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देशपढ़ने में समय: 4 मिनट

हूतियों पर टूट पड़े यमन और सऊदी के 100 फाइटर जेट्स, एयरपोर्ट पर कब्जा और बाब अल-मंदेब पर बढ़ा दबाव

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। यमन और सऊदी अरब की संयुक्त वायु सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है। इस हमले में एक सौ से ज्यादा फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया है। एयरपोर्ट पर कब्जा करने के बाद अब सामरिक रूप से बेहद अहम बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर भी दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•7 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•43
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हूतियों पर टूट पड़े यमन और सऊदी के 100 फाइटर जेट्स, एयरपोर्ट पर कब्जा और बाब अल-मंदेब पर बढ़ा दबाव
📷 हूतियों पर टूट पड़े यमन और सऊदी के 100 फाइटर जेट्स, एयरपोर्ट पर कब्जा और बाब अल-मंदेब पर बढ़ा दबाव — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। यमन और सऊदी अरब की संयुक्त वायु सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है। इस हमले में एक सौ से ज्यादा फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया है। एयरपोर्ट पर कब्जा करने के बाद अब सामरिक रूप से बेहद अहम बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर भी दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया है।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

सना और रियाद की ओर से आ रही ताजा और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबरों के मुताबिक मध्य पूर्व का आसमान इस समय युद्ध के विमानों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा है। यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन और यमन की सेना ने अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक सैन्य कदम उठाया है। इस सैन्य कार्रवाई में एक साथ सौ से ज्यादा फाइटर जेट्स को आसमान में उतारा गया है। इस ताबड़तोड़ और अचानक हुई एयरस्ट्राइक ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां अब गंभीर चिंता जाहिर कर रही हैं।

इस बड़े सैन्य ऑपरेशन की सबसे बड़ी खबर यह है कि संयुक्त सेनाओं ने एक प्रमुख स्थानीय एयरपोर्ट को अपने कब्जे में ले लिया है। हूती विद्रोही इस हवाई अड्डे का इस्तेमाल अपने हथियारों और लड़ाकों की आवाजाही के लिए कर रहे थे। पिछले कई महीनों से इस इलाके में हूती लड़ाके अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को लगातार निशाना बना रहे थे। इसके जवाब में ही अब यह बड़ा और निर्णायक सैन्य हमला किया गया है। एयरपोर्ट हाथ से निकल जाने के बाद हूती विद्रोहियों की रसद और आपूर्ति लाइन को बहुत बड़ा झटका लगा है।

बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर क्यों बढ़ रहा है भारी दबाव?

इस पूरे संघर्ष का सबसे अहम हिस्सा बाब अल-मंदेब का समुद्री रास्ता है। यह जलडमरूमध्य एशिया और यूरोप के बीच होने वाले व्यापार के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है। यहीं से होकर दुनिया भर के बड़े तेल टैंकर और मालवाहक जहाज गुजरते हैं। हूती विद्रोही पिछले कुछ समय से इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे थे। ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद अब इस पूरे समुद्री इलाके में सुरक्षा का दायरा बहुत ज्यादा कड़ा कर दिया गया है।

सऊदी अरब और यमन की सेनाओं के इस साझा अभियान का मुख्य मकसद समुद्री व्यापार को सुरक्षित करना है। दुनिया भर के देश चाहते हैं कि इस रास्ते पर किसी भी तरह का आतंकवाद या गैरकानूनी कब्जा न रहे। फाइटर जेट्स की लगातार हो रही गश्त से हूती लड़ाकों को अपने ठिकाने छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जमीनी स्तर पर तैनात सैनिक भी अब तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और हूती ठिकानों को एक-एक करके नेस्तनाबूद किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस जंग के और भी ज्यादा भयानक रूप लेने की पूरी आशंका जताई जा रही है।

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क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसका क्या असर होगा?

इस बड़े सैन्य हमले का असर सिर्फ यमन या सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहने वाला है। पूरी दुनिया की नजरें इस समय इस युद्ध पर टिकी हुई हैं क्योंकि इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अमेरिका और कई अन्य पश्चिमी देश भी इस इलाके में अपनी नौसेना के जरिए स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हूती विद्रोहियों को पीछे धकेलने के लिए यह अभियान भले ही बहुत जरूरी माना जा रहा हो, लेकिन इसके मानवीय परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं।

जमीनी हकीकत यह है कि युद्ध की इस आग में आम यमनी नागरिकों की मुश्किलें एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की आपूर्ति पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे हर रोज बमबारी की आवाजें सुनकर जीने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन लगातार यह अपील कर रहे हैं कि आम नागरिकों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। लेकिन फिलहाल मैदान में केवल गोलियों और फाइटर जेट्स की गड़गड़ाहट ही सुनाई दे रही है।

आगे क्या होगा और सेना की अगली बड़ी रणनीति क्या है?

द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और रक्षा विशेषज्ञों के विश्लेषण के मुताबिक, यह ऑपरेशन अभी कुछ और हफ्तों तक चल सकता है। संयुक्त सेनाएं तब तक पीछे हटने वाली नहीं हैं जब तक हूती विद्रोहियों की कमर पूरी तरह से टूट नहीं जाती। एयरपोर्ट पर कब्जा जमाने के बाद अब सेना का अगला निशाना विद्रोही ठिकानों के बाकी बचे गढ़ हैं। बाब अल-मंदेब के पास सुरक्षा कड़ी होने से जहाजों को राहत मिलने की उम्मीद है। आने वाला वक्त ही बताएगा कि क्या यह सैन्य कार्रवाई मध्य मध्य में स्थायी शांति ला पाती है या फिर संघर्ष का दायरा और ज्यादा बड़ा हो जाता है।

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