सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार फिसलन, निवेशकों की बढ़ी चिंता
भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इन दिनों पीली धातु यानी सोना और सफेद धातु यानी चांदी दोनों ही भारी दबाव का सामना कर रहे हैं। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान कीमतों में आई भारी गिरावट ने बाजार के जानकारों को भी चौंका दिया है। त्योहारी सीजन और शादियों के इस दौर में खरीदारी की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं के लिए यह एक राहत भरी खबर जरूर है, लेकिन निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। बाजार में जारी उठापटक के बीच अब यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि क्या आने वाले दिनों में कीमतें और ज्यादा नीचे जाएंगी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बन रहे नए समीकरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुद्रा की चाल इन कीमती धातुओं के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। घरेलू बाजार में पिछले पांच से सात दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाएंगे कि सोने और चांदी के भाव अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार में अभी और करेक्शन देखने को मिल सकता है, बशर्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई बड़ा भू-राजनीतिक फेरबदल न हो।
आर्थिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि निवेशकों को अब पूरी तरह से सतर्क रहकर रणनीति बनानी चाहिए। बाजार में किसी भी तरह की जल्दबाजी से नुकसान की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए हर एक आर्थिक आंकड़े पर पैनी नजर रखना इस समय सबसे समझदारी भरा कदम साबित होगा।
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एमसीएक्स और घरेलू सर्राफा बाजार में कितनी आई गिरावट
कारोबारी हफ्ते के दौरान मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर वायदा कारोबार में 24 कैरेट सोने की चमक फीकी पड़ती दिखाई दी है। आंकड़ों के मुताबिक, एमसीएक्स पर सोने के वायदा भाव में दो से तीन प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई है, जिससे यह गिरकर डेढ़ लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया है। ठीक इसी तरह, चांदी के वायदा भाव में भी भारी बिकवाली हावी रही है, जिससे इस सफेद धातु ने अपने उच्च स्तर से हजारों रुपये का गोता लगाया है।
स्थानीय सर्राफा बाजारों की अगर बात करें तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, खुदरा बाजार में खरीदारों को अब पिछले हफ्तों की तुलना में थोड़ा कम भाव पर सोना और चांदी मिल रहा है। हालांकि, दुकान से आभूषण खरीदते समय ग्राहकों को इस बेस रेट के ऊपर तीन प्रतिशत का जीएसटी (GST) और मेकिंग चार्ज अलग से चुकाना पड़ता है, जिससे अंतिम देय राशि थोड़ी बढ़ जाती है। इसके बावजूद, कुल मिलाकर कीमतों में आई इस नरमी ने आम आदमी को बड़ी राहत जरूर दी है।
व्यापारियों का कहना है कि हाजिर बाजार में मांग अभी सुस्त बनी हुई है, क्योंकि ग्राहक और निवेशक दोनों ही यह अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कीमतें और कितनी नीचे जा सकती हैं। बाजार की यह सुस्ती आने वाले दिनों में नए सौदों की रफ्तार को भी प्रभावित कर सकती है।
अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और रोजगार डेटा का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की चाल के पीछे सबसे बड़ा हाथ संयुक्त राज्य अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों का है। हाल ही में अमेरिका के श्रम सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी किए गए रोजगार के आंकड़े बाजार की उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत रहे हैं। देश में नई नौकरियों के जुड़ने की रफ्तार धीमी पड़ी है और बेरोजगारी दर में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आमतौर पर कमजोर रोजगार आंकड़ों को ब्याज दरों में कटौती की संभावना से जोड़कर देखा जाता है, जो अमूमन सोने जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों को सपोर्ट करता है।
हालांकि, इस बार बाजार का रुख थोड़ा अलग देखने को मिला है। मजबूत अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में लगातार बनी तेजी के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के नाम पर मुनाफावसूली करना शुरू कर दिया। इस बिकवाली के दबाव के चलते सोना अपने प्रमुख मनोवैज्ञानिक स्तरों को पार करने में नाकाम रहा। वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती ने सोने की खरीद को विदेशी निवेशकों के लिए थोड़ा महंगा बना दिया है, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन गया है।
XS.com के प्रमुख विश्लेषक साइमन-पीटर मसाबनी का कहना है कि मौजूदा समय में सोने को दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत हैं, वहीं दूसरी तरफ ऊंची बॉन्ड यील्ड और महंगाई का दबाव बाजार के उत्साह को ठंडा कर रहा है।
"सोने के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत हैं, तो दूसरी तरफ ऊंची बॉन्ड यील्ड और महंगाई का दबाव बना हुआ है। कमजोर रोजगार आंकड़ों से सोने को नीतिगत समर्थन तो मिला है, लेकिन तेजी दोबारा शुरू होने की तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।" — साइमन-पीटर मसाबनी, बिजनेस डेवलपमेंट प्रमुख, XS.com
फेडरल रिजर्व के फैसले और आगे की चाल पर निवेशकों की नजर
आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार की दिशा पूरी तरह से केंद्रीय बैंकों के रुख और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। घरेलू मोर्चे पर निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति के फैसलों पर भी अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। जानकारों का अनुमान है कि ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेत देश के भीतर सर्राफा बाजार की धारणा को काफी हद तक प्रभावित करेंगे। इसके अलावा, अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सेवा पीएमआई आंकड़े तथा उपभोक्ता धारणा रिपोर्ट भी बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यदि भू-राजनीतिक तनाव जैसे अमेरिका-ईरान के बीच अनिश्चितता के हालात और गंभीर होते हैं, तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में अचानक उछाल भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय केवल प्रामाणिक आर्थिक विश्लेषण और अपने वित्तीय सलाहकारों की राय पर ही भरोसा करें।
संक्षेप में कहें तो, मौजूदा गिरावट अस्थायी हो सकती है या फिर एक बड़े करेक्शन की शुरुआत, यह आने वाले हफ्तों के आर्थिक डेटा ही तय करेंगे। फिलहाल, बाजार में उथल-पुथल का दौर जारी रहने की पूरी संभावना है और हर निवेशक को फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी जा रही है।








