दक्षिण कोरिया उच्च शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है, जहां दुनिया भर के हजारों छात्र हर साल अपनी पढ़ाई पूरी करने पहुंचते हैं। हालांकि, डिग्री हासिल करने के बाद देश के श्रम बाजार में पैर जमाना इन युवाओं के लिए आसान नहीं है। हाल ही में सामने आए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण कोरियाई विश्वविद्यालयों से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाले और देश में ही रहने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में से महज 34.3 फीसदी को ही रोजगार मिल पाया है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी विदेशी छात्रों को स्थानीय नौकरी बाजार में कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
इस स्थिति को बदलने और विदेशी छात्रों को अधिक सक्षम बनाने के लिए अब वहां के विश्वविद्यालयों ने अपनी रणनीतियों में बदलाव करना शुरू कर दिया है। पारंपरिक अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ अब व्यावहारिक कौशल और करियर निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। न्याय मंत्रालय के आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि जो छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद दक्षिण कोरिया में ही रुकना चाहते हैं, उनके लिए सबसे बड़ी बाधा कंपनियों की अपेक्षाओं के अनुरूप खुद को ढालना और सही दिशा में मार्गदर्शन पाना है। यही वजह है कि शैक्षणिक संस्थानों ने अब केवल डिग्री देने तक सीमित न रहकर प्लेसमेंट और जॉब ट्रेनिंग को अपनी प्राथमिकता बना लिया है।
पाठ्येतर गतिविधियों को मिल रहा है नया महत्व और डिजिटल बैज
छात्रों की योग्यता को केवल अंकों के आधार पर मापने के बजाय अब उनके समग्र विकास को परखा जा रहा है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए क्यंग ही विश्वविद्यालय ने 'KHU-PASS' (पाथवे फॉर एकेडमिक एंड सोशल सक्सेस) नामक एक अनूठा प्रमाणन कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों द्वारा कक्षाओं के बाहर की गई गतिविधियों और उनमें हासिल किए गए कौशलों को आधिकारिक मान्यता देना है। इसके जरिए छात्रों की क्षमताओं को एक ठोस प्रमाण पत्र के रूप में तैयार किया जाता है, जिसे वे अपने बायोडाटा या लिंक्डइन प्रोफाइल में शामिल कर सकते हैं।
यह विशेष कार्यक्रम मुख्य रूप से पाँच प्रमुख दक्षता क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिनमें स्व-प्रबंधन, समस्या-समाधान, प्रभावी संचार, टीम वर्क और रचनात्मक सोच शामिल हैं। जो छात्र इन सभी मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा करते हैं, उन्हें एक डिजिटल बैज और प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। इसके माध्यम से कंपनियों के लिए यह समझना आसान हो जाता है कि संबंधित छात्र के पास काम का कितना व्यावहारिक अनुभव और मानसिक कौशल है। इस प्रणाली में करियर की योजना बनाने से लेकर नौकरी के लिए आवेदन करने के कौशल सिखाने तक की तमाम गतिविधियां शामिल होती हैं।
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विशेष करियर केंद्रों की स्थापना से मिल रही है प्रशासनिक मदद
व्यावहारिक मार्गदर्शन की कमी को दूर करने के लिए दक्षिण कोरिया के कई विश्वविद्यालयों ने अपने परिसरों में विशेष करियर केंद्रों की शुरुआत की है। उदाहरण के तौर पर, सिंग्योंगजू विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सहायता के लिए एक समर्पित करियर केंद्र खोला है। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य विदेशी छात्रों को कोरियाई कार्य संस्कृति से परिचित कराना, उन्हें सही इंटर्नशिप के अवसर तलाशने में मदद करना और साक्षात्कार की जटिल प्रक्रियाओं के लिए तैयार करना है।
इसके अलावा, विदेशी छात्रों के लिए सबसे बड़ी उलझन कार्य वीजा यानी ई-7 वीजा और उससे जुड़ी अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करने की होती है। ये नए करियर केंद्र वीजा संबंधी कानूनी पेचीदगियों और सरकारी औपचारिकताओं को सुलझाने में भी छात्रों की पूरी मदद करते हैं। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के समर्पित सहायता केंद्रों से विदेशी छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे स्थानीय कंपनियों में बेहतर तरीके से अपनी जगह बना सकेंगे।
दक्षिण कोरियाई श्रम बाजार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं का तालमेल
वर्तमान समय में दक्षिण कोरिया की डेमोग्राफिक स्थिति ऐसी है कि वहां कार्यबल की कमी महसूस की जा रही है, और अंतरराष्ट्रीय छात्र इस कमी को पूरा करने का एक बेहतरीन जरिया बन सकते हैं। यही कारण है कि सरकार और शैक्षणिक संस्थान दोनों मिलकर ऐसे उपाय ढूंढ रहे हैं जिनसे विदेशी प्रतिभाओं को देश में ही रोका जा सके। जब तक विश्वविद्यालय छात्रों को केवल किताबी ज्ञान देते थे, तब तक रोजगार दर कम थी, लेकिन अब व्यावहारिक प्रशिक्षण के जुड़ने से स्थिति में सुधार की उम्मीद बंध रही है।
"अंतरराष्ट्रीय छात्रों को केवल शिक्षा प्रदान करना ही हमारा लक्ष्य नहीं है, बल्कि उन्हें कोरियाई समाज और श्रम बाजार का एक सक्रिय हिस्सा बनाना हमारी प्राथमिकता है। जब तक छात्रों को सही समय पर सही मार्गदर्शन और कार्य अनुभव नहीं मिलेगा, तब तक वे इस प्रतिस्पर्धी बाजार में टिक नहीं पाएंगे।" — शिक्षा विशेषज्ञ, दक्षिण कोरिया
भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए यह साफ है कि दक्षिण कोरिया में पढ़ाई करने आने वाले युवाओं के लिए अब रास्ते थोड़े सुगम होने लगे हैं। विश्वविद्यालयों द्वारा उठाए जा रहे इन सुधारात्मक कदमों से न केवल रोजगार दर में बढ़ोतरी होगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी वैश्विक स्तर पर प्रशिक्षित और कुशल युवा आसानी से मिल सकेंगे। छात्रों के लिए भी यह जरूरी है कि वे अकादमिक पढ़ाई के साथ-साथ इन विशेष करियर कार्यक्रमों का पूरा लाभ उठाएं ताकि वे स्थानीय रोजगार बाजार में अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर सकें।








