प्रशासनिक गलियारों में बड़ा बदलाव, मंदीप भंडारी को सौंपी गई सीबीएसई की अहम कमान
केंद्र सरकार ने देश की प्रशासनिक व्यवस्था और नौकरशाही में बड़ा फेरबदल करते हुए कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के विभागों में फेरबदल किया है। इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत सबसे अहम नियुक्ति केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई (CBSE) के नए चेयरपर्सन पद पर हुई है। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेशों के मुताबिक, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने मंदीप भंडारी को इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपने को अपनी मंजूरी दे दी है।
मंदीप भंडारी साल 2001 बैच के एजीएमयूटी कैडर के बेहद अनुभवी आईएएस अधिकारी हैं। अपनी इस नई जिम्मेदारी से ठीक पहले वे केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के प्रधान सचिव के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। शिक्षा व्यवस्था और बोर्ड के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए उनकी यह नियुक्ति काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि देश का यह सबसे बड़ा शैक्षणिक बोर्ड लगातार कई नई चुनौतियों और सुधारों के दौर से गुजर रहा है।
संबंधित खबरें
किसके पास था अब तक सीबीएसई का अतिरिक्त प्रभार और क्या रही वजह
मंदीप भंडारी की इस नियुक्ति से पहले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम के पास सीबीएसई चेयरपर्सन पद का अतिरिक्त प्रभार था। सीताराम को इस साल 2 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था और उसी दौरान उन्हें सीबीएसई प्रमुख का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया था। वे मूल रूप से इस साल 2 जून को सीबीएसई के प्रमुख बनाए गए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा बोर्ड में प्रशासनिक स्थिरता लाने के लिए अब एक पूर्णकालिक और नियमित चेयरपर्सन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। पूर्व में बोर्ड के कामकाज और मूल्यांकन प्रणालियों से जुड़े कुछ विवादों के बाद सरकार ने प्रशासनिक कसावट लाने की दिशा में यह कदम उठाया है। मंदीप भंडारी के आने से बोर्ड के नीतिगत फैसलों और परीक्षा सुधारों को एक नई गति मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से लेकर हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय तक बदले प्रमुख
सीबीएसई के अलावा केंद्र सरकार के इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल में देश के कई अन्य रणनीतिक विभागों के मुखिया भी बदले गए हैं। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के चेयरमैन के रूप में कार्यरत विपिन कुमार को अब ग्रामीण विकास विभाग में अतिरिक्त सचिव की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके अनुभव का लाभ ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही, हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय के महानिदेशक श्रीकांत नागुलापल्ली को भी नई भूमिका दी गई है। उन्हें अब व्यय विभाग में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। उनकी जगह कर्नाटक कैडर के साल 2000 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वी. पोनुराज को नया हाइड्रोकार्बन महानिदेशक नियुक्त किया गया है। ऊर्जा और पेट्रोलियम क्षेत्र के लिहाज से यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण पद माना जाता है।
वित्त, इस्पात और उच्च शिक्षा मंत्रालय में भी हुआ अधिकारियों का फेरबदल
नौकरशाही में किए गए इन ताजा बदलावों की सूची काफी लंबी है जिसमें देश के वित्तीय और सामाजिक विकास से जुड़े मंत्रालय भी शामिल हैं। सरिता चौहान चंद को इस्पात मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार की दोहरी जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, आनंद सिंह को आर्थिक मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है, जो देश की आर्थिक नीतियों के निर्धारण में अहम भूमिका निभाएंगे।
कार्मिक मामलों से जुड़े विभाग में भी बदलाव देखने को मिले हैं। पी. हेमलता को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। इसके अलावा, पीयूष सिंह को बिजली मंत्रालय और अंकिता मिश्रा बुंदेला को उच्च शिक्षा विभाग में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय में मनीषा सेनसरमा को अतिरिक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि युवाओं के कौशल विकास के कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
विशेषज्ञों की नजर में इस प्रशासनिक फेरबदल के मायने
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह फेरबदल पूरी तरह से कामकाज में कसावट लाने और विकास योजनाओं को रफ्तार देने के उद्देश्य से किया गया है। अनुभवी अधिकारियों को अहम मंत्रालयों और विभागों में तैनात करके सरकार ने यह संदेश दिया है कि प्रशासनिक दक्षता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा क्षेत्र से लेकर बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र तक, इन सभी विभागों में नए अधिकारियों के आने से नीतियों के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
"देश की प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरस्त रखने और विभिन्न महकमों में अनुभवी हाथों को कमान सौंपने के लिए इस तरह के फेरबदल नियमित प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इससे शासन की गुणवत्ता में सुधार होता है।" — वरिष्ठ प्रशासनिक विश्लेषक
आगामी दिनों में इन तमाम वरिष्ठ अधिकारियों के अपने-अपने नए विभागों का कार्यभार संभालने के बाद सरकारी कामकाज में और अधिक पारदर्शिता और गति देखने को मिलने की संभावना है। आम जनता और देश के छात्रों से जुड़े सीबीएसई जैसे संस्थान के लिए मंदीप भंडारी का अनुभव कितना कारगर साबित होता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।








