रसोई गैस ई-केवाईसी को लेकर उपभोक्ताओं में असमंजस
देशभर में इन दिनों रसोई गैस उपभोक्ताओं के बीच ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हर घर की रसोई से जुड़ा होने के कारण एलपीजी सिलेंडर से जुड़े नियम आम आदमी के बजट पर सीधा असर डालते हैं। ऐसे में जब से तेल कंपनियों ने बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया है, तब से जालसाजों और कुछ लापरवाह एजेंसियों द्वारा इसका गलत फायदा उठाने के मामले सामने आ रहे हैं। कई जगहों से ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि उपभोक्ताओं से इस सामान्य प्रक्रिया के नाम पर अवैध रूप से पैसे वसूले जा रहे हैं।
यह बेहद जरूरी है कि उपभोक्ता इस बात को अच्छी तरह समझ लें कि यह पूरी प्रक्रिया किस तरह से काम करती है। यदि आपके घर पर गैस सिलेंडर पहुंचाने वाला डिलीवरी मैन या आपकी गैस एजेंसी का कोई कर्मचारी ई-केवाईसी के एवज में नकदी की मांग करता है, तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने इस संबंध में बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य आम जनता को किसी भी तरह की आर्थिक ठगी से बचाना है।
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पूरी तरह मुफ्त है सेवा, एक भी रुपया देने की जरूरत नहीं
पेट्रोलियम कंपनियों और उपभोक्ता मामलों के जानकारों ने साफ कर दिया है कि एलपीजी कनेक्शन की ई-केवाईसी के लिए एक भी पैसा चुकाने का कोई प्रावधान नहीं है। यह पूरी प्रक्रिया सरकार के डिजिटल इनिशिएटिव के तहत आती है और इसे उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह निशुल्क रखा गया है। इसके बावजूद, मैदानी स्तर पर जागरूकता की कमी के कारण कई लोग बिचौलियों या मनमाने तरीके से पैसे मांगने वालों के झांसे में आ जाते हैं।
उपभोक्ताओं को यह समझना होगा कि किसी भी स्तर पर किसी भी व्यक्ति को सत्यापन के नाम पर शुल्क देना गैरकानूनी है। अगर कोई वितरक या डिलीवरी कर्मी यह दावा करता है कि पोर्टल पर नाम दर्ज कराने या बायोमेट्रिक अपडेट करने का कोई चार्ज लगता है, तो वह सरासर झूठ बोल रहा है। ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं को न केवल पैसे देने से मना करना चाहिए, बल्कि तुरंत प्रशासनिक या आधिकारिक स्तर पर इसकी शिकायत भी दर्ज करानी चाहिए ताकि अन्य लोग भी इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकें।
आखिर क्या है ई-केवाईसी की अंतिम तारीख और इसके नियम
रसोई गैस ग्राहकों के लिए आधार आधारित बॉयोमेट्रिक ई-केवाईसी पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए सरकार की ओर से पर्याप्त समय दिया गया है और वर्तमान में इसकी अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 तय की गई है। इस डेडलाइन तक सभी उपभोक्ताओं को अपनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यदि तय सीमा के भीतर यह सत्यापन नहीं कराया जाता है, तो भविष्य में गैस बुकिंग या सब्सिडी मिलने में बड़ी तकनीकी रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है।
खास तौर पर सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर का लाभ उठाने वाले परिवारों के लिए यह नियम और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि उपभोक्ता अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते इस प्रक्रिया को पूरा कर लें। हालांकि, इस अनिवार्यता का मतलब यह कतई नहीं है कि इसके लिए किसी को अपनी जेब ढीली करनी पड़े। यह प्रक्रिया उपभोक्ता की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए है, न कि किसी की कमाई का जरिया।
घर बैठे आसानी से ऐसे पूरी करें पूरी प्रक्रिया
आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब ई-केवाईसी की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया गया है। उपभोक्ताओं को अब लंबी लाइनों में लगने या घंटों अपनी गैस एजेंसी के चक्कर काटने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। आप अपने स्मार्टफोन के जरिए घर बैठे ही कुछ ही मिनटों में यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित गैस कंपनियों के मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा सकता है।
फेस ऑथेंटिकेशन (Face Authentication) तकनीक के आने से यह काम और भी आसान हो गया है। इसके लिए आपको अपने फोन में 'Aadhaar FaceRD' ऐप डाउनलोड करना होगा। ऐप पर दिए गए बेहद आसान और स्पष्ट निर्देशों का पालन करते हुए चेहरे का स्कैन पूरा करना होता है। जैसे ही आपका सत्यापन सफल होता है, आपकी ई-केवाईसी की प्रक्रिया स्वतः पूरी हो जाती है और आपको इसका डिजिटल कंफर्मेशन भी मिल जाता है।
अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ यहां करें शिकायत
यदि इसके बावजूद कोई गैस एजेंसी, वितरक या डिलीवरी स्टाफ आपसे पैसे की मांग करता है, तो आपको चुप बैठने की जरूरत नहीं है। सरकार ने इस तरह की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक समर्पित व्यवस्था बनाई है। उपभोक्ता सीधे तौर पर इसके खिलाफ आवाज उठा सकते हैं और आधिकारिक हेल्पलाइन नंबरों पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
"एलपीजी कनेक्शन की ई-केवाईसी पूरी तरह मुफ्त है। यदि कोई भी एजेंसी या डिलीवरी बॉय इसके नाम पर पैसे मांगता है, तो उपभोक्ता तुरंत टोल-फ्री नंबर 1800 2333 555 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।" — पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निर्देश
इस टोल-फ्री नंबर पर की गई शिकायत पर तेल कंपनियां तुरंत एक्शन लेती हैं। इसके अलावा, ग्राहक अपनी संबंधित गैस कंपनी (जैसे इंडेन, भारत गैस या एचपी) के आधिकारिक पोर्टल या कस्टमर केयर ईमेल के जरिए भी साक्ष्यों के साथ अपनी बात रख सकते हैं। सतर्कता ही इस प्रकार की धोखाधड़ी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।








