ऑनलाइन होटल बुकिंग का झांसा: जब सपनों की छुट्टी बन गई जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव
आज के डिजिटल दौर में देश के करोड़ों लोग छुट्टियों की योजना बनाने के लिए ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल्स और ऐप्स का अंधाधुंध इस्तेमाल करते हैं। होटल की तस्वीरें, लोकेशन और लुभावने डिस्काउंट देखकर लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे अग्रिम भुगतान कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप जिस होटल के नाम पर पैसे चुका रहे हैं, वो जमीन पर वजूद ही न रखता हो? अगर आप पैसे देकर अपने परिवार के साथ किसी पर्यटन स्थल पर पहुंचें और वहां वह होटल गायब मिले, तो आपकी क्या हालत होगी?
पंजाब के गुरदासपुर से सामने आया एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। एक हंसता-खेलता परिवार जब कश्मीर की वादियों में छुट्टियां मनाने पहुंचा, तो उसे ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म की बड़ी लापरवाही के कारण भीषण ठंड और खुले आसमान के नीचे प्रताड़ना झेलनी पड़ी। इस मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल्स की जवाबदेही और उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद उपभोक्ता आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है।
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श्रीनगर से लेकर गुलमर्ग तक: फर्जीवाड़े की ऐसी दास्तान जो उड़ा दे होश
पीड़ित परिवार के मुखिया राजेश चौहान ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ कश्मीर घूमने का प्लान बनाया था। इसके लिए उन्होंने देश के जाने-माने ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म 'मेकमायट्रिप' (MakeMyTrip) के जरिए होटलों की बुकिंग की थी। प्लान के मुताबिक, परिवार को 27 से 28 दिसंबर के दौरान श्रीनगर के एक होटल 'होटल हेरिटेज रोज इन' (Hotel Heritage Rose Inn) में ठहरना था, जिसके लिए उन्होंने 5,788 रुपये ऑनलाइन चुकाए थे। इसके ठीक अगले दिन यानी 28 से 29 दिसंबर के लिए गुलमर्ग में 'होटल एप्पल ट्री रिसॉर्ट्स' (Hotel Apple Tree Resorts) के दो कमरे बुक किए गए थे, जिसके एवज में 12,987 रुपये का भुगतान किया गया था।
परिवार जब निर्धारित तारीख पर श्रीनगर पहुंचा और बुकिंग वाउचर में दी गई लोकेशन पर होटल की तलाश शुरू की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस जगह पर होटल होने का दावा किया गया था, वहां कोई होटल था ही नहीं। वहां केवल एक सामान्य प्राइवेट होमस्टे चल रहा था, जिसका बुकिंग से कोई लेना-देना नहीं था। इसके बाद जब परिवार अगले दिन गुलमर्ग पहुंचा, तो वहां भी स्थिति और ज्यादा भयानक निकली। गुलमर्ग में बुक किया गया दूसरा होटल भी अपनी तय जगह पर पूरी तरह नदारद था।
-4 डिग्री तापमान और बर्फीला तूफान: कार के अंदर गुजारनी पड़ी पूरी रात
स्थिति तब और अधिक भयावह हो गई जब परिवार गुलमर्ग की बर्फीली वादियों में बिना किसी छत के फंस गया। उस वक्त बाहर का तापमान माइनस 4 डिग्री सेल्सियस (-4°C) तक लुढ़क चुका था और भारी बर्फबारी हो रही थी। चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर बिछी थी और कड़ाके की ठंड अपनी चरम सीमा पर थी। ऐसे कठिन और जानलेवा हालात में परिवार के पास सिर छुपाने के लिए कोई सुरक्षित कमरा नहीं बचा था, क्योंकि उनकी असली बुकिंग फर्जी साबित हो चुकी थी।
मजबूरी में परिवार को अपनी निजी कार के अंदर ही पूरी रात गुजारनी पड़ी। कड़ाके की ठंड और मानसिक तनाव के कारण बच्चों और परिवार की हालत खराब हो गई। इस भयानक अनुभव के चलते वे अपनी पहले से बुक की गई गोंडोला (केबल कार) की टिकटों का भी इस्तेमाल नहीं कर पाए और अगली ही सुबह बिना छुट्टियां मनाए वापस गुरदासपुर लौटने के लिए विवश हो गए।
कंपनी की दलील और उपभोक्ता आयोग का कड़ा फैसला
घटना के बाद पीड़ित परिवार ने मेकमायट्रिप के कस्टमर केयर से संपर्क कर मदद मांगी और अपना पैसा वापस करने की गुहार लगाई। लेकिन आरोप है कि कंपनी की तरफ से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब या मदद नहीं मिली। इसके बाद परिवार ने न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग के सामने सुनवाई के दौरान कंपनी ने अजीबोगरीब दलील दी। कंपनी ने कहा कि वह केवल एक ऑनलाइन एग्रीगेटर यानी बुकिंग सुविधा देने वाला माध्यम है और वह खुद होटल नहीं चलाती है। कंपनी का यह भी दावा था कि होटल की नॉन-रिफंडेबल पॉलिसी और 'नो शो' (ग्राहक के न पहुंचने) के नियम के तहत पैसे वापस नहीं किए जा सकते।
"जब ग्राहक ने सीधे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को पूरा भुगतान किया है और कंपनी ने कंफर्म बुकिंग वाउचर जारी किए हैं, तो फर्जी प्रॉपर्टी के मामले में प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। होटल था ही नहीं, तो 'नो शो' का सवाल ही पैदा नहीं होता।"— जिला उपभोक्ता आयोग, गुरदासपुर
उपभोक्ता आयोग ने कंपनी की इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब कोई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अपनी वेबसाइट पर होटल लिस्ट करता है और ग्राहक से पैसे वसूलता है, तो उसकी यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वह सही और वास्तविक सेवा मुहैया कराए। फर्जी या अस्तित्वहीन होटल के मामले में कंपनी अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकती।
मुआवजे का आदेश और ऑनलाइन बुकिंग के लिए जरूरी सबक
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने मेकमायट्रिप को सेवा में कमी, लापरवाही और अनुचित व्यावसायिक आचरण के लिए दोषी ठहराया। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि वह पीड़ित परिवार को कुल 48,775 रुपये का भुगतान करे। इस मुआवजे में बुकिंग के दौरान वसूले गए 18,775 रुपये रिफंड के रूप में शामिल हैं, जिस पर 25 दिसंबर से लेकर भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा मानसिक तनाव, शारीरिक उत्पीड़न के लिए 25,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 5,000 रुपये अलग से देने का निर्देश दिया गया है।
यह घटना देश के हर उस नागरिक के लिए एक बड़ा सबक है जो अक्सर इंटरनेट पर आंख मूंदकर ऑनलाइन बुकिंग कर लेते हैं। यात्रा पर निकलने से पहले केवल तस्वीरों और लुभावने विज्ञापनों पर भरोसा करने के बजाय होटल की सत्यता, उसकी सटीक लोकेशन और हालिया रिव्यू को अच्छी तरह क्रॉस-चेक कर लेना चाहिए। खासकर जब आप सर्दियों में पहाड़ी इलाकों की यात्रा पर जा रहे हों, तो स्थानीय संपर्कों और होटल के आधिकारिक नंबरों से बात करके पुख्ता जानकारी जरूर जुटा लें, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।



