डिजिटल युग में सफर की अहम जरूरत बन चुका है पावर बैंक
आज के समय में जब हमारा जीवन स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल गैजेट्स के बिना अधूरा सा लगता है, तब सफर के दौरान पावर बैंक एक अनिवार्य साथी बन गया है। लंबे सफर पर निकलना हो, एयरपोर्ट पर घंटों फ्लाइट का इंतजार करना हो या फिर यात्रा के दौरान फोन की बैटरी खत्म होने का डर हो, एक पोर्टेबल चार्जर हर परेशानी का आसान समाधान मुहैया कराता है। इसके पास होने पर हमें विमान में चढ़ने से पहले या उतरने के तुरंत बाद चार्जिंग सॉकेट की तलाश में भटकना नहीं पड़ता है। यही वजह है कि आज शायद ही कोई ऐसा यात्री होगा जो अपने बैग में पावर बैंक या अन्य पोर्टेबल चार्जिंग डिवाइस न रखता हो।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि हवाई जहाज के सफर के दौरान इस आम दिखने वाले इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को लेकर कितने कड़े नियम लागू होते हैं? जमीन पर भले ही आप इसे अपनी जेब में रखकर बेफिक्र घूमते हों, लेकिन आसमान की ऊंचाइयों पर उड़ते विमान में इसके इस्तेमाल और रखने के तौर-तरीकों को लेकर विमानन सुरक्षा एजेंसियों के बेहद सख्त कायदे-कानून हैं। थोड़ी सी भी लापरवाही या अनदेखी आपके पूरे सफर को संकट में डाल सकती है। इसलिए हर हवाई यात्री के लिए यह बेहद जरूरी है कि वह यात्रा पर निकलने से पहले एयरलाइंस के इन नियमों को अच्छी तरह समझ ले ताकि एयरपोर्ट पर किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके।
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लिथियम-आयन बैटरी से जुड़ा है सुरक्षा का बड़ा जोखिम
फ्लाइट में पावर बैंक को लेकर इतने कड़े नियम होने के पीछे एक बहुत बड़ा तकनीकी कारण है। दरअसल, इन सभी पोर्टेबल चार्जर्स के अंदर लिथियम-आयन बैटरियों का इस्तेमाल किया जाता है, जो बहुत ही कम जगह में भारी मात्रा में ऊर्जा यानी इलेक्ट्रिकल एनर्जी स्टोर करने की क्षमता रखती हैं। सामान्य परिस्थितियों और सही रखरखाव के दौरान ये बैटरियां पूरी तरह सुरक्षित होती हैं और हमारे रोजमर्रा के काम को आसान बनाती हैं। हालांकि, जब बात विमान यात्रा की आती है, तो हवा के दबाव, तापमान में बदलाव और कई बार बैटरी के डैमेज होने या शॉर्ट-सर्किट होने का खतरा बढ़ जाता है।
एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन बैटरियों के साथ सबसे बड़ी चिंता 'थर्मल रनअवे' (Thermal Runaway) नामक स्थिति की होती है। इस प्रक्रिया में बैटरी के अंदर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और एक बार यह शुरू हो जाए तो इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप बैटरी में आग तक लग सकती है। विमान के केबिन में या कार्गो होल्ड में यदि ऐसा हादसा हो जाए, तो यह सैकड़ों यात्रियों की जान के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय विमानन संगठनों और एयरलाइंस कंपनियों ने इन्हें लेकर बेहद कड़े सुरक्षा मानक तय किए हैं, जिनका पालन करना हर यात्री के लिए अनिवार्य है।
हालिया घटनाओं ने बढ़ाई विमानन सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं
आसमान में लिथियम-आयन बैटरी और पावर बैंक से जुड़े खतरों की बात केवल कागजी नहीं है, बल्कि हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं जिन्होंने एविएशन इंडस्ट्री और यात्रियों दोनों को सकते में डाल दिया है। सुरक्षा से जुड़ी ऐसी ही एक बड़ी घटना पिछले दिनों यूरोप में देखने को मिली, जब एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान के दौरान केबिन में रखे पावर बैंक में अचानक आग लग गई। इस घटना के बाद से विमानन सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर एक बार फिर से गंभीर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एम्स्टर्डम से कुराकाओ जा रही केएलएम रॉयल डच एयरलाइंस (KLM Royal Dutch Airlines) की एक फ्लाइट के दौरान बिजनेस-क्लास केबिन में चार्ज हो रहे एक पावर बैंक में अचानक से आग भड़क उठी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पायलट ने बिना कोई जोखिम उठाए विमान को तुरंत वापस संबंधित एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारने का समझदारी भरा फैसला लिया। इस तरह की घटनाएं यह साबित करती हैं कि यात्रा के दौरान इन उपकरणों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। ऐसी ही तमाम वारदातों के बाद दुनिया भर की एयरलाइंस ने अपने सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा कर दिया है ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते टाला जा सके।
हैंड बैगेज बनाम चेक-इन लगेज: क्या है सही तरीका?
