नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में इन दिनों बयानों का दौर बहुत तेज चल रहा है। इसी बीच शिवसेना की नेता और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक बार फिर सरकार और व्यवस्था पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने विपक्ष की चुप्पी और चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है और हर पार्टी अपनी रणनीति बनाने में जुटी है।
अपनी बात रखते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने सीधे तौर पर व्यवस्था से सवाल किया कि आखिर किस बात का डर है। उन्होंने हालिया राजनीतिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि निष्पक्षता केवल कागजों पर नहीं दिखनी चाहिए बल्कि जमीन पर भी उसका असर दिखना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं बहुत तेज हो गई हैं और विपक्षी दलों के सुर में सुर मिलाते हुए उन्होंने कई अन्य गंभीर मुद्दे भी उठाए हैं।
राम मंदिर और विदेश नीति पर तीखे सवाल
प्रियंका चतुर्वेदी ने सिर्फ चुनाव आयोग तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने सरकार की विदेश नीति और राम मंदिर विवाद को लेकर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार को हर मुद्दे पर जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। विदेशी मामलों पर बोलते हुए उन्होंने सरकार की नीतियों की आलोचना की और पूछा कि दुनिया भर में बदलते समीकरणों के बीच भारत की स्थिति पर गंभीर विचार क्यों नहीं किया जा रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटते हुए व्यक्तिगत संदर्भ भी दिए। बातचीत के दौरान उन्होंने मंडल आयोग के खिलाफ चले आंदोलन में अपने पति के शामिल होने का भी जिक्र किया। उन्होंने इस पुराने वाकये के जरिए एक तीर से दो निशाने साधे और बीजेपी को घेरने की कोशिश की। उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि कैसे राजनीतिक और सामाजिक बदलावों में अलग-अलग परिवारों की भूमिका रही है और आज की सरकार इतिहास को किस तरह से देख रही है।
ट्विशा शर्मा मामला और बजट पर प्रतिक्रिया
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच प्रियंका चतुर्वेदी ने एक और बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने ट्विशा शर्मा की सास को मिलने वाली कथित छूट पर सवालिया निशान लगाया। उन्होंने साफ शब्दों में पूछा कि आखिर किसी खास व्यक्ति को इतनी छूट कैसे मिल सकती है और कानून सबके लिए बराबर क्यों नहीं है। इस मामले पर उन्होंने प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
देश के आम बजट के आने के तुरंत बाद भी उनकी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। उन्होंने महंगाई और आम आदमी की जेब का जिक्र करते हुए कहा कि दुनियाभर की आर्थिक स्थिति का हवाला देकर जनता को राहत देने से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। बजट के बाद उन्होंने कहा कि सरकार को आंकड़ों की बाजीगरी से बाहर निकलकर आम आदमी की थाली और उसकी बचत के बारे में सोचना चाहिए।
राजनीतिक हलचल और आगे का असर
प्रियंका चतुर्वेदी के इन तमाम बयानों से साफ है कि आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक का सियासी पारा और ज्यादा चढ़ने वाला है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष उनके इन बयानों को राजनीतिक स्टंट बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इसे जमीनी सच मानकर आगे बढ़ा रहे हैं। चुनाव आयोग और सरकार की नीतियों पर उठे इन सवालों ने एक बार फिर निष्पक्षता और लोकतंत्र की पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल बताती है कि आम जनता के बीच भी इन मुद्दों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोग यह जानना चाहते हैं कि राजनेताओं के इन बयानों से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा। आने वाले हफ्तों में देखना यह होगा कि सरकार इन तीखे सवालों का क्या जवाब देती है और चुनाव आयोग इस पर क्या रुख अपनाता है।








