त्योहारों से पहले रसोई गैस की मांग में तेजी, सरकार ने उठाया बड़ा कदम
भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही रसोई घरों में गैस की खपत तेजी से बढ़ने लगी है। दीपावली और अन्य बड़े उत्सवों के इस दौर में घरों में पकवान बनने और विशेष आयोजनों के कारण एलपीजी (LPG) की मांग स्वाभाविक रूप से ऊपर चली जाती है। हर साल इस समय गैस एजेंसियों पर दबाव बढ़ जाता है। इसे भांपते हुए देश की सरकारी तेल कंपनियों ने पहले ही कमर कस ली है और उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
खासतौर पर पश्चिम एशिया के पर्शियन गल्फ क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति की चेन प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे में वैश्विक संकट का असर यहां की सप्लाई पर भी पड़ना तय माना जा रहा था। हालांकि, समय रहते रणनीतिक कदम उठाते हुए सरकार और तेल विपणन कंपनियों ने आयात पर निर्भरता कम कर स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।
आम नागरिक के बजट और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि त्योहारी सीजन के दौरान रसोई गैस की एक बूंद की भी कमी न हो। इस दिशा में उठाए गए कदमों से न केवल बाजार में पर्याप्त स्टॉक बना रहेगा, बल्कि लोगों को लंबी वेटिंग लिस्ट या ब्लैक मार्केटिंग जैसी समस्याओं का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।
संबंधित खबरें
घरेलू रिफाइनरियों में रिकॉर्ड उत्पादन, अगस्त के मुकाबले 20 फीसदी की बढ़ोतरी
मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए भारत की सरकारी रिफाइनरियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में इस समय एलपीजी का घरेलू उत्पादन रोजाना लगभग 44,000 टन के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है। यदि इसकी तुलना पिछले महीने यानी अगस्त के औसत उत्पादन से की जाए, तो यह करीब 20 प्रतिशत अधिक है। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकारी तंत्र किसी भी आपात स्थिति या बाहरी संकट से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
विज्ञानी और तकनीकी दक्षता का उपयोग करते हुए रिफाइनरियों ने अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग किया है। कच्चे तेल के शोधन के दौरान एलपीजी के निष्कर्षण को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि घरेलू बाजार की भूख को तुरंत शांत किया जा सके। जानकारों का मानना है कि जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल हो, तब इस तरह की आत्मनिर्भरता देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम साबित होती है।
इस बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता के बल पर तेल कंपनियां डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को दुरुस्त करने में जुटी हुई हैं। देश के छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक हर एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में उत्पादन और सप्लाई की रफ्तार को दोगुना कर दिया गया है। इसका सीधा फायदा अंतिम छोर पर खड़े उस उपभोक्ता को मिल रहा है, जिसे त्योहारों के दिनों में गैस सिलेंडर के लिए परेशान होना पड़ता था।
सिलेंडर बुकिंग के नियमों में राहत, 45 दिन की अवधि घटाकर अब की गई 25 दिन
आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि सरकार ने सिलेंडर दोबारा बुक करने की समय सीमा को फिर से कम कर दिया है। पिछले कुछ महीनों पहले ग्रामीण क्षेत्रों और चुनिंदा इलाकों में एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफिल की अवधि को बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया था, ताकि कालाबाजारी या अनावश्यक स्टॉक रखने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाई जा सके।
लेकिन अब जैसे ही घरेलू उत्पादन में उछाल आया है और सप्लाई चेन पटरी पर लौटी है, तेल कंपनियों ने इस नियम में संशोधन कर दिया है। वर्तमान में अब उपभोक्ता महज 25 दिनों के अंतराल पर ही अपना दूसरा सिलेंडर बुक कर सकेंगे। इस बदलाव से उन बड़े परिवारों या व्यावसायिक इकाइयों को विशेष राहत मिलेगी जहां गैस की खपत ज्यादा होती है।
उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि यह फैसला आम आदमी के रसोई बजट को स्थिर रखने में मददगार साबित होगा। बुकिंग विंडो छोटी होने से लोगों को बाजार में कृत्रिम कमी या किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे अपनी जरूरत के अनुसार आसानी से गैस मंगा सकेंगे।
वैश्विक ऊर्जा संकट और भारत की रणनीतिक तैयारी
भारत दुनिया में एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है। ऐतिहासिक रूप से अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा भारत पर्शियन गल्फ के देशों से मंगाता रहा है। लेकिन हालिया वर्षों में वैश्विक स्तर पर हुए संघर्षों और समुद्री मार्गों में आई बाधाओं ने आयातित ईंधन की कीमतों और आपूर्ति दोनों को अस्थिर कर दिया है। ओमान के सोहर बंदरगाह तथा अमेरिका और अफ्रीकी देशों से आने वाली खेप पर भी कभी-कभी लॉजिस्टिक कारणों से असर पड़ता है।
ऐसी परिस्थितियों से सबक लेते हुए भारत सरकार ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा नीति में बदलाव किया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात बिगड़ते हैं, घरेलू रिफाइनरियों को तुरंत उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए जाते हैं। हालांकि, पिछले साल की तुलना में इस साल औद्योगिक क्षेत्रों से एलपीजी की मांग में थोड़ी कमी जरूर आई है, क्योंकि युद्ध के दौर में उद्योगों ने अपने ईंधन के विकल्प बदल लिए थे और वे अभी पूरी तरह से पुरानी मांग के स्तर पर नहीं लौटे हैं।
"देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। त्योहारों के इस पावन अवसर पर हर घर की रसोई रोशन रहे, इसके लिए हमारी रिफाइनरियों ने रिकॉर्ड उत्पादन किया है और आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह चाक-चौबंद रखा गया है।"— ऊर्जा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी
सर्दियों के आगामी दिनों में भी सप्लाई बनाए रखने की पुख्ता तैयारी
विशेषज्ञों का आकलन है कि आने वाले सर्दियों के महीनों में एलपीजी की खपत में स्वाभाविक रूप से और अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ठंडे मौसम के दौरान पानी गर्म करने और अन्य घरेलू कार्यों के लिए गैस की मांग पूरे देश में बढ़ जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियां अभी से दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम कर रही हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि आने वाले हफ्तों में मांग का ग्राफ और ऊपर जाता है, तो घरेलू रिफाइनरियों के पास उत्पादन को और अधिक गति देने की क्षमता मौजूद है। इसके अलावा, रणनीतिक भंडारण (Strategic Reserves) को भी पर्याप्त स्तर पर बनाए रखा गया है ताकि किसी भी अचानक पैदा होने वाले संकट का तुरंत मुकाबला किया जा सके।
कुल मिलाकर, त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े देश के आम नागरिकों को इस बात से पूरी तरह आश्वस्त रहना चाहिए कि उनकी रसोई का बजट और गैस सिलेंडर की उपलब्धता पूरी तरह सुरक्षित हाथों में है। सरकार के इन समय पर उठाए गए कदमों से बाजार में स्थिरता बनी हुई है और जमाखोरों के मंसूबों पर पानी फेर दिया गया है।