फ्लाइट में सफर करते समय सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि पावर बैंक को अपने साथ कहां रखा जाए—मेन लगेज में या अपने हाथ वाले बैग में? विमानन नियमों के अनुसार, पावर बैंक को कभी भी चेक-इन बैगेज (यानी जो सामान आप काउंटर पर जमा करते हैं) में ले जाने की बिल्कुल अनुमति नहीं होती है। इन्हें हमेशा आपके साथ केबिन बैगेज यानी हैंड बैग में ही रखना अनिवार्य होता है। इसके पीछे मुख्य तर्क यह है कि यदि कार्गो होल्ड में रखे सामान में कोई खराबी या स्पार्क हो जाए, तो चालक दल के सदस्यों का उस तक तुरंत पहुंचना नामुमकिन होता है।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू एयरलाइंस आमतौर पर हर यात्री को अधिकतम दो पावर बैंक अपने साथ रखने की ही अनुमति देती हैं। साथ ही, इन सभी पोर्टेबल चार्जर्स की कुल क्षमता 100 वॉट-घंटे (Wh) से अधिक नहीं होनी चाहिए। इंडिगो, एयर इंडिया और विस्तारा जैसी प्रमुख एयरलाइंस का स्पष्ट निर्देश है कि स्पेयर बैटरियों और पावर बैंक को शॉर्ट-सर्किट से बचाने के लिए अलग-अलग पॉलिथीन या उनके मूल पैकेट में सुरक्षित तरीके से रखा जाना चाहिए ताकि मेटल की किसी अन्य वस्तु से संपर्क में आकर उनमें स्पार्किंग न हो सके।
उड़ान के दौरान क्या पावर बैंक से फोन चार्ज कर सकते हैं?
बहुत से यात्रियों के मन में यह भ्रम रहता है कि वे विमान के भीतर अपनी सीट पर बैठकर आराम से अपने पावर बैंक से मोबाइल फोन, टैबलेट या अन्य गैजेट्स को चार्ज कर सकते हैं। लेकिन आपको बता दें कि ज्यादातर विमानन कंपनियां फ्लाइट के दौरान पावर बैंक के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लगाती हैं। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) और तमाम घरेलू एयरलाइंस जैसे अकासा एयर और एयर इंडिया की गाइडलाइंस यह साफ करती हैं कि उड़ान के दौरान, खासकर टैक्सीइंग, टेक-ऑफ या लैंडिंग के वक्त किसी भी डिवाइस को पावर देने के लिए पावर बैंक का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई एयरलाइंस के विमानों में अब सीटों पर ही यूएसबी या पावर सॉकेट की सुविधा दी जाती है, लेकिन उसका उपयोग भी केवल सीधे तौर पर पर्सनल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज करने के लिए किया जाना चाहिए, न कि किसी पावर बैंक को रीचार्ज करने के लिए। ब्रिटिश एयरवेज और अन्य ग्लोबल एयरलाइंस का भी यही रुख है। यदि कोई यात्री केबिन क्रू के इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसे हवाई अड्डे पर ही अपने महंगे गैजेट्स छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि सफर पर निकलने से पहले इन तमाम नियमों को अच्छी तरह जान लें।
"यात्रियों की सुरक्षा हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। लिथियम-आयन बैटरी और पावर बैंक से जुड़े संभावित खतरों को देखते हुए सभी यात्रियों से अपील की जाती है कि वे केबिन क्रू के निर्देशों का पालन करें और यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों से कोई समझौता न करें।"— वरिष्ठ विमानन सुरक्षा अधिकारी
निष्कर्ष और यात्रियों के लिए जरूरी सावधानियां
निष्कर्ष के तौर पर यही कहा जा सकता है कि पावर बैंक आज के समय में हमारे सफर का एक बेहद मददगार और जरूरी गैजेट है, लेकिन इसकी तकनीक से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। एक छोटी सी लापरवाही आसमान में एक बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकती है। इसलिए जब भी आप अगली बार हवाई यात्रा की योजना बनाएं, तो यह सुनिश्चित कर लें कि आपका पावर बैंक तयशुदा क्षमता (100 Wh) के भीतर का ही हो और उसे हमेशा अपने हैंड बैगेज में ही सुरक्षित तरीके से रखा गया हो।
सफर के दौरान एयरलाइंस के क्रू मेंबर्स द्वारा समय-समय पर दी जाने वाली घोषणाओं और सुरक्षा निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। उड़ान भरते समय या उतरते समय अपने गैजेट्स के इस्तेमाल से बचें और किसी भी प्रकार की असामान्य गर्मी या बदबू महसूस होने पर तुरंत एयर होस्टेस या फ्लाइट अटेंडेंट को इसकी सूचना दें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और अपनी यात्रा को सुखद बनाएं।






