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लाडली बहनों के लिए बड़ी खुशखबरी: योजना में नए नाम जोड़ने का हुआ ऐलान, जानें कब से मिलेगा लाभ

मध्य प्रदेश की बहुचर्चित लाडली बहना योजना को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि अगले साल से इस योजना में नई पात्र महिलाओं के नाम भी जोड़े जाएंगे।
The Freelance ब्यूरो
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25 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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लाडली बहनों के लिए बड़ी खुशखबरी: योजना में नए नाम जोड़ने का हुआ ऐलान, जानें कब से मिलेगा लाभ
📷 लाडली बहनों के लिए बड़ी खुशखबरी: योजना में नए नाम जोड़ने का हुआ ऐलान, जानें कब से मिलेगा लाभ — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लाडली बहना योजना के विस्तार को लेकर दिए बड़े संकेत
  • अगले साल से नई और पात्र महिलाओं के नाम सूची में जोड़ने की तैयारी
  • अब तक इस कल्याणकारी योजना के तहत 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि बांटी गई
  • शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर सरकार का दावा- प्राथमिक स्कूलों में ड्रॉप आउट दर हुई शून्य

मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए बड़ी राहत का ऐलान

मध्य प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का पर्याय बन चुकी ‘मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना’ को लेकर एक बार फिर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य की आधी आबादी के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इसके जरिए हर महीने नियमित आर्थिक मदद सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाई जाती है। पिछले कुछ समय से इस बात को लेकर असमंजस बना हुआ था कि क्या नए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे या नहीं। हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बड़ा बयान दिया है, जिससे उन तमाम महिलाओं में उम्मीद की नई किरण जाग उठी है जो अब तक इस योजना के दायरे से बाहर थीं।

यह योजना केवल एक वित्तीय सहायता का जरिया नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं में आत्मविश्वास जगाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का एक मजबूत माध्यम साबित हुई है। शुरुआत से ही इस योजना ने रिकॉर्ड स्तर पर महिलाओं को आकर्षित किया है। सरकार की ओर से समय-समय पर इसके नियमों और पात्रताओं की समीक्षा की जाती है, ताकि जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाई जा सके। अब जब खुद राज्य के मुखिया ने नए नाम जोड़े जाने की बात कही है, तो प्रशासनिक स्तर पर भी सुगबुगाहट तेज हो गई है कि जल्द ही इसका नया खाका तैयार किया जाएगा।

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देवास में सीएम मोहन यादव ने दिए भविष्य के संकेत

मध्य प्रदेश के देवास जिले में आयोजित एक विशेष सेवा संकल्प कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस लोक कल्याणकारी योजना के भविष्य को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन पात्र बहनों को अभी तक इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। सरकार अगले साल से पात्रता के नियमों के आधार पर नई महिलाओं के नाम इस सूची में शामिल करेगी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद से राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच इसकी चर्चा काफी तेज हो गई है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि अब तक इस महात्वाकांक्षी योजना के माध्यम से महिलाओं के खातों में 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सरकार वित्तीय चुनौतियों के बावजूद महिला कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। लाभार्थियों के खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए पैसे पहुंचने से बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो गई है, जिसकी सराहना पूरे देश में हो रही है।

क्या कहती है योजना की रूपरेखा और पात्रता?

जब मध्य प्रदेश सरकार ने इस योजना की शुरुआत की थी, तब इसके लिए कुछ निश्चित आयु वर्ग और पारिवारिक आय के दायरे तय किए गए थे। समय के साथ इसमें कुछ बदलाव भी किए गए। वर्तमान में लाखों महिलाएं इस योजना के तहत नियमित रूप से आर्थिक सहायता प्राप्त कर रही हैं। हालांकि, जिन युवतियों या महिलाओं की शादी हाल ही में हुई है या जो परिवार पहले किन्हीं कारणों से आवेदन करने से चूक गए थे, वे लगातार नए पोर्टल खुलने का इंतजार कर रही थीं।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जैसे ही सरकार की ओर से आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, वैसे ही ऑनलाइन पोर्टल पर नए आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके लिए महिलाओं को अपने जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, समग्र आईडी, बैंक खाता विवरण और मोबाइल नंबर को अपडेट रखने की सलाह दी जा रही है। योजना का विस्तार होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी और अधिक गति आने की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि महिलाओं के हाथ में पैसा आने से स्थानीय बाजारों में मांग बढ़ती है।

"लाड़ली बहनों को राशि हर माह नियमित रूप से बैंक खाते में भेजी जा रही है। जिन बहनों को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का लाभ अभी तक नहीं मिल सका है, अगले साल पात्रता के अनुसार उनके नाम भी सूची में जोड़े जाएंगे। सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।" — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी बड़े सुधार का दावा

लाडली बहना योजना के अलावा देवास के इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिक्षा और रोजगार से जुड़े कई अन्य अहम आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि राज्य सरकार के लगातार प्रयासों और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए भारी निवेश का नतीजा यह है कि प्राथमिक स्कूलों में बच्चों का ड्रॉप आउट रेट यानी पढ़ाई बीच में छोड़ने की दर अब पूरी तरह शून्य हो गई है। कभी यह दर 16 प्रतिशत हुआ करती थी, जिसे घटाकर जीरो पर लाना एक बड़ी प्रशासनिक सफलता मानी जा रही है।

इसके साथ ही मेधावी विद्यार्थियों के लिए लैपटॉप, स्कूटी, साइकिल, और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि सरकार शिक्षा के बजट को लगातार मजबूत कर रही है। वर्तमान में स्कूल शिक्षा का बजट 38 हजार करोड़ रुपये तय किया गया है, जो आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभा रहा है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए लगातार नए कदम उठाए जा रहे हैं।

रोजगार सृजन और सबसे कम बेरोजगारी दर पर जोर

युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के मोर्चे पर भी सरकार ने अपनी पीठ थपथपाई है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य के पुलिस विभाग में लगभग 18 हजार नए पदों पर भर्तियां की गई हैं, जिससे युवाओं को सरकारी सेवा में आने का बड़ा मौका मिला है। इसके अलावा, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSME सेक्टर के जरिए राज्य में करीब 1 करोड़ 20 लाख लोगों को रोजगार मिला है।

कार्यक्रम के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर देश के अन्य कई बड़े राज्यों की तुलना में सबसे कम है। सरकार का यह दावा आर्थिक मोर्चे पर उसकी नीतियों की सफलता को दर्शाता है। वड़नगर से वाराणसी तक निकाली जा रही बाइक सेवा यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव को भी बढ़ावा देने की बात कही। कुल मिलाकर, लाडली बहना योजना के विस्तार की घोषणा ने महिलाओं में नई उम्मीद जगाई है और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक और सामाजिक असर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।

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