हर्रैया में पल्लवी पटेल का जोरदार सियासी हमला
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। सिराथू विधानसभा क्षेत्र से विधायक और अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने हाल ही में हर्रैया में आयोजित एक कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने देश के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई और सरकार की कार्यशैली पर कई बड़े सवाल खड़े किए। उनके इस तीखे तेवर से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पल्लवी पटेल ने कहा कि मौजूदा समय में देश के भीतर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की सुनियोजित कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो कोई भी हुक्मरानों की नीतियों पर सवाल उठाता है, उसकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएं और जनता से जुड़े मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखें।
इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे, जिन्होंने विधायक की बातों को गंभीरता से सुना। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों के जरिए विपक्षी दल जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पल्लवी पटेल का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब राज्य में आगामी सियासी समीकरणों को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
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नोटबंदी और कोरोना के बाद बढ़ा बेरोजगारी का संकट
अपने संबोधन के दौरान पल्लवी पटेल ने देश में बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और उसके बाद कोरोना महामारी ने देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की कमर तोड़ दी है। आज पढ़ा-लिखा युवा दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, लेकिन उसे रोजगार देने के बजाय शासन की तरफ से निराशाजनक सलाह दी जाती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि डिग्रियां हासिल करने वाले युवाओं को पकौड़े तलने की सीख देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
विधायक ने आगे कहा कि आज के दौर में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बाद हाथों में काम की जरूरत है। देश की बड़ी आबादी युवा है, जिसकी ऊर्जा का सही उपयोग करने में सरकारें नाकाम साबित हो रही हैं। रोजगार के नए अवसर सृजित करने के वादे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं और सरकारी विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इससे युवाओं के भविष्य पर एक बड़ा संकट मंडरा रहा है।
बेरोजगारी के इस दौर में युवाओं में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को विज्ञापनों की दुनिया से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत का सामना करना चाहिए। जब तक देश के युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिलेगा, तब तक देश का वास्तविक विकास संभव नहीं हो सकता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर उठाए सवाल
रोजगार के अलावा पल्लवी पटेल ने देश और प्रदेश की शिक्षा तथा स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आम आदमी के लिए सबसे बुनियादी जरूरतें शिक्षा और स्वास्थ्य हैं, लेकिन इनकी हालत लगातार बद से बदतर होती जा रही है। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की आधारभूत संरचना चरमरा चुकी है, जिससे गरीब जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण किया जा रहा है, जिसके कारण इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। महंगे इलाज और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को समय पर सही उपचार नहीं मिल पा रहा है। इसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में भी फीस लगातार बढ़ रही है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल संपन्न वर्ग के बच्चों तक सीमित होती जा रही है।
विधायक ने कहा कि सरकार को इन दोनों क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश करने की आवश्यकता है, ताकि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा मिल सके। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा नीतियां आम जनता के हित में न होकर कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने वाली हैं।
आर्थिक नीतियों और किसानों के कर्ज का मुद्दा
सरकार की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधते हुए अपना दल (कमेरावादी) की नेता ने कहा कि देश की वित्तीय व्यवस्था चंद बड़े पूंजीपतियों के इर्द-गिर्द घूम रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगधंधे चलाने वालों के हजारों-करोड़ों रुपये के कर्ज आसानी से माफ कर दिए जाते हैं, जबकि देश का पेट भरने वाला अन्नदाता बैंक के थोड़े से कर्ज के बोझ तले दबा रहता है।
पल्लवी पटेल ने कहा,
"देश का किसान दिन-रात मेहनत करके अन्न उपजाता है, लेकिन संकट के समय उसे राहत देने के बजाय उसके घर और खेत नीलाम करने की कार्रवाई की जाती है। यह दोहरी नीति इस व्यवस्था का सबसे बड़ा सच है जिसे अब जनता समझ चुकी है।"— पल्लवी पटेल, विधायक
किसानों की बदहाली का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लागत मूल्य न मिलने के कारण किसान कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर किए गए वादे अभी भी धरातल पर पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं, जिससे खेती किसानी लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है।
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का आह्वान
अपने भाषण के अंत में पल्लवी पटेल ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता के बीच जाएं और इन तमाम मुद्दों को मजबूती से उठाएं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत होती है और जब जनता जागरूक हो जाती है तो बड़ी से बड़ी सत्ता को भी उसकी आवाज सुननी पड़ती है। कार्यकर्ताओं को अन्याय और शोषण के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करनी होगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में जनता इन नीतियों का करारा जवाब देगी। इस कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए यह साफ हो गया है कि विपक्षी दल आने वाले समय में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में हैं। राजनीतिक सरगर्मी के बीच इस तरह के बयानों से राज्य का सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है।






