सिंधु जल संधि पर शहबाज शरीफ के दावों का सच और सोशल मीडिया पर फजीहत
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर पाकिस्तान की ओर से अक्सर ऐसे दावे किए जाते हैं जिनकी जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक भाषण को लेकर वहां के एक मंत्री द्वारा इसे 'ऐतिहासिक' करार दिए जाने के बाद वैश्विक गलियारों और सोशल मीडिया पर मजाक उड़ना शुरू हो गया। जानकारों का मानना है कि सिंधु जल संधि जैसे संवेदनशील मामलों पर पाकिस्तानी हुक्मरान घरेलू जनता को लुभाने के लिए अक्सर जुमलेबाजी का सहारा लेते हैं, जिसका अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर कोई असर नहीं पड़ता है।
सोशल मीडिया यूजर्स ने पाकिस्तानी मंत्री के इस दावे पर तीखे कटाक्ष किए हैं। लोगों का कहना है कि आर्थिक बदहाली और आंतरिक कलह से जूझ रहे पाकिस्तान के नेता अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसे भ्रामक बयानों का सहारा ले रहे हैं। भारत ने पहले ही साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि जैसे अहम मुद्दों पर द्विपक्षीय समझौतों की समीक्षा और नियम कायदे पूरी तरह से स्थापित संधियों के तहत ही तय होते हैं, न कि किसी देश के राजनीतिक बयानों से।
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संयुक्त राष्ट्र में एस जयशंकर की दो टूक, आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान बेनकाब
दूसरी ओर, वैश्विक मंचों पर भारत ने अपनी विदेश नीति के सख्त तेवर एक बार फिर दुनिया के सामने रखे हैं। देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को संबोधित करते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान को उसकी हरकतों के लिए आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो देश लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं और उसे अपनी विदेश नीति का हथियार बनाते हैं, वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठे नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करते हैं।
विदेश मंत्री ने दो टूक अंदाज में कहा कि आतंकवाद को सामान्य या स्वीकार्य मानने वाले तर्कों को अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत ने हमेशा अपनी रक्षा के अधिकार का मजबूती से पालन किया है और भविष्य में भी देश की संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जयशंकर के इस कड़े संदेश ने वैश्विक पटल पर पाकिस्तान की पोल खोलकर रख दी है।
"लगातार आतंकवाद फैलाने वाले एक देश ने इस असेंबली के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है। आतंकवाद को नॉर्मलाइज करने और उसके नतीजों से बचने के लिए जो तर्क दिए गए हैं, वे पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और भारत अपनी रक्षा के अधिकार का पूरा इस्तेमाल करेगा।" — एस जयशंकर, विदेश मंत्री, भारत
अमेरिका और पश्चिमी देशों के रवैये पर विदेश मंत्री की खरी-खरी
न्यूयार्क स्थित प्रतिष्ठित संस्थान 'एशिया सोसाइटी' में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के साथ रिश्तों और उसकी नीतियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने अमेरिका के पूर्व राजनयिक डेनियल रसेल के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वाशिंगटन को भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं और सीमा पार आतंकवाद के खतरे को पूरी तरह समझना होगा।
जयशंकर ने दो टूक अंदाज में कहा कि यदि पश्चिमी देश और हमारे रणनीतिक साझीदार भारत के सबसे बड़े दर्द यानी प्रायोजित आतंकवाद की गंभीरता को नजरअंदाज करेंगे, तो इसका असर द्विपक्षीय रिश्तों की गहराई पर पड़ना स्वाभाविक है। भारत ने कभी भी अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं से समझौता नहीं किया है और आज दुनिया के कई देश भारत के स्वतंत्र विदेश नीति मॉडल को अपना रहे हैं।
वैश्विक कूटनीति में भारत का स्वतंत्र रुख और बदलता समीकरण
विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत ने अपनी कूटनीति के जरिए यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। चाहे वह अमेरिका के साथ व्यापारिक और टैरिफ से जुड़े मतभेद हों या फिर रूस, चीन और यूक्रेन के बीच संतुलन बनाने की बात हो, भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है।
पाकिस्तान के झूठे प्रोपोगंडा और शहबाज शरीफ के बयानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब कोई भी गंभीरता से नहीं लेता है। पड़ोसी मुल्क की आर्थिक बदहाली और राजनीतिक अस्थिरता इस बात का प्रमाण है कि केवल जुमलेबाजी से देश नहीं चलाए जा सकते। भारत अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था और स्पष्ट विदेश नीति के दम पर वैश्विक मंच पर लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।








