बिहार के जमुई कांड पर पीड़िता के परिवार की पहली मुखर प्रतिक्रिया
बिहार के जमुई जिले में स्थित मरवा पहाड़ की तलहटी में घटी उस भयावह घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। इस सनसनीखेज मामले में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ हुए गंभीर दुर्व्यवहार के बाद अब पीड़ित परिवार का दर्द और न्याय की आस खुलकर सामने आई है। घटना के बाद से सदमे में डूबे परिवार ने हाल ही में राज्य के मुखिया से मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने अपनी आपबीती और प्रशासनिक कार्रवाई पर खुलकर बात की।
पीड़ित परिवार के लिए यह दौर बेहद मानसिक तनाव और संघर्ष से भरा रहा है। हालांकि, प्रशासन की तरफ से उठाए गए त्वरित कदमों और समाज के विभिन्न वर्गों से मिले समर्थन ने इस पीड़ित परिवार को कुछ हद तक संबल प्रदान किया है। मीडिया से बातचीत के दौरान माता-पिता ने न केवल उस डरावनी रात के पन्नों को पलटा, बल्कि उन तमाम पहलुओं पर भी रोशनी डाली जो इस पूरी जांच और न्याय की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बने हुए हैं।
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मुख्यमंत्री से मुलाकात पर क्या बोलीं पीड़िता की मां?
घटना के तुरंत बाद पीड़ित परिवार ने राज्य के मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए पीड़िता की मां ने भावुक होकर बताया कि उनकी मुलाकात बेहद सांत्वना भरी रही। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने केवल एक प्रशासनिक पद पर बैठे व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के एक सच्चे अभिभावक यानी गार्जियन की तरह उनका हालचाल जाना।
मां ने साझा किया कि मुख्यमंत्री ने उनकी बेटी को एक 'बहादुर बच्ची' की संज्ञा दी है। साथ ही यह भरोसा भी दिलाया है कि पढ़ाई, भविष्य की सुरक्षा या किसी भी प्रकार की अन्य जरूरत पड़ने पर परिवार बिना किसी झिझक के उनसे संपर्क कर सकता है। इस प्रकार के प्रशासनिक सहयोग से परिवार के भीतर एक नया विश्वास जागा है कि उन्हें न्याय मिलने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
घटना की जानकारी मिलने का वह खौफनाक मंजर
अपनी व्यथा साझा करते हुए पीड़िता की मां ने बताया कि उन्हें इस वीभत्स घटना की भनक 19 सितंबर की शाम करीब सात से आठ बजे के बीच लगी थी। जब उन्होंने अपनी बेटी से इस बारे में पूछताछ की, तो बच्ची ने रोते हुए पूरी आपबीती सुनाई। यह पल किसी भी माता-पिता के लिए वज्रपात जैसा था। लेकिन परिवार ने हिम्मत नहीं हारी और तुरंत कानूनी मदद का रास्ता चुना।
वहीं, पीड़िता के पिता ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी एक दिन बाद यानी 20 सितंबर की रात लगभग आठ बजे मिली। शुरुआती दौर में बेटी और पूरा परिवार अत्यधिक भयभीत था। कम उम्र होने के कारण बच्ची पर इस मानसिक आघात का गहरा असर पड़ा था। परिवार ने तुरंत थाने का रुख किया और आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस महकमे ने तेजी से अपनी कार्रवाई को अंजाम दिया।
संकट की घड़ी में चट्टान की तरह खड़े रहने वाले साथी की तारीफ
घटना के वक्त पीड़िता के साथ मौजूद उस लड़के की भूमिका को लेकर भी परिवार ने खुलकर बात की। मां ने उस लड़के की सराहना करते हुए कहा कि वह बेहद समझदार और अच्छा इंसान है। उस डरावनी परिस्थिति में जब कोई भी मदद के लिए पास नहीं था, तब दोनों ने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा और पूरी ताकत के साथ हिम्मत से काम लिया।
परिवार का मानना है कि यदि उस वक्त उस लड़के ने संयम और साहस का परिचय न दिया होता, तो स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो सकती थी। माता-पिता ने समाज के सामने एक सकारात्मक संदेश देते हुए कहा कि जिस तरह इस संकट की बेला में जमुई के लोग, पूरा बिहार और देश के कोने-कोने से लोग उनके साथ खड़े रहे, वैसी ही एकजुटता हमेशा कायम रहनी चाहिए ताकि अपराधियों के भीतर कानून का खौफ हमेशा जिंदा रहे।
प्रशासनिक और पुलिसिया कार्रवाई पर पूर्ण संतोष
पुलिस और न्याय व्यवस्था की भूमिका पर बोलते हुए माता-पिता ने एक सुर में संतोष जताया है। उनका कहना है कि घटना सामने आने के बाद जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों ने जिस तत्परता से काम किया, वह सराहनीय है। महज 24 से 48 घंटों के भीतर आरोपियों की धरपकड़ और इसके बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई से परिवार को यह भरोसा हुआ है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।
"हमारी बच्ची अभी बहुत छोटी है और इस घटना ने उसे अंदर से डरा दिया था। लेकिन प्रशासन ने जिस तेजी से काम किया है, उससे हमें राहत मिली है। हम चाहते हैं कि अदालत इन अपराधियों को इतनी सख्त सजा दे जो समाज के लिए एक मिसाल बने।" — पीड़िता के पिता
मुख्य आरोपियों नंदन और हरे राम को लेकर पिता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें कानून के दायरे में रहकर कठोरतम दंड मिलना चाहिए। हालांकि, सोशल मीडिया पर एनकाउंटर या अन्य तरीकों को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने सीधे तौर पर कुछ भी कहने से इनकार किया और कहा कि यह सब पूरी तरह से प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का विषय है, जिस पर वे कानून के निर्णय का इंतजार करेंगे।
समाज से एकजुटता बनाए रखने की पुरजोर अपील
इस पूरे प्रकरण के अंत में पीड़ित परिवार ने पूरे देश और समाज के नाम एक मजबूत संदेश दिया है। उनका कहना है कि इस प्रकार की आपराधिक मानसिकता वाले लोगों के खिलाफ जाति, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर हर नागरिक को एकजुट होना चाहिए। जब तक पूरा समाज ऐसे तत्वों का सामूहिक रूप से बहिष्कार नहीं करेगा, तब तक बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना कठिन होगा।
परिवार ने मीडिया, स्थानीय नागरिकों और प्रशासन का धन्यवाद करते हुए कहा कि कठिन समय में जनता का मिला साथ ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना है। अब उनकी एकमात्र इच्छा यही है कि उनकी बेटी को पूर्ण न्याय मिले और दोषियों को उनके कृत्यों की ऐसी सजा भुगतनी पड़े कि भविष्य में कोई भी अपराधी ऐसा घिनौना कृत्य करने की हिम्मत न जुटा सके।





