नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — त्योहारी सीजन से पहले रेल मंत्रालय और केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में रेल कर्मचारियों के बोनस पर मुहर लग गई है। देश भर के 11 लाख 40 हजार से ज्यादा नॉन-गजेटेड रेल कर्मचारियों को 78 दिन का वेतन बोनस के रूप में मिलेगा। यह फैसला दुर्गा पूजा और दिवाली से ठीक पहले आया है। बोनस की रकम सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे रेल कर्मचारियों और उनके परिवारों में भारी खुशी का माहौल है। सरकार के इस फैसले से सरकारी खजाने पर करीब 2000 करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ेगा।
रेलवे में काम करने वाले ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, ट्रेन गार्ड, स्टेशन मास्टर और वर्कशॉप कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। प्रत्येक पात्र कर्मचारी के खाते में लगभग 17,951 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी। त्योहारों के मौसम में यह पैसा मिलने से बाजारों में भी खरीदारी बढ़ेगी। झारखंड के धनबाद रेल मंडल में ही करीब 26 हजार कर्मचारियों को यह बोनस मिलेगा। इसी तरह देश के सभी 17 रेल मंडलों में भुगतान की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है। कर्मचारी यूनियनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। हालांकि कई कर्मचारी संगठन काफी समय से 78 दिन से ज्यादा के बोनस की मांग कर रहे थे।
त्योहारी सीजन से पहले रेल कर्मचारियों की जेब में कितना पैसा आएगा?
रेलवे बोर्ड के नियमों के तहत यह बोनस पिछले वित्तीय वर्ष के काम के आधार पर तय होता है। इसे उत्पादकता से जुड़ा बोनस यानी पीएलबी कहा जाता है। सरकार हर साल त्योहारी सीजन में अपने कर्मचारियों को यह प्रोत्साहन देती है। इस बार बोनस की अधिकतम सीमा 17,951 रुपये प्रति कर्मचारी रखी गई है। ग्रुप सी और ग्रुप डी के सभी पात्र कर्मचारियों को यह पूरी राशि मिलेगी। रेलवे प्रशासन ने सभी जोनल मुख्यालयों को निर्देश दिए हैं कि दशहरा से पहले सभी के खाते में पैसे भेज दिए जाएं। कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई के दौर में यह रकम उनके त्योहार के खर्चों में बड़ी मदद करेगी।
द फ्रीलान्स की टीम ने जब ग्राउंड पर कर्मचारियों से बात की, तो उन्होंने अपनी भावनाएं साझा कीं। कर्मचारियों का कहना है कि वे दिन-रात चौबीसों घंटे पटरियों की सुरक्षा और ट्रेन संचालन में लगे रहते हैं। भीषण गर्मी, बारिश और कड़ाके की ठंड में भी उनका काम कभी नहीं रुकता। ऐसे में मेहनत का फल त्योहार से पहले मिलना उनके मनोबल को बढ़ाता है। कर्मचारियों के घर-परिवार में अब त्योहार की खरीदारी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बच्चों के नए कपड़े और घर के सामान की लिस्ट बन रही है। स्थानीय बाजारों के व्यापारी भी इस फैसले के बाद अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ से चार बड़े राज्यों के लिए 7 नई ट्रेनों का तोहफा
बोनस के साथ-साथ रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए भी कई बड़े कदम उठाए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के यात्रियों को रेलवे ने 7 नई ट्रेनों की सौगात दी है। दुर्ग और बिलासपुर से देश के प्रमुख तीर्थ और व्यापारिक शहरों के लिए सीधी ट्रेनें चलेंगी। दुर्ग से माता वैष्णो देवी कटरा के लिए अब सीधी ट्रेन सेवा मिलेगी। इसके अलावा दुर्ग से कामाख्या देवी मंदिर और हरिद्वार के लिए भी नई ट्रेनें शुरू हो रही हैं। बिलासपुर से मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के लिए भी नई रेल लाइन जुड़ेगी। इन रूटों पर ट्रेनों की मांग यात्री लंबे समय से कर रहे थे।
