मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का देशव्यापी हल्लाबोल
देश की राजधानी दिल्ली से लेकर वित्तीय राजधानी मुंबई तक राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और एसआईआर (SIR) के प्रावधानों के विरोध में विपक्षी दलों का प्रदर्शन लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विपक्षी नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। इस बीच, कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगातार कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।
हाल ही में मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क मैदान में हुए एक बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। पुलिस ने बिना किसी आधिकारिक अनुमति के सार्वजनिक स्थान पर भीड़ जुटाने और सभा करने के आरोप में आयोजकों समेत करीब पांच सौ अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए हैं। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और ज्यादा तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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मुंबई के शिवाजी पार्क में बिना अनुमति प्रदर्शन पर पुलिस का कड़ा एक्शन
मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन को लेकर आयोजकों और समर्थकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रमुख पदाधिकारियों ने दो अक्टूबर को शिवाजी पार्क में सभा आयोजित करने की विधिवत अनुमति मांगी थी, जिसे स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए खारिज कर दिया था। इसके बावजूद निर्धारित तिथि पर भारी संख्या में लोग मैदान में इकट्ठा हुए और जोरदार नारेबाजी की गई।
प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति के लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल किया गया और मुख्य सड़कों पर यातायात बाधित किया गया। इस मामले में शिवाजी पार्क पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के साथ-साथ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब इस पूरे आयोजन में शामिल लोगों की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि आयोजकों और प्रमुख चेहरों को कानूनी दायरे में लाया जा सके।
आयोजकों की दो टूक - दमनकारी नीतियों के आगे नहीं झुकेंगे
पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद सीजेपी के संस्थापकों और आयोजकों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। संस्थापकों का कहना है कि सरकार और पुलिस प्रशासन चाहे जितने मुकदमे दर्ज कर ले, लेकिन लोकतंत्र को बचाने की यह लड़ाई किसी भी कीमत पर रोकी नहीं जाएगी। युवा नेतृत्व में चल रहा यह विरोध प्रदर्शन अपने निर्धारित मुद्दों पर आगे भी जारी रहेगा।
दूसरी तरफ, इस मामले में स्थानीय स्तर पर भी कानूनी शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। वकीलों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास किया गया था। इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों की कथित भागीदारी और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले ने भी तूल पकड़ लिया है, जिस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर तनाव, यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन और कड़ी सुरक्षा
मुंबई के अलावा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। जंतर-मंतर से लेकर चुनाव आयोग के मुख्य कार्यालय तक सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। एहतियात के तौर पर मार्गों पर भारी बैरिकेडिंग की गई है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 के दायरे को भी प्रशासन द्वारा और अधिक बढ़ा दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
शनिवार देर रात को दिल्ली की सड़कों पर उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला जब यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन के लिए उतरे। पुलिस ने जब प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाना शुरू किया, तो कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध किया। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि कार्यकर्ताओं ने पुलिस की बसों को घेर लिया और काफी मशक्कत के बाद अपने साथियों को हिरासत से छुड़ाने में कामयाब रहे। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प भी देखने को मिली।
विपक्षी नेताओं की तीखी बयानबाजी और इस्तीफे की मांग
कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपने तेवर और तीखे कर दिए हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 'इंडिया' गठबंधन देश भर में इस आंदोलन को और अधिक आक्रामक रूप देगा। उनका दावा है कि निष्पक्ष चुनाव प्रणाली को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।
"अगर मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से त्यागपत्र नहीं देते हैं, तो हमारा यह विरोध प्रदर्शन और अधिक व्यापक स्तर पर जारी रहेगा। यह लड़ाई तब तक थमेगी नहीं जब तक लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बहाल नहीं हो जाती।" — पी. चिदंबरम, वरिष्ठ कांग्रेस नेता
वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि सत्तारूढ़ दल और उससे जुड़े संगठन फॉर्म सात के जरिए चुनिंदा लोगों के नाम मतदाता सूची से कटवाने का षड्यंत्र रच रहे हैं। उनका आरोप है कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में देश के भीतर एनआरसी (NRC) जैसी प्रक्रिया को पिछले दरवाजे से लागू करने की तैयारी की जा रही है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
आंदोलन के दौरान एक बुजुर्ग की मौत से पसरा मातम
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर भी सामने आई है। सीजेपी के इस विरोध प्रदर्शन के दौरान लगभग 75 वर्ष के एक बुजुर्ग प्रतिभागी को अचानक दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ गया। आनन-फानन में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी सांसे थम गईं। इस आकस्मिक निधन से प्रदर्शनकारियों में भारी शोक की लहर दौड़ गई है। आयोजकों ने इसे लोकतंत्र के लिए संघर्ष करते हुए एक नागरिक की दुखद शहादत करार दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा देश की संसद से लेकर सड़क तक और अधिक तूल पकड़ सकता है। एक तरफ जहां विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े नियमों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और कानूनी एजेंसियां नियमों के उल्लंघन पर सख्ती बरतने के मूड में हैं। इस टकराव के बीच आम जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह राजनीतिक गतिरोध किस दिशा में आगे बढ़ता है।





