नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सऊदी अरब के रियाद और अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर हूती विद्रोहियों ने ड्रोन और मिसाइल से बड़े हमले किए हैं। इन घातक हमलों में तीन आम नागरिकों की मौत हो गई है जबकि 36 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यमन युद्ध की यह भयंकर आग अब सीधे तौर पर सऊदी अरब की आम जनता और नागरिक बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले रही है। शुरुआती खबरों के अनुसार, इन हमलों के बाद सऊदी सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है और यमन में हूती ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है।
भारत सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद गंभीर रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि सऊदी अरब में नागरिक ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला देते हुए शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपील की है। नई दिल्ली से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि आम नागरिकों की जान लेना और उनके ठिकानों पर बमबारी करना मानवता के खिलाफ है। भारत हमेशा से हिंसा के रास्ते का विरोध करता रहा है और इस हमले से क्षेत्र में शांति बहाली के प्रयासों को बड़ा झटका लगा है।
नागरिक ठिकानों पर हमलों से दुनिया चिंतित
हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नींद उड़ा दी है। रियाद और अन्य एयरपोर्ट्स पर जिस तरह से ड्रोन और मिसाइल दागे गए हैं, उससे हवाई सफर की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले के तुरंत बाद हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। हालांकि सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया था, लेकिन तब तक कई लोग इसकी चपेट में आ चुके थे। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद खाड़ी देशों में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं।
सऊदी अरब की तरफ से भी इन हमलों का कड़ा जवाब दिया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी सेना ने पलटवार करते हुए यमन के भीतर हूती विद्रोहियों के करीब 80 से ज्यादा ठिकानों पर भारी एयरस्ट्राइक की है। इस जवाबी कार्रवाई से यमन में हालात और ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है। युद्ध के इस नए दौर से वहां रह रहे विदेशी नागरिकों और कामगारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ने लगी हैं। खाड़ी के इस खूनी संघर्ष का असर अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
भारत का कड़ा रुख और कूटनीतिक संदेश
भारत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भारत के लाखों नागरिक काम करते हैं। सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा भारत सरकार की पहली प्राथमिकता रही है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की हिंसा से वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। यही वजह है कि भारत ने बिना किसी हिचकिचाहट के इन हमलों की निंदा की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत का यह स्पष्ट रुख क्षेत्रीय शांति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को साफ तौर पर दिखाता है।
जमीनी स्तर पर हालात लगातार बदल रहे हैं और दोनों तरफ से हमलों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हूती विद्रोहियों की ओर से लगातार आधुनिक हथियारों और ड्रोन्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे सऊदी रक्षा प्रणाली की भी कड़ी परीक्षा हो रही है। आने वाले दिनों में यदि इन हमलों पर लगाम नहीं लगी तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया अपडेट आएगा, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
सुरक्षा व्यवस्था और आगे का रास्ता
हवाई अड्डों पर हुए इन हमलों के बाद खाड़ी देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को कई गुना बढ़ा दिया है। एयरस्पेस की सुरक्षा के लिए आधुनिक डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे को हवा में ही नष्ट किया जा सके। इसके बावजूद, आम नागरिकों के मन में डर का माहौल बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय संगठन संयुक्त राष्ट्र ने भी दोनों पक्षों से तत्काल युद्धविराम की अपील की है ताकि आम लोगों की जान बचाई जा सके। भारत समेत दुनिया के तमाम बड़े देश इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।





