उत्तर-दक्षिण की राजनीति पर तेलंगाना सीएम का विवादित बयान
देश की सियासत में एक बार फिर धार्मिक प्रतीकों और आस्था को लेकर बड़ा घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस शासित तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने उत्तर भारत और दक्षिण भारत में राजनीतिक दलों के प्रभाव को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिससे विपक्षी खेमे और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री रेड्डी ने यह समझाने की कोशिश की थी कि आखिर कांग्रेस पार्टी दक्षिण भारतीय राज्यों में इतनी मजबूत क्यों है, जबकि उत्तर और पूर्वी भारत के कई राज्यों में उसे वैसी पकड़ हासिल करने में संघर्ष करना पड़ता है।
अपनी बात को स्पष्ट करते हुए उन्होंने भगवान राम और भगवान शिव के बीच तुलनात्मक उदाहरण दिए। उनके इन तर्कों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। भाजपा ने इसे सीधे तौर पर सनातन आस्था और भगवानों के बीच राजनीतिक लकीर खींचने का कुप्रयास करार दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से देश में वैचारिक ध्रुवीकरण और तेज हो सकता है, क्योंकि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर जनता की प्रतिक्रिया हमेशा तीखी रही है.
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शिव और राम को लेकर क्या बोले मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी?
एक सार्वजनिक मंच पर चर्चा के दौरान रेवंत रेड्डी ने दावा किया कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं में क्षेत्र के अनुसार अंतर है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में भगवान राम की पूजा विशेष रूप से की जाती है, जबकि दक्षिण भारत में भगवान शिव के उपासकों की संख्या अधिक है। उन्होंने खुद को और दक्षिण के लोगों को द्रविड़ संस्कृति से जोड़ा और उत्तर भारत को आर्य परंपरा का हिस्सा बताया।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा ने राजनीतिक लाभ के लिए भगवान राम की छवि को अपने पाले में कर लिया है। मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य भाजपा नेता अपने भाषणों में 'हर हर महादेव' का उद्घोष क्यों नहीं करते, बल्कि वे केवल 'जय श्री राम' का नारा लगाते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि भगवान शिव गरीबों के देवता हैं जबकि भगवान राम अमीरों के भगवान माने जाते हैं और भाजपा मूल रूप से अमीरों की पार्टी है।
भाजपा नेताओं का तीखा पलटवार, गिरिराज सिंह ने दी चेतावनी
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के इस बयान के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता आक्रामक हो गए। केंद्रीय कपड़ा मंत्री और बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह ने रेवंत रेड्डी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी तुष्टीकरण की राजनीति के तहत हमेशा से सनातन संस्कृति और हिंदुओं को आपस में बांटने का काम करती रही है। उन्होंने कहा कि रेड्डी को सनातन धर्म के इतिहास और पुराणों का जरा भी ज्ञान नहीं है।
"कांग्रेस पार्टी की नीति हमेशा से तुष्टीकरण की रही है और अब उनके नेता भगवानों के बीच भी भेद पैदा कर रहे हैं। रेवंत रेड्डी को शायद यह नहीं पता कि रामेश्वरम में भगवान शिव के शिवलिंग की स्थापना खुद भगवान राम ने की थी। भगवान राम और शिव एक-दूसरे के आराध्य हैं। सनातन को बांटने वाले ऐसे बयानों का देश की जनता करारा जवाब देगी।" — गिरिराज सिंह, केंद्रीय मंत्री
इसके अलावा बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने भी इस बयान की कड़ी आलोचना की है। शाहनवाज हुसैन ने कहा कि कांग्रेस के नेता जानबूझकर ऐसे बयान देते हैं जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि समाज को खंडित करने वाली इस प्रकार की बयानबाजी से कांग्रेस को आने वाले चुनावों में भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
चुनाव आयोग और एसआईआर प्रक्रिया पर भी घमासान
धार्मिक बयानों के साथ-साथ तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने देश की चुनावी व्यवस्था और निर्वाचन आयोग पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों से एक साझा मंच पर आने की अपील की है। रेड्डी का सुझाव है कि विपक्षी नेताओं को ऐतिहासिक 'साइमन गो बैक' आंदोलन की तर्ज पर एकजुट होकर एक बड़ा देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करना चाहिए।
इस कड़ी में देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। हाल ही में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठकों और विपक्षी दलों के प्रदर्शनों के दौरान जयपुर, पटना, लखनऊ और श्रीनगर जैसे शहरों में जोरदार सियासी गतिविधियां देखने को मिली हैं। विपक्ष जहां चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इन बयानों के जरिए कांग्रेस को लगातार घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और अधिक तूल पकड़ सकता है।