नई ट्रेनें शुरू होने से आम यात्रियों और श्रद्धालुओं को बड़ा फायदा मिलेगा। पहले कटरा या कामाख्या जाने के लिए यात्रियों को दिल्ली या कोलकाता में ट्रेन बदलनी पड़ती थी। अब सीधी ट्रेन होने से समय और पैसे दोनों की बचत होगी। छत्तीसगढ़ के दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर और रायगढ़ जैसे शहरों से भारी संख्या में श्रद्धालु हर साल धार्मिक यात्राओं पर जाते हैं। व्यापारियों के लिए इंदौर और कटरा जैसे बाजारों तक सीधा संपर्क बनेगा। रेलवे अफसरों के मुताबिक, इन ट्रेनों के टाइम टेबल और स्टॉपेज की आधिकारिक अधिसूचना जल्द जारी कर दी जाएगी। नई ट्रेनों में आधुनिक एलएचबी कोच लगाए जाएंगे ताकि यात्रा सुरक्षित और आरामदायक हो।
रेलवे ट्रैक पर हादसे और सुरक्षा को लेकर जमीनी हकीकत
एक तरफ जहां नई ट्रेनों और बोनस से खुशी है, वहीं दूसरी तरफ रेल सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में रेलवे ट्रैक पर फंसी एक कार को तेज रफ्तार ट्रेन द्वारा टक्कर मारने की घटना सामने आई है। इस हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सुरक्षा मानकों पर चर्चा तेज हो गई है। गनीमत यह रही कि ट्रेन आने से कुछ सेकंड पहले ही कार चालक बाहर निकल गया और उसकी जान बच गई। लेकिन रेलवे ट्रैक पर वाहनों का इस तरह आ जाना भारी लापरवाही को दर्शाता है। इससे सैकड़ों रेल यात्रियों की जान भी जोखिम में पड़ सकती थी।
रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ इस मामले की गहन जांच कर रहा है। बिना फाटक वाली क्रॉसिंग और पटरियों के आसपास अनधिकृत आवाजाही को रोकने के लिए रेलवे ने विशेष अभियान शुरू किया है। ग्राउंड स्तर पर कई जगहों पर लोग शॉर्टकट के चक्कर में अपनी गाड़ियां पटरियों के बीच से निकालते हैं। ट्रैक के आसपास बाउंड्री वॉल न होने से आवारा पशु और वाहन अचानक सामने आ जाते हैं। रेलवे प्रशासन ने साफ किया है कि पटरियों पर गाड़ी फंसाने या नियम तोड़ने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। लोको पायलटों को भी संवेदनशील इलाकों में हॉर्न बजाने और गति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
त्योहारी भीड़ से निपटने के लिए रेलवे की क्या है तैयारी?
आने वाले दिनों में छठ पूजा, दिवाली और दुर्गा पूजा के दौरान करोड़ों लोग अपने घर लौटेंगे। ट्रेनों में टिकटों की भारी मारामारी शुरू हो चुकी है। प्रमुख रूटों पर सभी नियमित ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट सौ के पार पहुंच गई है। भीड़ को देखते हुए रेलवे ने देश भर में सैकड़ों पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। रेलवे स्टेशनों पर अतिरिक्त टिकट काउंटर और सुरक्षा घेरा तैयार किया जा रहा है। स्टेशन परिसरों में यात्रियों के रुकने के लिए अस्थायी टेंट और पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है। प्लेटफार्मों पर भगदड़ जैसी स्थिति न बने, इसके लिए विशेष क्राउड मैनेजमेंट प्लान लागू किया गया है।
रेलवे की पूरी मशीनरी इस समय हाई अलर्ट पर है। कर्मचारियों को मिले बोनस ने उनके भीतर नया उत्साह भरा है, लेकिन आने वाले दो महीने उनकी असली परीक्षा के होंगे। लाखों यात्रियों को सुरक्षित और समय पर उनके गंतव्य तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है। यात्रियों का कहना है कि स्पेशल ट्रेनों के फेरे और बढ़ाए जाने चाहिए ताकि दलालों पर लगाम लग सके। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि इस बार तकनीक और अतिरिक्त ट्रेनों के दम पर किसी भी यात्री को ज्यादा परेशानी नहीं होने दी जाएगी। रेलवे के कंट्रोल रूम से हर प्रमुख स्टेशन की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।



