राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ाने वाला बयान
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाने वाले नितेश राणे ने एक बार फिर देश की राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। पत्रकारों के साथ एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने लोकसभा चुनाव के परिणामों और पार्टी की रणनीतियों पर खुलकर बात की। राणे ने विपक्ष के उन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें सत्तारूढ़ दल पर चुनावी प्रक्रियाओं में हेरफेर करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में चुनावी सुधारों और मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण को लेकर सियासत गरमाई हुई है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए नितेश राणे ने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी वास्तव में चुनावी प्रबंधन या जोड़-तोड़ की राजनीति पर भरोसा करती, तो साल 200 के आंकड़े को पार कर पाना विपक्षी दलों के लिए असंभव हो जाता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पार्टी चुनाव मैनेज करती, तो सीटों का यह आंकड़ा 240 पर सिमटने के बजाय सीधे 400 के पार पहुंच जाता। राणे के इस तीखे बयान ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और इसके दूरगामी राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।
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मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर विपक्ष को घेरा
देशभर में इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर तीखी बयानबाजी चल रही है। असदुद्दीन ओवैसी समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं और इसे लेकर सरकार को घेरा है। इन तमाम आलोचनाओं का जवाब देते हुए नितेश राणे ने दो टूक कहा कि भारत के लोकतंत्र में देश की सरकार चुनने और अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अधिकार केवल और केवल भारतीय नागरिकों के पास ही होना चाहिए। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि आखिर मतदाता सूचियों से अपात्र और फर्जी लोगों के नाम बाहर करने की इस पारदर्शी प्रक्रिया को एक बड़ा षड्यंत्र क्यों करार दिया जा रहा है।
राणे ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे चुनावी लाभ के लिए देश की सुरक्षा और संप्रभुता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे लोगों ने भी अपने मतों का प्रयोग किया था जो भारत के मूल नागरिक नहीं हैं। उनके अनुसार, रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम मतदाता सूचियों में शामिल थे, जिन्होंने चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की। हालांकि, जब इन अवैध प्रवासियों के नाम सूचियों से हटाने का अभियान चलाया जाता है, तो विपक्ष इसका पुरजोर विरोध करने लगता है।
विपक्षी दलों की भाषा पर खड़े किए गंभीर सवाल
कांग्रेस पार्टी, असदुद्दीन ओवैसी और महाराष्ट्र के ठाकरे बंधुओं पर सीधा हमला बोलते हुए भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि इन तमाम नेताओं के बयान देशहित में नहीं बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान की कार्यशैली और भाषा से मेल खाते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब भी देश को मजबूत करने या आंतरिक सुरक्षा को दुरुस्त करने के लिए कोई सख्त कदम उठाया जाता है, तो विपक्ष को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया से इन्हें किस बात का डर सता रहा है, यह जनता के सामने आना चाहिए।
उन्होंने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लगातार उठ रहे सवालों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। राणे ने स्पष्ट किया कि जब विपक्षी दल किसी राज्य या चुनाव में जीत हासिल करते हैं, तब उन्हें चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कभी कोई संदेह नहीं होता। लेकिन जैसे ही भाजपा या उसके सहयोगियों को चुनावी मैदान में सफलता मिलती है, तुरंत आयोग की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है। यह दोहरे मापदंड की राजनीति है, जिसे देश की जनता भली-भांति समझती है।
पॉक्सो कानून के फैसले का किया जोरदार स्वागत
राजनीतिक बहसों के अलावा, नितेश राणे ने बाल यौन अपराध संरक्षण कानून यानी पॉक्सो (POCSO) अधिनियम को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने बच्चियों और पीड़िताओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जो रुख अपनाया है, वह सराहनीय है। समाज में हमारी बेटियों और बहनों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और इस दिशा में न्यायपालिका का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है।
"पॉक्सो कानून की प्राथमिकता को लेकर अदालत का रुख हमारी बेटियों और बहनों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस फैसले से बच्चियों का भविष्य सुरक्षित करने में मदद मिलेगी, और हम इसका तहे दिल से स्वागत करते हैं।" — नितेश राणे, मंत्री, महाराष्ट्र सरकार
अंत में उन्होंने महाराष्ट्र में पार्टी के प्रदर्शन और भविष्य की रणनीतियों पर बात करते हुए कहा कि राज्य में पार्टी को जो भी सफलता मिली है, वह किसी प्रबंधन का परिणाम नहीं बल्कि हमारे कर्मठ कार्यकर्ताओं की मेहनत, जनता के अटूट विश्वास और हिंदुत्ववादी विचारों की जीत है। उन्होंने दोहराया कि विपक्षी दल अपनी हार की खीझ मिटाने के लिए इस तरह के अनर्गल बयान दे रहे हैं, लेकिन जनता सच्चाई से पूरी तरह वाकिफ है।







