संसद परिसर में सियासी तल्खी के बीच दिखा अनूठा और सौहार्दपूर्ण नजारा
भारतीय राजनीति में अक्सर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे जुबानी हमले और बयानबाजी देखने को मिलती है। चुनाव आयोग से लेकर तमाम नीतिगत मुद्दों पर सियासी पारा हमेशा हाई रहता है। हालांकि, इन तमाम राजनीतिक उठापटक और वैचारिक मतभेदों के बीच शुक्रवार को संसद भवन परिसर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मौका था राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती का, जहां देश के शीर्ष नेताओं ने दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर एक-दूसरे से मुलाकात की और श्रद्धांजलि अर्पित की।
संसद भवन परिसर में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की chairperson सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक साथ नजर आए। इस दौरान राजनीतिक कटुता की सभी दीवारें कुछ पलों के लिए ढीति नजर आईं और नेताओं के बीच शिष्टाचार का एक बेहतरीन उदाहरण देखने को मिला। इस मिलन की गवाह बनी वह तस्वीरें और वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर भी काफी तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिन पर आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच संक्षिप्त बातचीत भी हुई। इसके साथ ही राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मौजूदगी में अन्य दिग्गजों ने भी एक-दूसरे का अभिवादन स्वीकार किया। राजनीतिक गलियारों में इस छोटी सी मुलाकात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन लोकतंत्र की खूबसूरती का यह पल इस बात का गवाह है कि वैचारिक विरोध के बावजूद राष्ट्रीय पर्वों और महापुरुषों की जयंतियों पर राजनीतिक दल आपसी आदर बनाए रखने में विश्वास रखते हैं।
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दिग्गजों की मौजूदगी और श्रद्धांजलि का सिलसिला
महात्मा गांधी की 157वीं और लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती के इस राष्ट्रीय अवसर पर देश के तमाम बड़े नेता संसद भवन के समकालीन परिसर में एकत्रित हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले राष्ट्रपिता और शास्त्री जी को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने भी बापू और शास्त्री जी के चरणों में पुष्प अर्पित किए।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने देश के नाम अपने संदेश में कहा कि महात्मा गांधी का शाश्वत संदेश एक बेहतर समाज और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में देश का मार्गदर्शन करता रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बापू का पूरा जीवन सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा की एक ऐसी अनूठी मिसाल है, जो इतिहास के हर दौर में मानवता को सही रास्ता दिखाती रही है। प्रधानमंत्री ने इस दौरान वहां मौजूद स्कूली बच्चों से भी मुलाकात की और उनके साथ हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत की, जिससे वहां का माहौल और भी खुशनुमा हो गया।
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और कई अन्य वरिष्ठ मंत्री भी इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में दोनों महान विभूतियों के देश के प्रति दिए गए अमूल्य योगदान को याद किया और उनके बताए हुए रास्तों पर चलने का संकल्प दोहराया। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं में राष्ट्रीय पर्वों का महत्व सर्वोच्च स्थान रखता है, जहां राजनीतिक मतभेद पीछे छूट जाते हैं।
देशभर में गांधी जयंती पर कार्यक्रमों की धूम
राजधानी दिल्ली के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में भी महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती को बेहद धूमधाम और पारंपरिक तरीके से मनाया गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गांधी जयंती के विशेष अवसर पर एक बड़ा ऐलान करते हुए प्रदेशवासियों को एक सौगात दी। उन्होंने घोषणा की कि राज्य में खादी के कपड़ों पर आगामी 30 जनवरी 2027 तक 25 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी केवल एक वस्त्र नहीं बल्कि स्वदेशी का एक सशक्त मंत्र है, जिसे अपनाकर हम देश के बुनकरों और हस्तशिल्पियों के हुनर को सम्मान दे सकते हैं।
दूसरी ओर, झारखंड की राजधानी रांची में मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका में भी एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों ने राष्ट्रपिता की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। इसके साथ ही धर्मशाला में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) की ओर से भी गांधी जयंती को बड़े पैमाने पर मनाया गया, जहां तिब्बती नेतृत्व ने बापू के अहिंसा और शांतिपूर्ण संघर्ष के सिद्धांतों को याद करते हुए अपने अधिकारों की लड़ाई को अहिंसक मार्ग पर जारी रखने का संकल्प लिया।
विभिन्न तिब्बती नेताओं ने इस दौरान महात्मा गांधी के विचारों को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके संघर्ष के तरीके ने दुनिया भर के कई बड़े आंदोलनों को प्रेरित किया है, जिसमें नेल्सन मंडेला और मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे महान व्यक्तित्व शामिल हैं। देश के कोने-कोने से आए इन आयोजनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि महात्मा गांधी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और वैश्विक स्तर पर शांति के दूत के रूप में उन्हें पूरी दुनिया याद करती है।
सियासी सरगर्मी और आगामी राजनीतिक समीकरण
संसद भवन में भले ही इन नेताओं के बीच मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ने की तस्वीर सामने आई हो, लेकिन इसके ठीक इतर देश का राजनीतिक माहौल काफी गर्म चल रहा है। पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग, मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (SIR) और अन्य चुनावी मुद्दों को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार सत्ता पक्ष पर विभिन्न मोर्चों पर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं और गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस पर पलटवार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि विपक्षी दल केवल राजनीतिक लाभ के लिए अनावश्यक रूप से संवैधानिक संस्थाओं को विवादों में घसीटने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा नेताओं का तर्क है कि यदि चुनावी प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ी होती, तो विभिन्न राज्यों में चुनाव परिणाम विपक्ष के पक्ष में कैसे आते। इन तीखे सियासी हमलों के बीच संसद भवन के परिसर में नेताओं का यह शिष्टाचार भले ही कुछ पलों का रहा हो, लेकिन इसने राजनीतिक पंडितों को चर्चा का एक नया विषय जरूर दे दिया है।
"महात्मा गांधी का पूरा जीवन सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा की एक ऐसी मिसाल है, जो देश के हर दौर में एक बेहतर समाज और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा।"
— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत
निष्कर्ष और आगे की राजनीतिक दिशा
संसद भवन परिसर से सामने आई यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि भारतीय लोकतंत्र की जड़े कितनी गहरी हैं। वैचारिक मतभेद और तीखी राजनीतिक बयानबाजी अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्रीय पर्वों और महापुरुषों के सम्मान के मंच पर देश के शीर्ष नेता आपसी सौहार्द का परिचय देना नहीं भूलते। आने वाले दिनों में संसद के सत्रों और राजनीतिक मंचों पर भले ही सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस का सिलसिला जारी रहे, लेकिन यह वीडियो इस बात का प्रमाण है कि व्यक्तिगत और सार्वजनिक शिष्टाचार की परंपराएं आज भी जीवित हैं। देश की जनता भी यही उम्मीद करती है कि राजनीतिक दल जनहित के मुद्दों पर इसी प्रकार परिपक्वता का परिचय दें और देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाएं।








