उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल, बीजेपी के बागी नेता ने बदला पाला
उत्तर प्रदेश की सियासत में विधान परिषद (MLC) चुनावों की सरगर्मी के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को एक कद्दावर नेता के बगावती तेवर के बाद बड़ा झटका लगा है। लंबे समय से पार्टी की कार्यशैली और टिकट वितरण से नाखुश चल रहे डॉ. संजयन त्रिपाठी ने भगवा खेमा छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। इस सियासी फेरबदल ने आगामी चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।
राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान डॉ. संजयन त्रिपाठी ने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पार्टी में शामिल होते ही उन्हें गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार भी घोषित कर दिया गया है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि डॉ. त्रिपाठी के इस कदम से पूर्वांचल की राजनीति में नए समीकरण जन्म ले सकते हैं। कुछ समय पहले ही उन्होंने अपनी ही पार्टी के भीतर घुटन महसूस होने की बात कही थी और पार्टी के रुख के खिलाफ जाकर बगावत का झंडा बुलंद कर दिया था। अब देखना यह होगा कि इस राजनीतिक बदलाव का आगामी विधान परिषद चुनावों पर कितना गहरा असर पड़ता है।
संबंधित खबरें
गोरखनाथ मंदिर से जुड़ाव और योगी आदित्यनाथ के साथ राजनीति का जिक्र
डॉ. संजयन त्रिपाठी के राजनीतिक सफर की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही है। समाजवादी पार्टी में शामिल होने से महज कुछ घंटे पहले तक उनके पुराने बयानों की गूंज राजनीतिक हलकों में सुनाई दे रही थी। उन्होंने एक साक्षात्कार में खुलकर स्वीकार किया था कि उनके राजनीतिक जीवन की नींव गोरखनाथ मंदिर से पड़ी थी और उन्होंने राजनीति का शुरुआती ककहरा मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सान्निध्य में सीखा था।
बावजूद इसके, वैचारिक और रणनीतिक दूरियों के चलते उनका मोहभंग हो गया। अपनी उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने न केवल अपनी गाड़ी से पार्टी का झंडा उतार दिया था, बल्कि निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी समय जिस नेता के कदम गोरखनाथ मंदिर के इर्द-गिर्द घूमते थे, उनका समाजवादी पार्टी में जाना इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर है।
उनके इस कदम ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और राजनीतिक दलगत समीकरण कई बार पुराने रिश्तों और निष्ठाओं पर भारी पड़ जाते हैं। हालांकि, चुनाव के मुहाने पर खड़े इस कद्दावर नेता के पाला बदलने से क्षेत्रीय मतदाताओं के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिसे अब सपा में जाने के बाद विराम मिल गया है।
अखिलेश यादव ने किया स्वागत, बदला गया पुराना प्रत्याशी
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी मुख्यालय पर डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ-साथ डॉक्टर आकाश अग्रवाल को भी पार्टी की सदस्यता दिलाई। पार्टी नेतृत्व ने तुरंत फैसला लेते हुए गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर पहले से घोषित उम्मीदवार कमलेश यादव का टिकट बदलकर संजयन त्रिपाठी को नया उम्मीदवार बना दिया। इसके साथ ही आगरा खंड से डॉक्टर आकाश अग्रवाल को भी चुनावी मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया गया है।
इस अदला-बदली को लेकर अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जो साथी पहले से उम्मीदवार के रूप में घोषित किए गए थे और जिन्होंने पार्टी हित में अपनी सीट छोड़ी है, उनका पार्टी पूरा सम्मान करेगी। समय आने पर उन्हें उनकी इस कुर्बानी का उचित सिला दिया जाएगा।
"समाजवादी पार्टी में शामिल हो रहे सभी साथियों का हम स्वागत करते हैं। जिन लोगों ने पार्टी और आंदोलन के खातिर अपनी उम्मीदवारी छोड़ी है, उनका विशेष आभार व्यक्त करता हूँ। समय आने पर इन सभी साथियों को पूरा और उचित सम्मान दिया जाएगा। हम सब मिलकर इन चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल करेंगे।" — अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा हमला
पार्टी कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश की वर्तमान सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने विशेष तौर पर शिक्षा और परीक्षा प्रणाली को लेकर सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक, मौजूदा सरकार के कार्यकाल में सूबे की पूरी परीक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने युवाओं के भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि स्कूली शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है और कई शैक्षणिक संस्थानों में निहित स्वार्थ वाले गिरोह सक्रिय हो चुके हैं जो शिक्षा व्यवस्था को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मतदाता सूची तैयार करने में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है और प्रशासन का दुरुपयोग कर वोटों को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है, जिसका माकूल जवाब पार्टी के कार्यकर्ता मैदान में उतरकर देंगे।
चुनाव से पहले बढ़ा सियासी पारा और नए समीकरण
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की कुल 11 सीटों पर होने वाले इस चुनाव के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है जबकि 27 अक्टूबर को वोटों की गिनती के बाद नतीजे सामने आएंगे। ऐसे में नामांकन वापसी और उम्मीदवारों के बदलने का दौर अंतिम चरणों में है। डॉ. संजयन त्रिपाठी के सपा में आने के बाद अब इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का हो गया है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी ने अपने पुराने और अनुभवी उम्मीदवार ध्रुव कुमार त्रिपाठी पर दांव लगाया है, वहीं समाजवादी पार्टी ने बागी तेवर अपनाकर आए डॉ. संजयन त्रिपाठी को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय या आमने-सामने की जंग में बदल दिया है।
स्थानीय स्तर पर शिक्षकों और मतदाताओं के बीच इस बात की चर्चा है कि कौन सा उम्मीदवार उनकी उम्मीदों पर खरा उतर पाएगा। राजनीतिक दलों की तरफ से बिछाई जा रही इन रणनीतिक चालों के बीच आने वाले दिनों में प्रचार का शोर और अधिक तेज होने की उम्मीद है। चुनाव की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है ताकि विधान परिषद के इस अहम रण में जीत का परचम लहराया जा सके।



