नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — मध्य पूर्व के आसमान में अचानक मंडराए बड़े खतरे के बाद विमानन सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। रियाद जा रही एयर इंडिया की एक नियमित उड़ान को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा है। यमन के सक्रिय हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के प्रमुख ठिकानों और एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले किए जाने की पुख्ता खबरें सामने आई थीं। इस गंभीर सुरक्षा खतरे को देखते हुए एयरलाइन प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात नियंत्रण ने तुरंत आपातकालीन कदम उठाया। विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि रखते हुए फ्लाइट को उसके शुरुआती गंतव्य की ओर मोड़ दिया गया या सुरक्षित बेस पर उतार लिया गया। इस घटना के बाद से खाड़ी देशों की ओर जाने वाली अन्य उड़ानों के रूट और सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यमन के अदन एयरपोर्ट और रियाद के आसपास के इलाकों में हूती विद्रोहियों ने हाल ही में ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी हैं। सऊदी अरब के फ्यूल डिपो और रणनीतिक ठिकानों पर इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में खौफ का माहौल बन गया है। सऊदी सेना ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए हूतियों के ठिकानों पर सौ से अधिक फाइटर प्लेनों से भीषण बमबारी की है और कई ठिकानों को तबाह करने का दावा किया है। इस भू-राजनीतिक संघर्ष और सैन्य टकराव के बीच भारतीय विमान का इस रास्ते से गुजरना बड़ा जोखिम साबित हो सकता था। यही कारण है कि पायलटों को तुरंत सतर्क किया गया और विमान को सुरक्षित दायरे से बाहर निकालते हुए वापस बुलाने का फैसला लिया गया।
सऊदी अरब के आसमान पर मंडराया युद्ध का साया
सऊदी अरब की राजधानी रियाद और उसके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाकर किए गए इन हमलों ने खाड़ी देशों की नींद उड़ा दी है। स्थानीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूती विद्रोहियों के इन हमलों से वहां के ईंधन डिपो में आग लगने जैसी बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और देश की रक्षा मशीनरी इस अचानक हुए हमले के बाद पूरी तरह सतर्क हो गई है। सीमावर्ती इलाकों और प्रमुख हवाई अड्डों पर एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय विमान कंपनियां इस क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरती हैं, यात्रियों की जान जोखिम में पड़ना तय माना जा रहा है। एयर इंडिया का यह विमान भी इसी संवेदनशील हवाई मार्ग से गुजर रहा था, जिसे समय रहते वापस बुलाकर एक बड़ा हादसा टाल दिया गया।
यमन और सऊदी अरब के बीच चल रही इस पुरानी जंग ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए गंभीर चिंता पैदा कर दी है। पश्चिमी एशिया में ईरान और रूस की गतिविधियों के साथ-साथ इस तरह के मिसाइल हमलों ने कूटनीतिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है। रूस के कथित डूम्सडे प्लेन के ईरान के आसपास देखे जाने की खबरों ने इस तनाव को और अधिक हवा दे दी है। इन तमाम हालात को ध्यान में रखते हुए भारतीय विमानन नियामक और संबंधित एयरलाइंस अपने अंतरराष्ट्रीय रूटों में तत्काल फेरबदल कर रही हैं। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व का यह आसमान पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं होता, तब तक ऐसी एहतियाती वापसी का सिलसिला जारी रह सकता है।
यात्रियों में दहशत और एयरलाइंस की नई गाइडलाइन
बीच रास्ते से फ्लाइट के लौटने के बाद से रियाद जाने वाले यात्रियों और उनके परिजनों में भारी बेचैनी और डर का माहौल है। दिल्ली और मुंबई समेत कई बड़े हवाई अड्डों पर यात्रियों ने एयरलाइंस अधिकारियों से अपनी सुरक्षा को लेकर सवाल किए हैं। एयर इंडिया के प्रबंधकों ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की जान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है और स्थिति सामान्य होने तक हर उड़ान पर बारीकी से नजर रखी जाएगी। टिकट बुक कराने वाले और यात्रा की तैयारी कर रहे लोगों को लगातार नई अपडेट्स दी जा रही हैं ताकि किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी से बचा जा सके।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले दिनों में पश्चिमी एशिया के ऊपर से गुजरने वाले सभी नागरिक विमानों के लिए नए सुरक्षा मानक लागू किए जा सकते हैं। युद्धग्रस्त क्षेत्रों के नजदीकी एयरस्पेस को नो-फ्लाई जोन घोषित करने या वैकल्पिक लंबे रूट अपनाने पर विचार चल रहा है, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं। फिलहाल, भारतीय विमानन कंपनियों के लिए यह स्थिति एक बड़ी परीक्षा की घड़ी है, जहां एक तरफ समय पर सेवाएं देने का दबाव है, तो दूसरी तरफ यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल है। हमारी टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे की हर पुख्ता जानकारी आप तक पहुंचाती रहेगी।










