संगीत जगत की कड़वी सच्चाई पर छलका मशहूर गायक का दर्द
भारतीय संगीत इंडस्ट्री में अपनी सुरीली आवाज से दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाले दिग्गज गायक सोनू निगम ने एक बार फिर इंडस्ट्री के अंदरखाने की ऐसी सच्चाई उजागर की है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने खुलकर बात की कि कैसे आज के दौर में कला और प्रतिभा पीछे छूट गई है और पैसों का खेल सबसे आगे निकल गया है। सोनू निगम ने इंडस्ट्री के उस काले सच से पर्दा उठाया है, जिसके बारे में बड़े-बड़े कलाकार अक्सर बोलने से बचते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब केवल अच्छा गाना या बेहतरीन आवाज होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके पीछे एक बहुत बड़ा आर्थिक गणित काम करता है।
सोनू निगम ने बताया कि आज के समय में युवा कलाकारों के लिए रास्ते बहुत कठिन हो गए हैं। यदि किसी नए गायक को अपनी पहचान बनानी है या किसी बड़े प्रोजेक्ट में जगह चाहिए, तो उसे अपनी जेब ढीली करनी ही पड़ती है। यह स्थिति उन कलाकारों के लिए बेहद निराशाजनक है जो केवल अपनी मेहनत और भगवान के दिए हुनर के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी व्यवस्था में संगीत की गुणवत्ता कहीं पीछे छूट गई है और मार्केटिंग तथा पैकेजिंग ने उसकी जगह ले ली है।
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सोशल मीडिया और पीआर के बूते तय हो रही है गायकों की सफलता
डिजिटल युग के आने के बाद से मनोरंजन जगत का पूरा परिदृश्य बदल चुका है। अब किसी भी गाने के हिट होने या फ्लॉप होने का फैसला सोशल मीडिया के व्यूज और रील्स पर निर्भर करता है। सोनू निगम ने इसी बात पर गहरी चिंता जताई है। उनका मानना है कि आज की तारीख में रिकॉर्ड लेबल और कंपनियां इस बात पर ज्यादा ध्यान देती हैं कि सोशल मीडिया पर किस कलाकार का कितना दबदबा है या उसके कितने फॉलोअर्स हैं।
गायक ने आगे विस्तार से समझाया कि कैसे पीआर एजेंसियों और डिजिटल मार्केटिंग के जरिए किसी भी साधारण आवाज को रातों-रात स्टार बना दिया जाता है, जबकि असली रियाज और साधना करने वाले कलाकार हाशिए पर चले जाते हैं। यह स्थिति उन संगीतकारों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी संगीत को समर्पित कर दी है। उन्होंने श्रोताओं से भी अपील की कि वे केवल दिखावे और ट्रेंड्स के पीछे न भागें, बल्कि असली कला को पहचानें और उसका समर्थन करें।
पुराने दौर और आज की कार्यशैली में आया जमीन-आसमान का अंतर
सोनू निगम ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके दौर में काम पाने का तरीका बिल्कुल अलग था। तब निर्माताओं और संगीत निर्देशकों की नजर सिर्फ इस बात पर होती थी कि गायक की आवाज में कितनी गहराई है और वह गाने के भाव को कितनी अच्छी तरह समझ सकता है। स्टूडियो में घंटों रियाज होता था और एक सही टेक के लिए पूरी टीम जी-जान लगा देती थी।
लेकिन आज के समय में सब कुछ बहुत कम समय और तकनीक के सहारे किया जाता है। ऑटो-ट्यून और डिजिटल सुधारों के जरिए किसी की भी आवाज को ठीक कर दिया जाता है। इस वजह से संगीत की वह रूहानी खूबसूरती धीरे-धीरे गायब होती जा रही है जो कभी भारतीय संगीत की पहचान हुआ करती थी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस अंधाधुंध दौड़ में संगीत की मौलिकता नष्ट हो रही है।
युवा प्रतिभाओं के लिए क्या बचा है संदेश?
इस पूरी बातचीत के दौरान सोनू निगम ने उन लाखों युवाओं को भी संदेश दिया जो हर दिन सपनों का शहर मुंबई अपनी किस्मत आजमाने आते हैं। उन्होंने कहा कि रास्ता कठिन जरूर है, लेकिन सच्चे कलाकारों को कभी भी अपनी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। भले ही आज का माहौल थोड़ा अलग और चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन लोगों के दिलों तक पहुंचने का सबसे अच्छा जरिया आज भी सच्चाई और रियाज ही है।
"आज के समय में संगीत इंडस्ट्री केवल कला की जगह नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा बाजार बन चुका है जहाँ हर चीज का दाम चुकाना पड़ता है। लेकिन सच्ची कला वही है जो तमाम बाधाओं को पार करके सीधे श्रोता के दिल तक उतरे।" — सोनू निगम, प्रसिद्ध गायक
निष्कर्ष और आगे की राह
सोनू निगम के इस बेबाक बयान ने एक बार फिर से इस बहस को छेड़ दिया है कि क्या हमारी संगीत इंडस्ट्री वाकई अपनी दिशा से भटक रही है। जिस तरह से उन्होंने इंडस्ट्री के भीतर चल रहे व्यापारिक दबावों और पैसों के खेल को उजागर किया है, वह आने वाले समय में एक बड़ी बहस का मुद्दा बन सकता है। अब देखना यह होगा कि आने वाली पीढ़ी के संगीतकार इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और क्या वे इस व्यावसायिक दबाव के बीच अपनी मौलिकता को बचा पाते हैं या नहीं।






