भारतीय सेना के पराक्रमी तेवर और सटीक निशानासाजी एक बार फिर दुनिया के सामने खुलकर आ गई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित पीएएफ बेस मुशाफ यानी सरगोधा एयरबेस पर भारतीय हमले के जख्म आज भी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए इस जोरदार हमले के करीब 490 दिन बीत चुके हैं, लेकिन ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने पाकिस्तान के दावों की पोल खोल दी है। इन तस्वीरों से साफ पता चलता है कि क्षतिग्रस्त हिस्से को अब दोबारा खोलकर पक्की मरम्मत का काम किया जा रहा है।
शुरुआती पैचवर्क साबित हुआ नाकाफी, अब हो रही है स्थायी मरम्मत
हमले के कुछ ही हफ्तों बाद पाकिस्तान ने आनन-फानन में क्षतिग्रस्त हिस्सों को अस्थाई पैच से ढक दिया था ताकि उसका एयरबेस किसी तरह चालू रह सके। लेकिन हाल ही में स्पेस टेक कंपनी वैंतोर की हाई-रेजोल्यूशन और ओएसआईएनटी (OSINT) टीम द्वारा जांची गई तस्वीरों में यह बात सामने आई है कि वह पुराना पैच अब हटा दिया गया है। एयरबेस का वह प्रभावित हिस्सा फिर से खुला हुआ है और वहां भारी मशीनरी के जरिए पक्का काम चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती मरम्मत सिर्फ काम चलाने के लिए थी, जो अब नाकाफी साबित हो रही है।
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पाकिस्तान के लिए क्यों है यह एयरबेस इतना खास?
सरगोधा एयरबेस पाकिस्तानी वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील ठिकानों में से एक माना जाता है। यह सामरिक रूप से बेहद अहम किराना हिल्स से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिसे लंबे समय से पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जोड़ा जाता रहा है। इसके अलावा, यह बेस पाकिस्तान के सेंट्रल एयर कमांड का मुख्यालय भी है। यहां एफ-16, जेएफ-17, मिराज और एफ-7 जैसे कई फ्रंटलाइन लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं। यहीं पर पाकिस्तानी पायलटों की ट्रेनिंग के लिए कॉम्बैट कमांडर्स स्कूल भी चलाया जाता है।
भारतीय वायुसेना के सटीक हमलों का जीवंत प्रमाण
मई 2025 में हुए इन हमलों के दौरान एयरबेस पर लगभग 50 फीट चौड़े दो बड़े गड्ढे बन गए थे। उस समय पाकिस्तान वायुसेना ने समय और लागत बचाने के लिए तुरंत रैपिड रनवे रिपेयर का सहारा लिया था। जानकारों का कहना है कि रनवे की पूरी रीसरफेसिंग में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं और महीनों का समय लगता है।
"सरगोधा एयरबेस पर इतने लंबे समय बाद भी स्थायी मरम्मत का चलना यह साबित करता है कि भारतीय वायुसेना के हमले कितने सटीक और गहरे थे। शुरुआती अस्थाई व्यवस्था लंबे समय तक नहीं टिक सकती।" — डॉ. डीके पांडे, रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन
अन्य एयरबेसों की भी खुली पोल
सिर्फ सरगोधा ही नहीं, बल्कि भारतीय एजेंसियों की नजर पाकिस्तान के दूसरे सैन्य ठिकानों पर भी है। ओएसआईएनटी टीम के विश्लेषण के मुताबिक, पाकिस्तान के नूर खान, जैकोबाबाद, रहीम यार खान और भोलारी जैसे कई अन्य एयरबेसों पर भी हमलों के बाद मरम्मत में महीनों का वक्त लगा है। कुछ जगहों पर तो आज भी हैंगर और बुनियादी ढांचे की मरम्मत का काम अधूरा पड़ा है। सरगोधा की यह ताजा तस्वीरें साफ दिखाती हैं कि भारतीय कार्रवाई ने दुश्मन की कमर तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी और उसका असर लंबे समय तक बना रहेगा।





