नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत के आयात बाजार में इन दिनों कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव एक साथ हो रहे हैं। देश की अर्थव्यवस्था के लिए आयात हमेशा से एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा रहा है। हाल ही में सामने आई विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय बाजार अभी भी चीनी सामान के आयात के गहरे जाल में फंसा हुआ है। घरेलू उद्योगों और छोटे व्यापारियों को लगातार इस बात की चिंता सताती रहती है कि सस्ता चीनी सामान किस तरह स्थानीय बाजारों को प्रभावित कर रहा है। सरकार और नीति निर्माता इस चुनौती से निपटने के लिए लगातार नए रास्ते तलाश रहे हैं, लेकिन बाजार में चीनी उत्पादों की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है।
दूसरी तरफ, ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भारत की नीतियां तेजी से बदल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूसी तेल महंगा होने के बाद भारत ने अब दूसरे विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है। ताजा खुलासों के अनुसार, भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अन्य देशों से अधिक तेल खरीदना शुरू कर दिया है। कच्चे तेल की सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए भारत अब किसी एक देश पर निर्भर रहने से बच रहा है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह कूटनीतिक और आर्थिक रूप से एक बहुत बड़ा कदम है, जो देश के खजाने और ईंधन की कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
वेनेजुएला से तेल के रास्ते और टैंकरों की हलचल
ऊर्जा बाजार में एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों में ढील मिलने के बाद अब वेनेजुएला का कच्चा तेल रूसी तेल की जगह लेने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वेनेजुएला से कच्चे तेल को लेकर कई टैंकर भारत की ओर बढ़ चले हैं। भारत की रिफाइनरी कंपनियां हमेशा से सस्ते और भरोसेमंद कच्चे तेल की तलाश में रहती हैं ताकि देश में पेट्रोल और डीजल के दाम काबू में रखे जा सकें। वेनेजुएला के क्रूड ऑयल के आने से भारत के पास ऊर्जा आयात के लिए एक और मजबूत विकल्प तैयार हो जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मोलभाव करने की भारत की ताकत भी बढ़ेगी और देश की ऊर्जा जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी।
केवल ईंधन ही नहीं, बल्कि खाद्य तेल के मोर्चे पर भी भारत की रणनीति में बदलाव आया है। देश में पाम तेल की भारी खपत को पूरा करने के लिए नए स्रोतों की तलाश लगातार जारी है। पारंपरिक आपूर्तिकर्ता देशों के अलावा भारत अब दूसरे देशों से भी पाम तेल आयात करने के समझौते कर रहा है। रसोई के तेल की कीमतें आम आदमी के बजट को सीधा असर डालती हैं, इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश में पाम तेल की कोई कमी न हो और दाम हमेशा नियंत्रण में रहें। खाद्य तेल के आयात में यह विविधता देश के खाद्य बाजार के लिए बहुत जरूरी साबित हो रही है।
सोने-चांदी के आयात पर जीएसटी काउंसिल की बड़ी तैयारी
आयात से जुड़ा एक और अहम मामला सोने और चांदी से संबंधित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देशवासियों से अपील की गई थी कि वे समझदारी से खरीदारी करें और विदेशी सोने पर अत्यधिक निर्भरता कम करें। इस अपील के बाद अब जीएसटी काउंसिल की बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार, काउंसिल सोने और चांदी के आयात पर मिलने वाले टैक्स छूट या नियमों की नए सिरे से समीक्षा करने की तैयारी कर रही है। देश में कीमती धातुओं का भारी मात्रा में आयात होता है, जिससे चालू खाते के घाटे पर असर पड़ता है। सरकार चाहती है कि सोने-चांदी के आयात को नियंत्रित किया जाए और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जाए।
आम जनता के लिए इन सभी आयात बदलावों का सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में बाजार की कीमतें और जरूरी सामान की उपलब्धता इन नीतियों से तय होगी। चाहे वह रसोई का तेल हो, गाड़ियों में डलने वाला ईंधन हो या फिर शादियों का सीजन आने पर सोने के भाव हों, हर चीज पर आयात का यह बड़ा चक्रव्यूह असर डालता है। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि भारत सरकार अब किसी भी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय आयात के मोर्चे पर विविधीकरण यानी कई विकल्प खुले रखने की नीति पर तेजी से काम कर रही है। आने वाले हफ्तों में इन फैसलों का असर सीधे तौर पर आम आदमी की जेब और देश के बाजारों पर दिखाई देगा।






