दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हुआ UPSC का ऐतिहासिक शताब्दी समारोह
देश की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC ने अपनी स्थापना के गौरवशाली 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के अवसर पर राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में एक भव्य शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए देश की प्रशासनिक व्यवस्था, उसकी मजबूती और पिछले एक सौ वर्षों की विकास यात्रा पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक सदी का यह सफर केवल एक संस्था की यात्रा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों युवाओं की उम्मीदों और सपनों का जीवंत दस्तावेज है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते समय के साथ देश की जरूरतें और तकनीक दोनों में भारी बदलाव आए हैं, लेकिन इस संस्था के प्रति आम नागरिकों का अटूट भरोसा पहले की तरह ही मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि चाहे तकनीक बदली हो, पाठ्यक्रम बदला हो या शासन प्रणालियां बदली हों, देश की सर्वोच्च चयन संस्था की निष्पक्षता और गुणवत्ता पर कभी आंच नहीं आई। इस खास मौके पर आयोग की इस लंबी और गौरवशाली यात्रा की याद में एक विशेष स्मारक सिक्का और एक डाक टिकट भी आधिकारिक तौर पर जारी किया गया, साथ ही सौ महत्वपूर्ण केस लॉ का एक संग्रह भी लॉन्च किया गया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते प्रभाव और आधुनिक तकनीक पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में तकनीक इतनी तेजी से बदल रही है कि हमारी सिविल सर्विसेज को भी इसके अनुसार खुद को ढालना होगा। भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो केवल एक सरकारी पद पाने की लालसा से नहीं, बल्कि सच्ची लोक सेवा की भावना के साथ आगे आएं। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर भी खुशी जताई कि आज देश के छोटे-छोटे गांवों, कस्बों और दूर-दराज के इलाकों से युवा इस परीक्षा में सफलता हासिल कर रहे हैं, और साथ ही देश की बेटियों की भागीदारी में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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कैप्टन स्मित माछर की बहादुरी: जब एक भारतीय पायलट ने टाल दिया बड़ा संकट
UPSC के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पीएम मोदी ने फ्लाई-दुबई के विमान में तैनात भारतीय पायलट कैप्टन स्मित माछर की जांबाजी और सूझबूझ की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयान का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया भर में आज यह माना जा रहा है कि एक हिंदुस्तानी ने अपनी बहादुरी से एक और संभावित 9/11 जैसी बड़ी त्रासदी को होने से बचा लिया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाई-दुबई के एक विमान में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब ओमान के एक को-पायलट ने कथित तौर पर विमान को किसी गंभीर दुर्घटना का शिकार बनाने की कोशिश की। उस संकटपूर्ण स्थिति में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित माछर ने असाधारण साहस और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया। हमलावर को-पायलट ने धारदार हथियार से कैप्टन स्मित पर हमला कर दिया और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया, इसके बावजूद वह उससे डटकर मुकाबला करते रहे और किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खुलवाने में कामयाब रहे।
कॉकपिट का दरवाजा खुलते ही विमान में सवार अन्य यात्रियों और क्रू मेंबरों ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए हमलावर को-पायलट को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उसे काबू कर लिया। इसके बाद अन्य पायलटों की मदद से विमान को सऊदी अरब में सुरक्षित उतार लिया गया, जिससे विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बाल-बाल बच गई। प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने इस घटना के तुरंत बाद कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्र भाई, माता गीता बहन और उनकी पत्नी सोनल से फोन पर बातचीत की है और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना व गर्व व्यक्त किया है।
"कल जो एक घटना घटी और भारत के कैप्टन स्मित ने जिस प्रकार से सूझबूझ और साहस का परिचय करवाया, आज दुनिया भर में उसकी चर्चा हो रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री ने खुद कहा कि एक हिंदुस्तानी ने 9/11 होने से बचा लिया। हर देशवासी के लिए कैप्टन स्मित का यह पराक्रम गर्व से भर देने वाला है। मैं देशवासियों से प्रार्थना करता हूं कि हम सब उनके उत्तम स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए कामना करें।" — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत
बदलते दौर में सिविल सर्विसेज की नई भूमिका और चुनौतियां
अपने विस्तृत संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21वीं सदी के भारत के सामने खड़ी प्राथमिकताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद का यह कालखंड और विशेष तौर पर आगामी 25 साल भारत के भविष्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। एक विकसित भारत के निर्माण के लिए देश को जिस प्रकार के कुशल नेतृत्व की आवश्यकता है, उसे तराशने में संघ लोक सेवा आयोग और देश के अन्य सभी राज्य चयन आयोगों की भूमिका सबसे बड़ी और केंद्रीय है। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाते हुए कहा कि प्रशासनिक मशीनरी को हमेशा 'राष्ट्र प्रथम' और 'नागरिक प्रथम' के मूल मंत्र के साथ काम करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि जब इस आयोग का गठन औपनिवेशिक काल में हुआ था, तब स्थितियां पूरी तरह भिन्न थीं। उन दिनों केवल बड़े शहरों के साधन संपन्न परिवारों के गिने-चुने युवाओं को ही इस प्रकार के अवसरों का लाभ मिल पाता था। लेकिन आज स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था के विस्तार के साथ ही देश के सुदूर गांवों और कस्बों के युवा भी अपनी मेहनत के बल पर इस मुकाम को हासिल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में देश की नारी शक्ति ने हर क्षेत्र में जो मुकाम हासिल किया है, उसकी झलक यूपीएससी के इतिहास में भी साफ दिखाई देती है, जहां हाल के वर्षों में महिलाओं की भागीदारी में ऐतिहासिक उछाल आया है।
समारोह के समापन पर प्रधानमंत्री ने उपस्थित सभी गणमान्य लोगों, प्रशासनिक अधिकारियों और सिविल सेवा के क्षेत्र से जुड़े तमाम दिग्गजों से अपील की कि वे संस्थान की सौ साल पुरानी गौरवशाली गैलरी का अवलोकन करें। उन्होंने कहा कि यह गैलरी हमारे इतिहास, संघर्ष और सफलताओं का एक जीता-जागता प्रमाण है जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी। देश की नौकरशाही को आधुनिक समय की तकनीकी चुनौतियों और जनहित के मुद्दों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील रहने का आह्वान करते हुए उन्होंने सभी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।








