किसानों के लिए खुशखबरी: रबी फसलों के समर्थन मूल्य में बड़ा बदलाव
देशभर के अन्नदाताओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित अहम कैबिनेट बैठक में रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP में बढ़ोतरी करने पर औपचारिक मुहर लगा दी गई है। सरकार के इस कदम से कृषि क्षेत्र से जुड़े करोड़ों परिवारों को आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हर साल बुवाई के सीजन से पहले सरकार द्वारा तय किए जाने वाले इन नए दामों से किसानों को बाजार में उनकी मेहनत का उचित और लाभकारी मूल्य मिल सकेगा।
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए यह बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम जैसी छह प्रमुख फसलों के समर्थन मूल्य में इजाफा किया गया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह फैसला न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा, बल्कि देश में खाद्यान्न उत्पादन को भी एक नया प्रोत्साहन मिलेगा।
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गेहूं का नया MSP तय, किसानों को मिलेगा बंपर मुनाफा
सबसे महत्वपूर्ण फैसले के तहत देश की मुख्य रबी फसल माने जाने वाले गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सरकार ने गेहूं के MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद नया समर्थन मूल्य बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इससे पिछले सीजन में किसानों को गेहूं के लिए 2,585 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा था। सरकार की ओर से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर पर्याप्त मार्जिन मिले।
आंकड़ों के मुताबिक, गेहूं की औसत उत्पादन लागत करीब 1,264 रुपये प्रति क्विंटल आती है, जिसके मुकाबले सरकार अब किसानों को दोगुने से भी ज्यादा दाम यानी 2,610 रुपये प्रति क्विंटल दे रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस सीजन में करीब 324 लाख टन रबी फसलों की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जिसके एवज में किसानों के खातों में सीधे तौर पर 90,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहुंचाई जाएगी।
सरसों, चना और जौ समेत इन फसलों के भी बढ़े दाम
सरकार ने केवल गेहूं ही नहीं, बल्कि अन्य पांच महत्वपूर्ण रबी फसलों के दामों में भी बंपर इजाफा किया है। तिलहन वर्ग की प्रमुख फसल सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6,200 रुपये से बढ़ाकर 6,613 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसके अलावा कुसुम के समर्थन मूल्य में भी भारी बढ़ोतरी की गई है, जो अब 6,540 रुपये से बढ़कर 7,215 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। दलहन फसलों की बात करें तो चने का MSP 5,875 रुपये से बढ़ाकर 5,958 रुपये और मसूर का MSP 7,000 रुपये से बढ़ाकर 7,390 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसके अलावा जौ का नया समर्थन मूल्य 2,286 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
"सरकार का मुख्य उद्देश्य हमेशा से किसानों को उनकी लागत का उचित रिटर्न देना और देश में खाद्यान्न सुरक्षा को मजबूत करना रहा है। रबी फसलों के नए समर्थन मूल्य इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होंगे।"— केंद्रीय कृषि मंत्रालय, आधिकारिक बयान
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भविष्य की कृषि नीतियां
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में राज्यों के साथ हुई बैठकों में यह बात स्पष्ट की थी कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती-किसानी के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी है। खरीफ सीजन के दौरान कई क्षेत्रों में सूखे और पानी की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसे ध्यान में रखते हुए रबी सीजन की कार्ययोजना बहुत सोच-समझकर तैयार की गई है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों को आधार बनाकर ही इन तमाम फसलों के नए रेट तय किए गए हैं, जिसमें घरेलू और वैश्विक बाजार के रुझानों के साथ-साथ मौसम संबंधी जोखिमों को भी पूरी तरह शामिल किया गया है।
सरकार की इन नीतियों का मुख्य लक्ष्य किसानों को बाजार की अनिश्चितताओं से बचाना और उन्हें खेती के प्रति और अधिक प्रोत्साहित करना है। आने वाले दिनों में जब रबी फसलों की कटाई और सरकारी खरीद का दौर शुरू होगा, तो इन बढ़ी हुई दरों का सीधा सकारात्मक असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।








