सफर के दौरान जब एक मां की आंखों में आ गए आंसू और रेलवे बना फरिश्ता
भारतीय रेलवे को देश की जीवन रेखा कहा जाता है, लेकिन इसके साथ ही यह अपने यात्रियों की भावनाओं और जरूरतों का भी पूरा ख्याल रखता है। हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय रेलवे सिर्फ गंतव्य तक पहुंचाने का साधन नहीं है, बल्कि यह सफर के दौरान हर एक यात्री के परिवार की तरह खड़ा रहता है। लालकुआं से राजकोट जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन में सफर कर रही एक महिला यात्री के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसने रेलवे की संवेदनशीलता और उसकी कार्यप्रणाली के मानवीय पहलू को पूरी दुनिया के सामने ला दिया। सफर लंबा था और ट्रेन अपनी रफ्तार से पटरियों पर दौड़ रही थी, लेकिन तभी बोगी के भीतर एक ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हुई जिसने एक मां को बुरी तरह परेशान कर दिया।
ट्रेन के एस-3 कोच की सीट संख्या 23 पर यात्रा कर रही महिला का छोटा बच्चा तेज भूख के कारण लगातार रोए जा रहा था। छोटे बच्चों के मामले में स्थिति तब और भी ज्यादा संवेदनशील हो जाती है जब उनके पास खाने-पीने का उचित सामान खत्म हो जाए या समय पर दूध न मिल पाए। महिला के पास बच्चे को शांत कराने का कोई विकल्प नहीं बचा था और वह बेबस होकर अपने बच्चे को चुप कराने की कोशिश कर रही थी। ट्रेन के भीतर इस तरह की आपात स्थिति में यात्रियों के लिए तुरंत मदद पाना अमूमन मुश्किल होता है, लेकिन आधुनिक रेलवे प्रणाली और उसके सक्रिय कर्मचारियों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वे यात्रियों की हर छोटी-बड़ी समस्या के समाधान के लिए चौबीस घंटे मुस्तैद हैं।
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वाणिज्य नियंत्रण कक्ष तक ऐसे पहुंची मदद की गुहार और तुरंत हरकत में आया महकमा
जब महिला की परेशानी हद से बढ़ गई और बच्चे का रोना थमता नहीं दिखा, तो उसने रेलवे की हेल्पलाइन और ऑन-बोर्ड स्टाफ से संपर्क साधने का प्रयास किया। ट्रेन के भीतर यात्रा कर रहे यात्रियों और टीटीई के सहयोग से यह संदेश तुरंत रेलवे के वाणिज्य नियंत्रण कक्ष तक पहुंचा दिया गया। आधुनिक तकनीक और बेहतर संचार व्यवस्था के कारण यह संदेश बिना किसी देरी के संबंधित अधिकारियों तक पहुंच गया। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन ने इसे किसी सामान्य शिकायत की तरह नहीं लिया, बल्कि एक मानवीय आपातकाल मानते हुए तुरंत एक्शन लेने का निर्देश जारी किया।
रेलवे के इज्जतनगर मंडल के जनसंपर्क विभाग के अधिकारी डीएस चौहान ने इस पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि वाणिज्य नियंत्रण कक्ष को जैसे ही यह सूचना मिली कि ट्रेन संख्या 05045 यानी लालकुआं–राजकोट एक्सप्रेस में एक मां को अपने छोटे बच्चे के लिए गर्म दूध की सख्त आवश्यकता है, वैसे ही विभाग ने बिना एक पल गंवाए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। रेलवे के अधिकारियों ने तुरंत रूट पर आने वाले अगले प्रमुख स्टेशन के अधिकारियों को अलर्ट किया और यह सुनिश्चित किया कि ट्रेन के प्लेटफार्म पर रुकते ही दूध का इंतजाम कर लिया जाए। रेलवे की यह तत्परता इस बात का प्रमाण थी कि यात्रियों की सुरक्षा और उनकी बुनियादी जरूरतें महकमे के लिए सर्वोपरि हैं।
हाथरस स्टेशन पर मुख्य वाणिज्य अधीक्षक ने निभाई जिम्मेदारी, ट्रेन रुकते ही पहुंचाया गर्म दूध
इस पूरी मानवीय कवायद में सबसे अहम भूमिका हाथरस रेलवे स्टेशन के मुख्य वाणिज्य अधीक्षक वीके सारस्वत ने निभाई। जैसे ही उन्हें नियंत्रण कक्ष से यह संदेश मिला कि लालकुआं-राजकोट एक्सप्रेस के एस-3 कोच में एक महिला और उसका भूखा बच्चा मदद का इंतजार कर रहा है, उन्होंने तुरंत अपने सभी कार्य छोड़कर इस आपात स्थिति को संभालने का बीड़ा उठाया। वीके सारस्वत ने तुरंत स्टेशन परिसर या उसके आसपास से ताजा और गर्म दूध की व्यवस्था की और उसे सुरक्षित तरीके से पैक करवाया।
