राजस्थान के नगरीय निकायों में सरकार गठन की प्रक्रिया
राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद अब शहरों की सरकार चुनने की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सोमवार को प्रदेश के कुल 305 नगर निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए मतदान प्रक्रिया आयोजित की जा रही है। इस चुनाव को लेकर राज्यभर में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस मुकाबले में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, ताकि शहरी क्षेत्रों में अपने बोर्ड का गठन किया जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये स्थानीय निकाय चुनाव आगामी बड़े राजनीतिक समीकरणों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यही वजह है कि राज्य की राजधानी जयपुर से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण और शहरी कस्बों तक में राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता पूरी पैनी नजर बनाए हुए हैं। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मतदान प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ सुबह से ही शुरू हो चुकी है, जिसके बाद दोपहर तक परिणामों की तस्वीर साफ होनी शुरू हो जाएगी।
संबंधित खबरें
निर्विरोध चुने गए अध्यक्ष और कुछ जगहों पर टले चुनाव
मुख्य चुनाव प्रक्रिया से पहले ही राज्य के 32 निकायों में तस्वीर साफ हो चुकी है, जहां विभिन्न पदों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं। राज्य निर्वाचन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, कुल 32 निकायों में अध्यक्ष पद पर चेहरे तय हो चुके हैं, जिनमें से अधिकांश स्थानों पर भाजपा ने बाजी मारी है, जबकि कुछ जगहों पर कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी निर्विरोध जीत हासिल की है। भरतपुर और भीलवाड़ा जैसे बड़े शहरों में भाजपा की महिला मेयर निर्विरोध चुनी जा चुकी हैं, जिसे पार्टी अपनी बड़ी शुरुआती बढ़त मान रही है।
हालांकि, कुछ प्रमुख शहरों में तकनीकी कारणों और वार्डों में दोबारा मतदान की आवश्यकता के चलते चुनाव की तारीख में बदलाव किया गया है। जोधपुर, जयपुर और कोटा नगर निगम के साथ-साथ सुकेत नगर पालिका के कुछ वार्डों में दोबारा मतदान होना है, जिसके कारण इन विशिष्ट क्षेत्रों में अध्यक्ष पद का चुनाव अब 25 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। इसके चलते आज प्रदेश के शेष 273 नगरीय निकायों में ही अध्यक्ष पद के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
उदयपुर, बीकानेर और अलवर समेत प्रमुख शहरों में कड़ा मुकाबला
प्रदेश के कई बड़े नगर निगमों और परिषदों में स्थिति बेहद दिलचस्प बनी हुई है। उदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर जैसे अहम नगर निगमों में मेयर और सभापति पदों के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। उदयपुर नगर निगम की बात करें तो यहां भाजपा के पास स्पष्ट बढ़त है, जहां पार्टी के 53 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के पास 23 और अन्य के 4 पार्षद हैं। यहां भाजपा के पारस सिंघवी और कांग्रेस की डॉ. पूनम कंवर के बीच सीधा और रोचक मुकाबला है।
इसके विपरीत, बीकानेर में समीकरण थोड़े अलग हैं, जहां कांग्रेस के पास 42, भाजपा के 24 और अन्य के 11 पार्षद हैं। अलवर और पाली जैसे जिलों में भी दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। इन सभी जगहों पर पार्षदों का समर्थन हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों के स्थानीय क्षत्रप पिछले कई दिनों से रणनीतिक जोड़-तोड़ में जुटे हुए थे। निर्दलीय पार्षदों की भूमिका इन चुनावों में 'किंगमेकर' साबित हो रही है, जिससे किसी भी दल के लिए जीत का गणित आसान नहीं रहा है।
पार्षदों की बाड़ेबंदी और राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग
चुनाव परिणामों के बाद से ही राजस्थान की राजनीति में 'बाड़ेबंदी' का दौर जोरों पर रहा। अपने पार्षदों को टूटने से बचाने और पाला बदलने से रोकने के लिए दोनों ही दलों ने उन्हें सुरक्षित ठिकानों पर होटलों और रिसॉर्ट्स में ठहराया था। इस दौरान कई जगहों पर हंगामे की खबरें भी सामने आईं। तिजारा के पार्षदों को लेकर हरियाणा में हुई कथित गतिविधियों और पुलिस कार्रवाई की सूचना के बाद पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया था।
"सत्ता और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। जनता सब देख रही है और लोकतांत्रिक मूल्यों की इस तरह से हत्या करने वालों को जनता चुनाव में करारा जवाब देगी।"— कांग्रेस पार्टी का आधिकारिक बयान
दूसरी ओर, सत्ताधारी दल ने कांग्रेस के इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी अपनी हार की बौखलाहट में इस तरह के निराधार आरोप लगा रही है। भाजपा नेताओं का दावा है कि शहरी इलाकों की जनता ने विकास के मुद्दों पर उनकी नीतियों पर मुहर लगाई है और अधिकांश निकायों में कमल का फूल ही खिलेगा।
मतदान और परिणाम की पूरी प्रक्रिया
सोमवार सुबह तय समय यानी 10 बजे से मतदान की प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई। जिला प्रशासन ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया है। मतदान संपन्न होने के तुरंत बाद मतों की गिनती शुरू होगी और इसके साथ ही एक-एक करके सभी 305 निकायों (जिनमें आज चुनाव हो रहे हैं) के परिणाम घोषित किए जाएंगे।
इन परिणामों के आते ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस पार्टी ने राजस्थान के शहरी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है और किसके सिर पर जीत का सेहरा बंधा है। आने वाले समय में इन शहरी निकायों के जरिए ही स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की गति तय होगी, जिस पर आम जनता की निगाहें टिकी हुई हैं।







