सन्नाटे को चीखती चीखें और खून से सनी रात की खौफनाक दास्तान
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय रिश्तों और विश्वास की नींव को झकझोर कर रख दिया है। माना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डूमरतराई इलाके में एक व्यक्ति ने घरेलू कलह और शक के चलते क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। आरोपी ने देर रात अपनी ही पत्नी और दो मासूम बच्चों को धारदार चाकू से गोदकर मौत के घाट उतार दिया। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और लोग इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि कोई पिता अपने ही बच्चों के साथ ऐसा सलूक कैसे कर सकता है।
पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह खौफनाक घटना शनिवार और रविवार की दरमियानी रात करीब डेढ़ बजे के आसपास की है। आरोपी की पहचान भुनेश्वर साहू के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बालोद जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। डूमरतराई के साहू पारा इलाके में यह परिवार पिछले कुछ समय से किराए के मकान में रहकर गुजर-बसर कर रहा था। पति-पत्नी दोनों स्थानीय सब्जी मंडी में मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पाल रहे थे, लेकिन पिछले कुछ महीनों से दोनों के बीच अनबन की खबरें सामने आ रही थीं।
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चरित्र पर शक बना खूनी संघर्ष की मुख्य वजह, पति ने खुद पर भी किया वार
जांच में जुटी पुलिस और अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती पड़ताल के मुताबिक यह पूरा मामला आपसी शक और अविश्वास का नतीजा है। आरोपी पति भुनेश्वर साहू को अपनी पत्नी के चरित्र पर लगातार संदेह था, जिसके चलते घर में आए दिन झगड़े होते थे। घटना वाली रात भी इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जो इतनी बढ़ गई कि गुस्से में अंधा हुए पति ने घर में रखा धारदार चाकू उठा लिया और खौफनाक कदम उठा डाला।
आरोपी ने सबसे पहले अपनी पत्नी खिलेश्वरी साहू पर ताबड़तोड़ कई वार किए। जब उसने बीच-बचाव की कोशिश की तो आरोपी ने बेरहमी से अपने दोनों मासूम बेटों—10 साल के आशीष और 8 साल के ज्ञान—को भी निशाना बनाया। तीनों को गंभीर रूप से लहूलुहान करने के बाद आरोपी ने खुद पर भी उसी चाकू से वार कर लिया ताकि वह भी अपनी जान दे सके या खुद को बचाने का नाटक कर सके। शोर-शराबा सुनकर जब पड़ोसी मौके पर पहुंचे और अंदर का मंजर देखा, तो उनके होश उड़ गए।
पड़ोसियों की सूचना पर हरकत में आई पुलिस, अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय नागरिकों ने तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष और माना थाना पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस बल बिना एक पल गंवाए मौके पर पहुंच गया। पुलिस जब घटनास्थल पर दाखिल हुई, तो दोनों मासूम बच्चे दम तोड़ चुके थे, जबकि महिला की सांसें चल रही थीं और आरोपी पति भी घायल अवस्था में फर्श पर पड़ा हुआ था। पुलिस ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए घायल महिला और आरोपी पति को इलाज के लिए फौरन नजदीकी अस्पताल रवाना किया।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया, क्योंकि अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी। वहीं, आरोपी पति का इलाज पुलिस कस्टडी में मेकाहारा अस्पताल में जारी है, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के स्वस्थ होने के बाद उससे पूछताछ कर घटना की एक-एक कड़ाई से कड़ियों को जोड़ा जाएगा ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।
अंतिम संस्कार के दौरान सामने आया मानवीय संकट और सामाजिक दूरी का दर्द
इस पूरी घटना का एक और बेहद संवेदनशील और दर्दनाक पहलू तब सामने आया जब मृतकों के अंतिम संस्कार की बारी आई। पुलिस सूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह परिवार कुछ वर्ष पहले ईसाई धर्म में मतांतरित हो गया था। इस धार्मिक बदलाव और स्थानीय गतिरोध के चलते आस-पड़ोस के लोगों ने मां और दोनों बच्चों के अंतिम संस्कार में शामिल होने या मदद करने से साफ इनकार कर दिया। परिवार का कोई अन्य सदस्य भी आगे नहीं आया, जिससे मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार करना एक बड़ी चुनौती बन गया।
हालात को भांपते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने संवेदनशीलता का परिचय दिया और आगे बढ़कर मदद का हाथ बढ़ाया। पुलिस के विशेष सहयोग से 'मोक्ष श्रद्धांजलि संस्था' के कार्यकर्ताओं ने आगे आकर तमाम धार्मिक और सामाजिक औपचारिकताओं को पूरा किया। संस्था और पुलिस की मौजूदगी में ही मां और दोनों मासूम बच्चों का अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया, जिसे देखकर हर आंख नम हो गई।
मनोविज्ञान की नजर में: शक और अविश्वास किस तरह घर परिवार को कर देते हैं तबाह
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में बढ़ती मानसिक असंतुलन, तनाव और संवादहीनता की ओर इशारा करती हैं। जब किसी रिश्ते में शक और असुरक्षा की भावना घर कर जाती है, तो वह धीरे-धीरे एक मानसिक बीमारी का रूप ले लेती है। यदि समय रहते परिवार के बुजुर्गों या काउंसलर्स की मदद से ऐसे मामलों में हस्तक्षेप न किया जाए, तो छोटी-छोटी बातें खूनी अंजाम तक पहुंच जाती हैं।
"वैवाहिक संबंध में चरित्र को लेकर लगातार शंका रहने से व्यक्ति में असुरक्षा, अविश्वास और तनाव खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है। बार-बार होने वाले विवाद और संवाद की कमी से स्थिति और बिगड़ती चली जाती है। यदि कोई व्यक्ति शंका के कारण मानसिक रूप से असंतुलित होने लगे और हिंसक व्यवहार दिखाए, तो परिजनों को तुरंत हस्तक्षेप कर पेशेवर परामर्श दिलाना चाहिए।" — डॉ. सुरभि दुबे, मनोरोग विशेषज्ञ
पुलिस अब इस मामले में आसपास के लोगों, रिश्तेदारों और जानकारों के बयान दर्ज कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पिछले कुछ दिनों से घर में ऐसा क्या हुआ था जिसने इस खूनी खेल को जन्म दिया। समाज के स्तर पर भी इस बात पर मंथन किया जा रहा है कि कैसे पारिवारिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को समय रहते पहचाना जाए ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक वारदातों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।








