भारतीय रेल के सफर में सुरक्षा के तमाम दावों के बीच दिल दहला देने वाली एक बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है। रोजी-रोटी कमाने के लिए परदेस गए एक सीधे-सादे नौजवान को चलती गाड़ी में पहले तो बंधक बनाया गया, फिर उसके परिजनों से फोन पर चंद हजार रुपयों की फिरौती मांगी गई। जब हैवानियत की हद पार हो गई और पैसे नहीं मिले, तो आरोपी ने उस बेबस नौजवान के हाथ और पैर रस्सी से बांध दिए और उसे धड़धड़ाती चलती बोगी के दरवाजे से बाहर फेंक दिया। इस बर्बर घटना में गंभीर चोटें आने की वजह से युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। रेल पुलिस की विशेष जांच टीम ने तकनीकी पड़ताल और सुरागों के आधार पर मुख्य आरोपी को बनारस से गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
सफर के दौरान बिछाया गया खौफनाक जाल
मिली जानकारी के अनुसार, बिहार के वैशाली का रहने वाला 21 साल का नितिन कुमार हैदराबाद और बेंगलुरु में मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता था। महीनों की हाड़तोड़ मेहनत के बाद वह अपने घर लौटने के लिए दानापुर स्पेशल ट्रेन (गाड़ी संख्या 07091) में सवार हुआ था। नितिन के मन में घर पहुंचने और अपनों से मिलने की खुशी थी, लेकिन उसे तनिक भी भनक नहीं थी कि बोगी में ही मौत उसका इंतजार कर रही है।
ट्रेन जब अपने रास्ते पर आगे बढ़ रही थी, तभी बोगी में घूम रहे एक शातिर अपराधी की नजर सीधे-सादे नितिन पर पड़ी। आरोपी लगातार ऐसे अकेले या असहाय दिखने वाले यात्रियों की तलाश में रहता था, जिन्हें डरा-धमकाकर आसानी से लूटा जा सके। आरोपी धीरे-धीरे नितिन के करीब पहुंचा और बिना किसी ठोस वजह के उससे उलझने लगा। सफर कर रहे अन्य यात्रियों को पहले लगा कि यह कोई सामान्य कहासुनी है, लेकिन आरोपी का इरादा बेहद खौफनाक था।
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सिगरेट का बहाना, खाकी का रौब और दस हजार की फिरौती
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी किसी गिरोह के अंदाज में नहीं बल्कि अकेले ही खाकी का रौब दिखाकर वारदात करता था। उसने नितिन को सिगरेट पीने के झूठे आरोप में पकड़ लिया। कभी वह खुद को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का जवान बताता तो कभी जीआरपी और पुलिस का सिपाही बनकर गरीब मजदूर पर धौंस जमाने लगता। उसने नितिन को बुरी तरह धमकाया और मारपीट करते हुए उसे एक कोने में बंधक बना लिया।
इसके बाद आरोपी ने नितिन के मोबाइल से उसके घर वालों को फोन लगवाया। आरोपी ने परिजनों से साफ लहजे में कहा कि अगर अपने बेटे की सलामती चाहते हो तो तुरंत 10 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करो। घर में अचानक आए इस फोन से कोहराम मच गया। गरीब परिजन कुछ समझ पाते और पैसों का इंतजाम कर पाते, उससे पहले ही आरोपी का धैर्य जवाब दे गया। जब परिजनों की ओर से तुरंत पैसा नहीं भेजा गया, तो आरोपी वहशीपन पर उतर आया।
हाथ-पैर बांधकर चलती ट्रेन से धकेला, पटरी किनारे मिली लाश
पैसों की मांग पूरी न होते देख आरोपी ने क्रूरता की सारी सीमाएं लांघ दीं। उसने नितिन के हाथ और पैरों को मजबूती से बांध दिया ताकि वह भाग न सके और न ही किसी तरह का विरोध कर पाए। इसके बाद उसने असहाय नितिन को घसीटते हुए बोगी के गेट तक पहुंचाया और पूरी ताकत से बाहर पटरी की तरफ फेंक दिया। रफ्तार से दौड़ती ट्रेन से नीचे गिरने के कारण नितिन के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आईं और उसने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
उधर जब नितिन घर नहीं पहुंचा और परिजनों का उससे संपर्क पूरी तरह टूट गया, तो परिजनों में रोना-पीटना मच गया। अनहोनी की आशंका के बीच परिजन मुकेश राय ने तुरंत रेल थाने पहुंचकर मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अपहरण और फिरौती की धाराओं में केस दर्ज कर छानबीन शुरू की, तो पटरी किनारे से युवक का शव बरामद हुआ, जिसने पुलिस अधिकारियों के भी रोंगटे खड़े कर दिए।
सलाखों के पीछे पहुंचा शातिर, पहले भी दे चुका था ऐसी वारदात को अंजाम
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए रेल पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) कंचन कुमारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया। पुलिस टीम ने सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया। तकनीकी साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस आखिरकार बनारस पहुंची, जहां घेराबंदी करके आरोपी रोहित को दबोच लिया गया।
"पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना गुनाह पूरी तरह कबूल कर लिया है। उसने बताया कि किस तरह उसने पैसे के लालच में युवक को बंधक बनाया और फिर हाथ-पैर बांधकर चलती ट्रेन से नीचे धकेल दिया। आरोपी शातिर और आदतन अपराधी है।" — कंचन कुमारी, रेल पुलिस उपाधीक्षक
पुलिस रिकॉर्ड की पड़ताल में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि पकड़ा गया आरोपी रोहित कोई नया अपराधी नहीं है, बल्कि वह पहले भी इसी तरह की जानलेवा वारदातों को अंजाम दे चुका है। साल 2024 में भी उसने बक्सर इलाके के दो युवकों को इसी तरह चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया था। गनीमत रही थी कि उस घटना में दोनों युवकों की जान बच गई थी। उस मामले में रोहित को अदालत से सजा हुई थी, लेकिन जेल से छूटते ही उसने फिर से ट्रेनों में वही खूनी खेल शुरू कर दिया।
स्पीडी ट्रायल की तैयारी और रेलवे सुरक्षा पर खड़े गंभीर सवाल
रेल डीएसपी ने स्पष्ट किया है कि पुलिस इस मामले में मजबूत चार्जशीट तैयार कर रही है और अदालत में स्पीडी ट्रायल चलाकर आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग करेगी, ताकि ऐसे दरिंदे को समाज में दोबारा खुला घूमने का मौका न मिले। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस अन्य संभावित मामलों में भी उसके कनेक्शन की जांच कर रही है।
हालांकि, इस दिल दहला देने वाली वारदात ने भारतीय रेलवे में आम मुसाफिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। सवाल यह उठता है कि लंबी दूरी की एक्सप्रेस और स्पेशल ट्रेनों में रात के वक्त एस्कॉर्ट पार्टी और जीआरपी के जवान कहां रहते हैं? एक शातिर अपराधी बोगी के अंदर किसी मुसाफिर को बंधक बनाकर पीटता रहा, फोन पर फिरौती मांगता रहा और फिर हाथ-पैर बांधकर चलती गाड़ी से फेंक गया, लेकिन पूरी बोगी में किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ट्रेनों के सामान्य डिब्बों में सफर करने वाले गरीब और लाचार मजदूरों की सुरक्षा आज भी भगवान भरोसे ही है।






