी बोझ पड़ रहा है। लोग खाने-पीने की चीजों और बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में जनता का धैर्य अब पूरी तरह जवाब दे चुका है और वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
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गृहयुद्ध की कगार पर खड़ा इजरायली समाज
सीआईए की चेतावनी में जिस 'एक चिंगारी' का जिक्र किया गया है, वह कोई भी छोटी घटना हो सकती है। अगर कोई बड़ा आतंकी हमला होता है या फिर अदालत का कोई सख्त फैसला आता है, तो हालात काबू से बाहर हो सकते हैं। पुलिस और सुरक्षाबलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे आम नागरिकों के गुस्से को कैसे संभालें। अगर सुरक्षा बलों ने सख्ती दिखाई, तो सड़क पर खूनखराबा होने में देर नहीं लगेगी और यही वह बिंदु है जिसे गृहयुद्ध कहा जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इजरायल के इन अंदरूनी हालातों को लेकर बेहद चिंतित है। अमेरिका और पश्चिमी देश नेतन्याहू पर लगातार दबाव बना रहे हैं कि वे अपने राजनीतिक फैसलों पर पुनर्विचार करें। लेकिन नेतन्याहू अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। वे किसी भी कीमत पर अपनी सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं। क्षेत्रीय युद्ध के साथ-साथ घर के अंदर सुलगती इस आग ने इजरायल को चारों तरफ से घेर लिया है।
भविष्य के खतरे और कूटनीतिक कसमकस
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले कुछ हफ्ते इजरायल के भविष्य के लिए बहुत तयशुदा होने वाले हैं। यदि विपक्ष एकजुट होकर संसद में सरकार के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाने में कामयाब होता है, तो नेतन्याहू को झुकना पड़ सकता है। हालांकि, उनकी दक्षिणपंथी पार्टियां इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं। देश की जनता बदलाव चाहती है, लेकिन राजनेताओं की कुर्सी की भूख ने पूरे देश को एक बारूद के ढेर पर लाकर खड़ा कर दिया है। सीआईए की यह चेतावनी महज एक अनुमान नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत का कड़वा सच है।




