डूरंड लाइन (Durand Line) के उस पार से उठने वाला धुएं का गुबार अब केवल स्थानीय संघर्ष का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि यह दक्षिण एशिया की उस गहरी खड्ड को उजागर कर रहा है जो दशकों से कूटनीतिक विफलताओं और सैन्य अहंकार की भेंट चढ़ती आई है। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड ग्राउंड ज़ीरो रिपोर्टिंग और खुफिया इनपुट्स के विश्लेषण से यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन अब कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और बार-बार दोहराई जाने वाली सामरिक नीति बन चुका है।
इस साल का 11वां घातक हमला: क्या कहते हैं आंकड़े?
प्राप्त रिपोर्ट्स और हमारे क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी वायु सेना द्वारा अफगान सीमावर्ती इलाकों पर की गई हालिया बमबारी में कम से कम 9 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई है, जिनमें मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2024-25 के इस छोटे से अंतराल में यह इस तरह का 11वां हवाई हमला है। काबुल और इस्लामाबाद के बीच लगातार बढ़ती खटास के बीच इन हमलों ने आम नागरिकों को सबसे बड़ा निशाना बनाया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस पर गहरी चिंता जताई है, लेकिन कूटनीतिक मंचों पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
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घर के भीतर और बाहर एक साथ सुलगती आग
एक तरफ जहां पाकिस्तान अपनी सीमा से लगे अफगान इलाकों को निशाना बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके अपने घर के भीतर के हालात भी विस्फोटक बने हुए हैं। हाल ही में देश के भीतर कथित तौर पर आतंकवादियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में 28 लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं। यह विरोधाभास साफ दर्शाता है कि पाकिस्तानी सैन्य तंत्र अपनी आंतरिक विफलताओं और नियंत्रण खोते जा रहे सुरक्षा ढांचे का ठीकरा पड़ोसियों पर फोड़ने की कोशिश कर रहा है। अपनी ही जमीन पर सैन्य शक्ति का ऐसा खूनी प्रदर्शन देश की आंतरिक स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वैश्विक पटल पर बदलते समीकरण: मध्य पूर्व से लेकर यूक्रेन तक
इन क्षेत्रीय संघर्षों के बीच दुनिया की निगाहें बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हैं। अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व की ओर 9,000 सैनिकों और तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर को रवाना किए जाने से ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान की आशंकाएं तेज हो गई हैं। मध्य पूर्व में मंडराते युद्ध के बादल वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं। दूसरी ओर, रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भी कूटनीतिक बयानबाजी जारी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह बयान कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के 'अच्छे सुझाव' हैं, वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती मध्यस्थता की भूमिका को रेखांकित करता है।
भविष्य का असर और सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह बढ़ता सैन्य टकराव तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य विद्रोही गुटों को और अधिक आक्रामक बना सकता है। अफगानिस्तान की मौजूदा तालिबान सरकार ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर सीधा प्रहार बताते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। यदि सीमा पार यह हिंसा नहीं थमी, तो यह पूरा क्षेत्र एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की चपेट में आ सकता है, जिसके परिणाम न केवल दक्षिण एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए घातक होंगे।
"सीमा पार सैन्य कार्रवाई कभी भी स्थायी शांति का विकल्प नहीं हो सकती। जब तक कूटनीति के दरवाजे बंद करके गोलियों और बमों से संवाद स्थापित किया जाएगा, तब तक मासूमों का खून ऐसे ही बहता रहेगा।" - वरिष्ठ सामरिक विश्लेषक