निर्धारित समय पर जैसे ही लालकुआं-राजकोट एक्सप्रेस हाथरस स्टेशन के प्लेटफार्म पर रुकी, मुख्य वाणिज्य अधीक्षक वीके सारस्वत बिना वक्त गंवाए सीधे एस-3 कोच की तरफ दौड़े। उन्होंने ट्रेन के भीतर जाकर उस महिला यात्री को खोजा और उसके हाथ में निशुल्क गर्म दूध का पैकेट सौंपा। अचानक मिली इस मदद को देखकर महिला की आंखें भर आईं। उसने रेलवे अधिकारियों की इस संवेदनशीलता के लिए हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। स्टेशन पर मौजूद अन्य यात्रियों ने भी रेलवे के इस सराहनीय कदम को अपनी आंखों से देखा और इस त्वरित कार्रवाई की जमकर प्रशंसा की।
यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए चौबीस घंटे प्रतिबद्ध है भारतीय रेलवे का महकमा
भारतीय रेलवे द्वारा उठाया गया यह कदम कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि यह रेलवे की उस कार्य संस्कृति का हिस्सा है जो आए दिन देश के सामने मिसाल पेश करती है। हाल के कुछ वर्षों में रेलवे ने अपनी पैसेंजर एमिनिटीज और ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम में अभूतपूर्व सुधार किया है। अब ट्रेन के अंदर बैठे-बैठे यात्रियों को मेडिकल इमरजेंसी से लेकर बच्चों के लिए दूध, बुजुर्गों के लिए व्हीलचेयर और अन्य जरूरी सहायताएं तुरंत उपलब्ध कराई जा रही हैं। रेलवे के इज्जतनगर मंडल के अधिकारियों का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य यात्रियों के सफर को सुगम, सुरक्षित और आरामदायक बनाना है।
विशेषकर बच्चों और महिलाओं के साथ सफर करने वाले यात्रियों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे कर्मचारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया और रेलवे के डेडिकेटेड हेल्पलाइन नंबरों के जरिए अब किसी भी यात्री की शिकायत या जरूरत पर तुरंत एक्शन लिया जाता है। हाथरस स्टेशन पर हुई इस घटना ने एक बार फिर से इस बात पर मुहर लगा दी है कि जब सरकारी तंत्र और कर्मचारी संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, तो आम जनता का सिस्टम पर विश्वास और अधिक मजबूत हो जाता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर, देश भर के लोगों ने की रेलवे कर्मचारियों की सराहना
जैसे ही यह घटना मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंची, इंटरनेट पर रेलवे की इस पहल की सराहना की बाढ़ आ गई। ट्विटर (अब एक्स), फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग हाथरस स्टेशन के मुख्य वाणिज्य अधीक्षक वीके सारस्वत और इज्जतनगर मंडल के अधिकारियों की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि अक्सर भारतीय रेलवे की लेटलतिफी या अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आलोचनाएं होती हैं, लेकिन जब ऐसी सकारात्मक और मानवीय घटनाएं सामने आती हैं, तो रेलवे का असली और खूबसूरत चेहरा देश के सामने आता है।
"यात्रियों की सुविधा और उनकी हर छोटी-बड़ी जरूरत को प्राथमिकता देना हमारा मुख्य कर्तव्य है। जब हमें सूचना मिली कि एक मां अपने छोटे बच्चे के लिए परेशान है, तो हमने तुरंत अपने स्तर पर सबसे पहले गर्म दूध उपलब्ध कराने की व्यवस्था की। एक रेलकर्मी के तौर पर जब हम किसी यात्री के चेहरे पर संतोष और राहत देखते हैं, तो हमारी सारी थकान दूर हो जाती है।" — वीके सारस्वत, मुख्य वाणिज्य अधीक्षक, हाथरस स्टेशन
यह घटना न सिर्फ एक रेलवे कर्मचारी की कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि समाज में इंसानियत अभी भी जिंदा है। छोटी-छोटी चीजों में भी दूसरों की मदद करने का यह जज्बा ही भारतीय समाज और हमारी व्यवस्था की असली ताकत है। रेलवे के इस सराहनीय कदम ने यह साबित कर दिया कि जब नियत साफ हो और काम करने का जज्बा हो, तो किसी भी समस्या का समाधान चुटकियों में निकाला जा सकता है। इस घटना के बाद से रेलवे प्रशासन की कार्यशैली की हर तरफ वाहवाही हो रही है और यह कहानी सोशल मीडिया पर प्रेरणा का स्रोत बन गई है।




